ऑटो/टैक्सी के लिये मोलभाव गलत है ? !

पिछले दिनों नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जाना हुआ.टिकट काउंटर के पास ही एक विश्रामालय है. उसके पास खड़े रह कर प्रतीक्षा कर रहा था कि सामने एक बोर्ड लगा हुआ देखा. पहले हिन्दी में पढ़ा फिर सोचा शायद मैं गलत समझ रहा हूँ.फिर अंग्रेजी में पढ़ा. मतलब तो वही निकलता था हिन्दी वाला :-)

क्या मैं सही समझ रहा हूँ कि रेलवे एक्ट के हिसाब से रेल यात्री टैक्सी या ऑटो के लिये मोलभाव नहीं कर सकते यानि वो जिस भी भाव में ले जायेगा जाना पड़ेगा या फिर आप दंड के भागी होंगे.आप भी देखिये. ज्ञान जी इस पर थोड़ा प्रकाश डालें तो बेहतर है.

railway_notice

Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

9 responses to “ऑटो/टैक्सी के लिये मोलभाव गलत है ? !”

  1. Sanjeet Tripathi

    सटीक पकड़ा!!

  2. समीर लाल

    हिन्दी अनुवाद ने मैसेज के अर्थ का अनर्थ कर दिया.

    मुझे लगता है यह टैक्सी/आटो वालों के लिये है कि वो यात्रियों से प्रचार/प्रसार नहीं कर सकते और न ही उन्हें लुभाने के लिये उनके आगे/पीछे घूम सकते हैं.

  3. Manish

    समीर जी ने सही कहा। देखिए देश की हालत अंग्रेजी लिखना, हिंदी से ज्यादा आसान हो गया है।

  4. ज्ञानदत्त पाण्डेय

    हिन्दी की चिन्दी है यह! :)

    रेलवे एक्ट की धारा देख बाद में सही सन्दर्भ/अर्थ देखूंगा. अभी घर पर रेलवे एक्ट की प्रति नहीं है.

  5. sanjay tiwari

    आप वहां क्यों इंतजार करते रहे. दरियागंज आ जाते, कुछ चाय-वाय पीते. न इंतजार करते, न झुंझलाहट होती और न हिन्दी की चिंदी निकलती.

  6. mamta

    उफ़ क्या हिंदी है । इसे कहते है हिंदी की टांग तोडना।

  7. अजित वडनेरकर

    वाह मान गए काकेश भाई, खूब पकड़ा आपने भी……सचमुच हिन्दी की चिंदी इसे ही कहते हैं।

  8. अजित वडनेरकर

    खूब नज़र पाई है काकेशजी आपने । सही जगह पकड़ा… यही है हिन्दी की चिन्दी

  9. Mamta Sharma

    जहाँ तक मेरी जानकारी है कि कोई भी ऑटो या टैक्सी चालक यात्री के साथ मोलभाव नहीं कर सकता यानि उसे हमेशा मीटर से ही चलना है. मीटर में जितना किराया आए उसे वही लेना चाहिए और यात्री को भी उसे मोल भाव करने हेतु बाध्य नही करना चाहिए. दिल्ली में न्यायभूमि नामक एक संस्था है जो दिल्ली के ऑटो चालकों को ईमानदारी से, मीटर से और बिना मनाही के साफ़ सुथरे ऑटो में सवारी के साथ बढ़िया व्यवहार कैसे करें. इस विषय में प्रशिक्षित कर रही है. अधिक जानकारी के लिए सभी पाठकों से अनुरोध है कि एक बार न्यायभूमि कि वेबसाईट जरुर देखें.
    WEBSITE – http://www.nyayabhoomi.org

Leave a Reply