Archive for July, 2007

लंगी लगाने की विशुद्ध भारतीय कला

नेतागिरी स्कूल में भर्ती होने वाले कुछ दुहारू (दूसरों को दूहने में माहिर) छात्रों की परीक्षा चल रही थी.वहां के प्रश्नपत्र में आये निबंध पर एक मेघावी और भावी इतिहास पुरुष छात्र का निबंध.
लंगी लगाना भारतीय मूल की प्रमुख कला है.लंगी लगाना यानि किसी बनते बनते काम को लास्ट मूमेंट में रोक देना.जैसे आप अपनी [...]

छोटे शहरों की बड़ी चिट्ठाकारी,सन्दर्भ-टाइम्स ऑफ इन्डिया.

रविवार 8 जुलाई को  अंग्रेजी के प्रमुख समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया में एक लेख छ्पा था ” Blogging straight from the heartland” . हाँलाकि मैं इस समाचार पत्र को पढ़ता हूँ पर मेरी नजर इस लेख पर नहीं पड़ी.शाम को श्रीश जी ने बातचीत के दौरान इस लेख के बारे में बताया. तुरंत खोज कर [...]

रंगबाजी का रंग बच्चों के संग

एक मास्साब क्लास में बच्चों को रंगो के बारे में पढ़ा रहे थे.उन्होने मास्साबों की चिर परिचित इस्टाईल में पूछा कि “बच्चो रंगो के बारे में तुम लोग क्या जानते हो? “.अब हमारे जमाने के बच्चे होते तो चुप होकर नीचे देखने लगते कि कहीं मास्साब से नजर मिली और उन्होने उठा कर पूछ लिया तो [...]

यह खाट बिछा लो आँगन में, लेटो, बैठो, आराम करो।

कल जब मित्र समीरलाल जी ने “मोटों की महिमा” छापी तो अपने मोटापे पर आती जाती शरम फिर गायब हो गयी और एक पुरानी पढी कविता याद आ गयी.. लीजिये कविता प्रस्तुत है…

आराम करो
आराम करो
एक मित्र मिले, बोले, “लाला, तुम किस चक्की का खाते हो?
इस डेढ़ छँटाक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते [...]

पूजा चौहान का वीडियो…!!

पिछ्ली पोस्ट में मैने पूजा का दर्द आपके सामने रखने की कोशिश की थी.
उस घटना का वीडियो देखिये..क्या यह शर्मनाक नहीं है ??
कुछ साथियों के कहने के बाद यह वीडियो हटा दिया गया है.

पूजा का प्रतिरोध और हम..

कल के टाइम्स ऑफ इंडिया में पूजा की तसवीर पहले पन्ने पर थी.चित्र नीचे देंखें ..खबर पढ़ी तो दिल दहल गया और साथ ही मन ही मन पूजा के साहस की प्रसंशा भी की.आज मसिजीवी ने जब इस पर लिखा और फिर सुजाता जी ने भी इसे छुआ तो रहा ना गया..और कुछ शब्दों की [...]

पूजा की नग्नता से उठते सवाल…..

कल योगेश जी ने बताया कि पूजा की अर्ध-नग्नता के पीछे किसी मीडिया वाले का हाल था.यदि ये सच है तो निन्दनीय है. सच जो भी हो मुझे आश्चर्य इस बात का है कि कैसे मीडिया इस बात को इतना बढ़ा चढा कर पेश कर सकता है.टाइम्स ऑफ इंडिया ने पूजा की अनसैंसर्ड चित्र को [...]

पुराने शब्दों की तलाश में…वाया अजदक

[ये पोस्ट अजदक की पोस्ट से प्रेरित है..]
पुराने टॉर्च पर नये सैल लगा के टटोलता टटोलता आगे बढ़ने की कोशिश करता रहा.जंगल तो नहीं था पर माहौल जंगल जैसा ही था… घुप्प अन्धेरा … सांय सांय बोलता सन्नाटा. दिन में हुई बारिस से जमीन भी गीली थी.पेड़ो से बीच बीच में गिरती बूंदें ..टप [...]