Dec 312007
 

आओ अब इस वर्ष को विदा कर ही दें. हर साल जाते समय कुछ यादें छोड़ जाता है ..कुछ सपने ..जो सपने ही रह जाते हैं.. कुछ सुनहली यादें..कुछ नये रिश्ते ..कुछ नये मित्र ..कुछ पुरानी शत्रुताऎं…सब कुछ पुराना सा लगने लगता है…नया वर्ष ..मन को समझाने के लिये आ जाता है..कल से नया साल है ..कुछ नया करो…नये संकल्प लो.. पुराने जो लिये थे उनका क्या…?? लेकिन मन को समझाते हैं… नहीं अब अगले साल तो ये करेंगे ही …चलिये कुछ नये संकल्प लें नये साल में…. कोशिश करें कि शायद इस बार पूरा कर पायें उन्हें….

आप सभी को नये वर्ष की शुभकामनाऎं….

(1)

नया साल आये…नया ख्याल आये..
मुझे रास्ता दिखाने कितने सवाल आये

मेरे शहर में कितने ,नये फ्लाईओवर बने हैं..
तेरे शहर से अब तो  तेरा हाल चाल आये..

वो रास्ता अब जल्दी कटने लगा तभी तो
मेरे दिमाग में ये  कैसे बबाल आये

मैं टौल टैक्स देकर खुशियां खरीदता हूँ
ट्रैफिक से बचके जल्दी ऑफिस पहुंचता हूँ
चेहरे पे फिर भी मेरे कैसा मलाल आये
मुझे रास्ता दिखाने कितने सवाल आये

फिर से यही कहूँगा शुभ हो ये नूतन वर्ष भी
उस बासी कड़ी में शायद फिर से उबाल आये

(2)

मच्छर …
तुम खून चूसते रहे साल भर
देते रहे नये नये रोग
अब तो साल खतम हो रहा है
और तुम बांकी मच्छरों के साथ
पार्टी मना रहे हो
इस शहर से दूर
तुम आज खूब पियो
खूब नाचो
पर फिर से आ जाओ
इस शहर में
उसी गंदगी में पलो बढ़ो
और नये साल के लिये
संकल्प लो
कि इस बार थोड़ा ज्यादा खून चूसोगे
क्योंकि
देश प्रगति कर रहा है…