कल स्वामी जी से मुलाकात हुई तो उन्होने ब्लौग लिखने के कई तरीके बताए. कई नयी बातें सीखने को मिली. य़े सत्य है कि आज भी हिन्दी चिट्ठाकरिता में उस विविधता की कमी है जो अन्य भाषाओं के ( विशेषकर अंग्रेजी ) के चिट्ठों में मिलती है लेकिन विकसित और विकाशसील का अंतर समाप्त होने [आगे पढ़ें.....]
कल जब अपनी नयी प्रयोगात्मक पॉड्कास्ट को फाइनल टच दे रहे थे कि कहीं से आवाज आयी.
का गजब हुआ जब लव हुआ ….. का गजब हुआ जब लव हुआ ..
गांव के गँवार छोरे को जब शहर की स्मार्ट लड़की से प्यार हो जाता है तो वो जैसे खुश होकर इधर उधर डोलता है वैसे ही कुछ [आगे पढ़ें.....]
जब पहली पॉड्कास्ट आप सब के सामने प्रस्तुत कर रहा था तो यह नहीं सोचा था कि इतने सारे लोग उस पॉड्कास्ट को सुनेंगे …पर आप द्वारा दी टिप्पणीयों से उत्साह वर्धन हुआ और आज लेकर आया हूं एक और पॉडकास्ट .
इस पॉड्कास्ट में मैने थोड़ा सा नया प्रयोग करने का प्रयास किया है.
पॉड्कास्ट यहां [आगे पढ़ें.....]
सर की सूजन से कुछ आराम मिला ही था कि अचानक फिर सर बज उठा . हम सोचे ..कि अब क्यों सैंडल रानी हम पर बजी पर देखा तो सैंडल रानी नहीं बल्कि जूता महाशय थे …हमने उनसे पूछा कि भाई अब आपको क्या आपत्ति है .तो वो बोले कल आपने “जूते की प्रेमिका सैंडल [आगे पढ़ें.....]
आज जीतू जी के अतीत की कथा सुनकर ब्लोग-नाद के बारे में पता चलाए .तो मेरी भी इच्छा हुई कि मैं अपनी आवाज रिकार्ड कर पोडकास्टिंग करूं .तो प्रस्तुत करता हूं मेरा पहला पोडकास्ट .
अभी ये केवल .mp3 में ही अपलोड कर पा रहा हूं.
पोडकास्ट यहां सुने .
अपनी टिप्पणी दें और कोई गलती हुई [आगे पढ़ें.....]
जूतमबाजी जारी है..कोई सिले जूते की भाषा सुनते सुनते इतना पक गया है कि कहता है जूते की सुनो वो तुम्हारी सुनेगा कोई फटे जूते की व्यथा कथा कहते नहीं थक रहा. . लेकिन मजे की बात यह है कि ये तो कोई बता ही नहीं रहा जूते का इतिहास ,भूगोल ( आप चाहें तो [आगे पढ़ें.....]
कुछ दिनों पहले एक पोस्ट में पढ़ा था कि हिन्दी ब्लौगिंग वाले जैसे जुरासिक पार्क में रहते हैं . उसी से मिलता जुलता एक कार्टून आज मिला. आप भी देखिये .
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