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कोई दीवार सी गिरी है अभी

सरकस में करतब दिखाने वाली लड़की तने हुए तार पर चलती है। लेकिन क्या बात है, वो तो अपने आप को खुली छतरी से संतुलित करती रहती है। जरा डगमगा कर गिरने लगती है तो दर्शक पलकों पर झेल लेते हैं।

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आपके लिये अनेक विषयों पर लेख

कुछ समय पहले समकाल में संजय तिवारी जी का लेख छ्पा था जिसमें उन्होने हिन्दी ब्लॉग जगत के बारे में लिखा था. उसके बाद भी वह कुछ समय तक समकाल में लिखते रहे. पिछ्ले कई महीनों से वह अपने अलग डोमेन पर चले गये हैं और अपनी पत्रिका विस्फोट के द्वारा कई सामयिक मुद्दों को [...]

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कका बालकनी में बैठे हुए सामने पार्क में खेलते हुए बच्चों को देख रहे थे.साथ ही पातड़ा (पंचाग) भी देख रहे थे. मैने उनसे पूछा.
"कका.. पंचाग में क्या देख रहे हो..? "
"अरे देख रहा था हरेला कब है. भोल (कल) हरेला है."
"ओ..कल है! कका बताइये कल क्या क्या करना है. "
"अरे यहां [...]

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पिछ्ले दिनों एक सेमिनार में गया था और एअरर्पोर्ट पर एक किताब दिखायी थी “डब्बेवाले”. डब्बेवालों के बारे में काफी कुछ सुना था. सुना था कि आई-आई-एम वाले लोग उन पर अध्ययन कर चुके हैं. एक बार बंगलौर में मुझे भी एक सेमिनार में इस संस्था के लोगों द्वारा ही तैयार किया प्रजेंटेसन देखने को [...]

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शाम को जब युनुस भाई की पोस्ट पर फैज की रचना का जिक्र सुना तो अपना खजाना देखा कि यह रचना तो मेरे पास थी ही और वह भी ‘गिरदा’ की आवाज में. ‘गिरदा’ ने यह रचना पिछ्ले साल दिल्ली में एक कार्यक्रम में गाई थी और सौभाग्य से उस कार्यक्रम में मैं भी शामिल था. मैने तब वह रचना रिकॉर्ड कर ली थी.

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रंजना जी अक्सर मेरे ब्लॉग पर आती रहती हैं और अपनी लंबी टिप्पणीयों का आशीर्वाद हमें प्रदान करती रहती हैं. उनकी टिप्पणी पर बनी मेरी पोस्ट स्त्रियां क्या खुद से सवाल पूछती हैं? अब तक की मेरी सबसे हिट और बहसात्मक पोस्ट रही है. पिछ्ले हफ्ते उन्होने मेरी एक पोस्ट भारत की राष्ट्रभाषा अंग्रेजी क्यों [...]

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मेरी आवाज में मधुशाला का एक

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जब शेर और बकरी एक ही घाट पानी पीने लगें तो समझ लो कि शेर की नीयत और बकरी की अक़्ल में फ़ितूर है। महमूद व अयाज का एक ही पंक्ति में बैठकर खाना भी ‘‘ऑडिट एंड इंस्पेक्शन’’ का हिस्सा है। सेठ साहब वास्तव में यह पता लगाना चाहते हैं कि खाने वाले अस्ली फ़क़ीर हैं या मैनेजर ने अपने यारों-रिश्तेदारों की पंगत बिठा दी है।

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इंजी पेन्नू का अपराध सिर्फ इतना था कि उन्होने http://kerals.com/ पर एक मलयालम ब्लॉग द्वारा सामग्री को चुराने का आरोप लगाते हुए एक ई-मेल लिखा था. बदले में इस साइट की ओर से उन्हे धमकी भरे ई-मेल भेजे गये. उन्हे शारीरिक क्षति पहुंचाने की धमकी दी गयी. उनके प्रोफाइल को एक पोर्न साइट से लिंक [...]

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1. रेबीज के नये इंजेक्शन की कसम, किसी कुत्ते में कहां है वह दम, जो भोंकता भी हो, चाटता भी हो,गरियाता भी हो, काटता भी हो,हम तो ऐसे ही थे, औरऐसे ही रहेंगे सनम.
2.
तेरे बिना जिन्दगी का नूर चला जायेगा,बिन काटे किसी को क्या मजा आयेगा,गाली खाने से नहीं डरते हैं हम,मेरे दोस्तखायी गाली [...]

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केडीके महोदय बालकिशन जी की इस पोस्ट पर अपना कुदरती कवितायी हुनर दिखाना चाहते थे लेकिन सफल नहीं हुए तो हमको बोले कि इस “कवि की कल्पना” को किसी तरह ठेल दो. हमको भला क्या तकलीफ.हम ठेल रहे हैं. गाली.प्रसंशा सब केडीके साहब की.  
बालकिशन जी आप किस शोध के चक्कर में पढ़ गये. हमें मालूम [...]

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1. रेबीज के नये इंजेक्शन की कसम, किसी कुत्ते में कहां है वह दम, जो भोंकता भी हो, चाटता भी हो,गरियाता भी हो, काटता भी हो,हम तो ऐसे ही थे, औरऐसे ही रहेंगे सनम.
2.
तेरे बिना जिन्दगी का नूर चला जायेगा,बिन काटे किसी को क्या मजा आयेगा,गाली खाने से नहीं डरते हैं हम,मेरे दोस्तखायी गाली [...]

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सरकस में करतब दिखाने वाली लड़की तने हुए तार पर चलती है। लेकिन क्या बात है, वो तो अपने आप को खुली छतरी से संतुलित करती रहती है। जरा डगमगा कर गिरने लगती है तो दर्शक पलकों पर झेल लेते हैं।

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मैने सुना था कि कभी कभी लेखक द्वारा रचा गया कोई काल्पनिक चरित्र लेखक से भी आगे निकल जाता है और लेखक को पाठकों के हिसाब से फिर उस चरित्र को ढालना पड़ता है. जैसे जब हैरी पॉटर की लेखिका ने अपनी किताब में हैरी पॉटर को मारने की बात की तो कई पाठकों ने [...]

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1. रेबीज के नये इंजेक्शन की कसम, किसी कुत्ते में कहां है वह दम, जो भोंकता भी हो, चाटता भी हो,गरियाता भी हो, काटता भी हो,हम तो ऐसे ही थे, औरऐसे ही रहेंगे सनम.
2.
तेरे बिना जिन्दगी का नूर चला जायेगा,बिन काटे किसी को क्या मजा आयेगा,गाली खाने से नहीं डरते हैं हम,मेरे दोस्तखायी गाली [...]

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कका बालकनी में बैठे हुए सामने पार्क में खेलते हुए बच्चों को देख रहे थे.साथ ही पातड़ा (पंचाग) भी देख रहे थे. मैने उनसे पूछा.
"कका.. पंचाग में क्या देख रहे हो..? "
"अरे देख रहा था हरेला कब है. भोल (कल) हरेला है."
"ओ..कल है! कका बताइये कल क्या क्या करना है. "
"अरे यहां [...]

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