Archive for May, 2007

कृपया गँदा मत कीजिये-पॉडकास्ट

आजकल फिर पॉडकास्टिंग का बोल बाला है . तरकश की अच्छी अच्छी पॉडकास्ट तो सुनते ही थे पॉडभारती भी आ गया/गयी. इस सब को देख हमको यदि हमें भी जोश उमड़ गया …इस बुढ़ापे में …तो क्या गलत है .
तो लीजिये पेश है पॉडकास्टिंग के लिये नया चिट्ठा और नयी पॉड्कास्ट.
कई बार हम कुछ [...]

कवि कविता और इन्ची टेप ..सदी की सबसे बरबाद कविता.

(इस पोस्ट को साइबर कैफे से ऑनलाइन हिन्दिनी औजार का प्रयोग कर लिख रहा हूँ . इसलिये कुछ मात्रा की गलतियाँ हैँ जो कल ही सुधार पाऊँगा . आप मन ही मन सुधार लेँ . एक दिन उधार दें.)

आजकल कवियों पर शोध करने का फैशन चल निकला है . कोई कवि और कविता को नापने [...]

शब्दों की पड़ताल में,हम रह गये नि:शब्द ..

पिछ्ले हफ्ते मौन थे इसलिये नहीं कि किसी भाई ने धमकाया / समझाया हो कि मौन रहूं बल्कि इसलिये कि रोटी देने वाले ने भेज दिया किसी काम से और हम मजदूर की तरह चल दिये …यानि कि ऑफिस के काम से हमें शहर के बाहर जाना पड़ा . लप्पू-ट्प्पू (लैपटौप) तो साथ था पर [...]