घुघुती जी का ‘आदेश’ हुआ की आप कौवों को फरमान भेजिये कि वो उनके घर के आस पास जायें क्योकि वो पिछ्ले सात साल से कौवों को घुघुतिया नहीं खिला पा रही हैं. वैसे अब तो घुघुतिया अगले साल आयेगा लेकिन हमने सोचा कि चलो हम तो अपना काम कर ही दें . तो हम [आगे पढ़ें.....]
कल अपने क्लिनिक पर बैठे थे तो एक व्यक्ति आये . अब आप कहेंगे कि मैने कभी बताया ही नहीं कि मैं डाक्टर हूँ …हमने तो कल तक आपको ये भी नहीं बताया था कि हम ‘कागाधिराज’ हैं….चलो आपके गिले शिकवे फिर कभी …अभी तो आप कल की बात सुनिये.
जी हाँ मैं डाक्टर हूं [आगे पढ़ें.....]
वैसे तो नाम के बारे में बहुत कुछ लिखा जा चुका है. शैक्सपियर जी से लेकर श्रीश जी तक ने बहुत कुछ लिखा है…. और हमारे आमिर “कोला” खान जी ने भी इसके बारे में कहा है कि “पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा” तो इसी नाम की बात को लेकर कुछ बात करते हैं.
कल [आगे पढ़ें.....]
प्यार की निष्ठाओं पर उठते सवालों के बीच रहता हूँ इस घर में
शब्द ,जब मौन की धरातल पर सर पटक चुप हो जायें
आस्था, जब विडम्बना की देहली पर दस्तक देने लगे
गीली आँखों के कोने में कोई दर्द , बेलगाम पसरा हो
तनहाइयां ,जब चीख के बोलना भूल जायें
आसमान ,अपनी स्वतंत्रता के अहसास को कोसने लगे
बर्बादियों से [आगे पढ़ें.....]
कल जब विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ की आज रविवासरीय जनसत्ता में हमारी प्रजाति के बारे में कुछ छप रहा है तो बड़ी खुशी हुई और तब से प्रतीक्षा करने लगे आज के ‘रविवासरीय जनसत्ता’ की . सुबह सुबह जब पेपर वाला आया तो उसे ‘जनसत्ता’ देने के लिये कहा . उसने कहा कि [आगे पढ़ें.....]
वैसे तो मुझे खुशी होनी चाहिये थी कि कल ढेर सारी हिट्स भी मिले और टिप्पणीयां भी ….पर ना जाने क्यों उतनी खुशी नहीं हुई .क्योंकि जिस सवाल को लेकर प्रतिकार प्रारम्भ हुआ था वो सवाल तो बना ही रहा बल्कि उस सवाल के जबाब तलाशने की जद्दोजहद में कुछ नये सवाल बनते चले गये [आगे पढ़ें.....]
आज मैं बैचेन हूँ.. इसलिये नहीं की मेरी पिछली पोस्ट “निश:ब्द” की तरह पिट गयी.. इसलिये भी नहीं कि मुझे फिर से “नराई” लगने लगी … इसलिये भी नहीं कि मुझे किसी ‘कस्बे’ या ‘मौहल्ले’ में किसी ने हड़का दिया हो .. इसलिये भी नहीं कि मेरा किसी ‘पंगेबाज’ से पंगा हो गया हो .बल्कि [आगे पढ़ें.....]
मेरा पहाड़ से क्या रिश्ता है ये बताना मैं आवश्यक नहीं मानता पर पहाड़ मेरे लिये ना तो प्रकृति को रोमांटिसाईज करके एक बड़ा सा कोलार्ज बनाने की पहल है ना ही पर्यावरणीय और पहाड़ की समस्या पर बिना कुछ किये धरे मोटे मोटे आँसू बहाने का निठल्ला चिंतन.ना ही पहाड़ मेरा अपराधबोध है,ना ही [आगे पढ़ें.....]
इस पॉड्कास्ट में मैने थोड़ा सा नया प्रयोग करने का प्रयास किया है.
पॉड्कास्ट यहां पढ़ें .
joota_puran1_5.mp3
इस पॉड्कास्ट में मेरी आवाज के अतिरिक्त मेरी पत्नी और पुत्र की आवाज के साथ एक स्पेशल आवाज भी है .
अपनी टिप्पणीयों से उत्साह वर्धन करें
जब मैने पॉडकास्टिंग शुरु की थी तो उस समय आर.सी.मिश्रा जी ने सुझाया था कि पॉडकास्ट को ब्लौग में ही लगा दें . इसीलिये इस नये ब्लौग में वही करने का प्रयास है.
पहली पॉड्कास्ट पेश है….. इसे यदि पढ़ना चाहें तो यहाँ पढ़ें .
joota_puran1.mp3
आगे से नियमित पॉडकास्ट करने का विचार है. सुनते रहें .
Please [आगे पढ़ें.....]
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