March 2007
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क्या होगा आपका पत्रकार महोदय ??
बहस का प्रारम्भ तो हुआ था एक बहुत ही मासूम से सवाल से कि “पत्रकार क्यूं बने ब्लौगर” पर बहस बढ़ती गयी “दर्द बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की” की तर्ज पर .इसी विषय पर बहुत लोगों के विचार आये . मैने भी एक ‘मौजिया’ (बकौल फुरसतिया जी ) चिट्ठा लिख डाला. वो बात तो [...]
पत्रकार यूँ बने ब्लौगर !!
ब्लौग की दुनिया बड़ी निराली है . जब आप विवादित हों तो आपको हिट्स भी मिलती हैं और प्रतिक्रियायें भी . जब आप एक भाव पूर्ण कविता लिखो तो आप को कोई नही पूछ्ता -हां गिरिराज जी प्रशंसा करते हुए नाम के आगे प्रश्नचिन्ह जरूर लगा देते हैं . अनामदास जी कहते हैं कि “ब्लौग” [...]
तुम्हारे होने पर…..
नैनीताल समाचार (जो कि श्री राजीव लोचन शाह द्वारा निकाला जाता है) के नये अंक में श्री मुकेश नौटियाल की यह कविता छ्पी है. श्री मुकेश नौटियाल की दूसरी बेटी का जन्म 1 फरवरी को हुआ है. बहुत सही स्थिति का वर्णन किया है उन्होने. तुम्हारे आने की सूचना मुझे डाक्टर ने यूं दी – [...]
बालक की अभिलाषा .
चाह थी एक ‘सभ्य दुनिया’ में ,कदम जब मैं बढ़ाऊं लोग मेरा प्रेम से स्वागत करें, और गीत गायें इन रास्तों पर चल चुके पहले कभी, वो ही मेरे पथ प्रदर्शक बन , गले अपने लगा लें चाह थी.. कोई जब उंगली पकड़कर ,साथ मेरे यूं चलेगा नित नयी मंजिलों से ,रूबरू मैं हो सकुंगा [...]
बेमतलब की बात..!!
कल जब अपना चिट्ठा लिख रहा था तब ना तो मन में ये था- जैसा कि हमारे अग्रज (?) ने कहा “वैसे, विवादों से शुरुआत करना अपनी तरफ ध्यान आकर्षित कराने का पुराना फंडा रहा है।“ –कि मैं किसी का ध्यान अपनी और आकर्षित करूं और ना ही ये कि मैं “पिल्लम पिल्ली” कर कोई [...]
आचार संहिता का अनाचार
जुम्मा जुम्मा दो ही दिन तो हुए थे हमें (मुझे) हिन्दी में चिट्ठा शुरु किये कि मसिजीवी का ये चिट्ठा पढ़ा. (जबसे इंटरनैट पर चिट्ठा पढ़ना प्रारम्भ किया काफ़ी लोगो को खुद को “हम” पुकारते देखा.तब समझ में नहीं आया कि मैं खुद को क्या पुकारूं “मैं” या “हम”. फ़िर सोचा कि हिन्दी व्याकरण के [...]
पहली पोस्ट
बहुत दिनों से सोच रहा था कि मैं भी Blogging (चिठ्ठाकारी) प्रारम्भ करूँ पर एक तो हिन्दी लिखने का सहज साधन उपलब्ध नहीं था दूसरा ये भी भय था कि कही हिन्दी चिठ्ठाकारी के धुरुन्धर (लिंक दिया जा सकता था पर दे नही पाया…आप सुझायें.. ) इसे अन्यथा ना ले लैं. पहली समस्या को सुलझाया [...]