सभी संगीतप्रेमी चिट्ठाकारों से निवेदन

हिन्दी के कई चिट्ठाकार अब तकनीकी रूप से कुशल हो गये हैं. अपने चिट्ठों में तरह तरह के विजेट और चित्र लगाने लगे हैं. यह एक सुखद परिवर्तन है. इधर कुछ चिट्ठाकारों ने अपने चिट्ठों में मधुर संगीत प्रदान करने वाला कोई विजेट भी लगाया है. जो चिट्ठा खुलते ही मधुर संगीत से आपका [आगे पढ़ें.....]

दुखी होने के फायदे

कल एक महान विचारक की पुरानी डायरी हाथ लग गयी. यह सोच के डायरी खोली कि शायद उसमें किसी घोटाले की चर्चा होगी लेकिन उसमें तो महान चिंतन के अद्भुत सूत्र थे.प्रस्तुत हैं उसी डायरी के कुछ अंश..

दुखी होना मेरी मजबूरी ही नहीं मेरा पेशा भी है. मैं अक्सर अपनी सुविधानुसार दुखी [आगे पढ़ें.....]

धीरे धीरे ठंड बढ़ने लगी है

धीरे धीरे ठंड बढ़ने लगी है. देश के खाये पिये लोग खुश हैं.वे ठंड का इंतजार करते हैं. ठंड उन्हे अच्छे कपड़े पहनने का अवसर देती है. ठंड में आपकी पाचन क्षमता बढ़ जाती है तो कुछ लोग इसी को और अधिक खाने का अवसर बना लेते हैं.वैसे खाने वाले लोग किसी भी मौसम [आगे पढ़ें.....]

बिस्तरा है न चारपाई है:त्रिलोचन

बिस्तरा    है   न   चारपाई    है,जिन्दगी   खूब  हमने  पायी   है।

कल अंधेरे में जिसने सर काटा,नाम  मत  लो  हमारा   भाई है।

ठोकरें  दर-ब-दर  की थी हम थे,कम नहीं हमने मुँह की खाई है।

कब  तलक  तीर  वे  नहीं   छूते,अब  इसी  बात  पर   लड़ाई   है।

आदमी    जी  रहा  है  मरने कोसबसे    ऊपर    यही  सचाई है।

कच्चे ही हो अभी त्रिलोचन तुम धुन [आगे पढ़ें.....]

चम्पा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती:त्रिलोचन

कवि त्रिलोचन बीमार हैं. उनके बारे में ब्लॉग जगत में लिखा भी जा रहा हैं. कुछ दिनों पहले मैने एक पोस्ट लिखी थी जिसमें त्रिलोचन की कुछ कविताऎं प्रस्तुत की थी. कल अतुल ने उसी पोस्ट पर टिप्पणी कर त्रिलोचन के बारे में फणीश्वर नाथ रेणु के संस्मरण के बारे में बताया.उसे पढ़ा और [आगे पढ़ें.....]

गाली,गिनती और गंदा लतीफा तो अपनी मादरीजबान में ही मजा देता है

[ री-कैप : "खोया पानी" यह है उस व्यंग्य उपन्यास का नाम जो पाकिस्तान के मशहूर व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद यूसुफी की किताब आबे-गुम का हिन्दी अनुवाद है. इस पुस्तक के अनुवाद कर्ता है 'लफ़्ज' पत्रिका के संपादक श्री 'तुफैल चतुर्वेदी' जी. पुस्तक क्या है हास्य का पटाख़ा है और इतना महीन व्य़ंग्य की आपके [आगे पढ़ें.....]

अद्भुत व्यंग्य उपन्यास:’खोया पानी’ -1

पिछ्ले दिनों मैने आपको एक विमोचन समारोह पर आधारित कार्यक्रम के बारे में बताया था.खैर वो तो व्यंग्य था आज उस दिन खरीदी गई पुस्तक की समीक्षा करते हैं.

“खोया पानी” यह है उस व्यंग्य उपन्यास का नाम जो पाकिस्तान के मशहूर व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद यूसुफी की किताब आबे-गुम का हिन्दी अनुवाद है. इस [आगे पढ़ें.....]

लौट के सैंया घर को आये…

(आज फिर से व्यंग्य लिख रहा हूँ.मधुशाला की दुकान कोई खास चल नहीं रही.इससे पहले कि बाकि बचे ग्राहक भी लौट कर चले जायें और हमें दुकान समेटनी पड़े हमने सोचा कि चलो फिर से अपनी ऑकात पे आ ही जाते हैं.)

बच्चू सिंह जो कल तक मुँह उठाये घूम रहे थे आज मुँह [आगे पढ़ें.....]

खैयाम की रुबाइयाँ रघुवंश गुप्त की क़लम से

[कुछ पाठकों ने मेल भेज कर कहा कि मैं 'उमर खैयाम'  के जीवन-वृत के बारे में विस्तार से लिखुं. तो उन सभी सुधी पाठकों से कहना चाहुंगा कि 'उमर' के बारे में नैट पर पहले से ही बहुत जानकारी उपलब्ध है.हाँलाकि अधिकतर जानकारी अंग्रेजी में है फिर भी उसी जानकारी का अनुवाद कर यहां [आगे पढ़ें.....]

मैथिलीशरण गुप्त का अनुवाद

जैसा कि बताया जा चुका है कि मैथिलीशरण गुप्त और रघुवंश गुप्त दोनो ने उमर की रुबाइयों का हिन्दी अनुवाद किया था. आइये पहले मैथिलीशरण गुप्त के अनुवाद की चर्चा करें.

गुप्त जी अपनी भूमिका में लिखते हैं कि उन्हें उमर की रुबाइयों का हिन्दी अनुवाद करने के लिये राय कृष्णदास जी ने [आगे पढ़ें.....]

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