आओ विदा कर ही दें…

आओ अब इस वर्ष को विदा कर ही दें. हर साल जाते समय कुछ यादें छोड़ जाता है ..कुछ सपने ..जो सपने ही रह जाते हैं.. कुछ सुनहली यादें..कुछ नये रिश्ते ..कुछ नये मित्र ..कुछ पुरानी शत्रुताऎं…सब कुछ पुराना सा लगने लगता है…नया वर्ष ..मन को समझाने के लिये आ जाता है..कल से नया [आगे पढ़ें.....]

लोकप्रिय लेख

बहस

1. स्त्रियां क्या खुद से सवाल पूछती हैं?

2. भारत की राष्ट्भाषा अंग्रेजी क्यों नहीं है

3. ये मेरा ब्लॉग और मेरा ब्लॉग

4. अंग्रेजी व हीन भावना

5. सागर भाई की उलझन

उत्तराखंड संबंधी नराई

1. नराई के बहाने सिर्फ नराई

2. नराई ंड की ...

3. परुली....

4. केमो बस की सर्-रर प्वां प्वां...

5. आमा और जंबू का धुंगार

व्यंग्य

1. एस.एम.एस.प्यार

2. तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं

3. एक ग्रेट फादर का बर्थडे…

4. कैसे कमायें लाखों….हिन्दी सेवा से

5. गणेश जी को प्रार्थना पत्र

अन्य

1. खैयाम की मधुशाला

2. एक बार बिदाई दे माँ घूरे आशी

3. उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवाद..

4. गाली,गिनती और गंदा लतीफा तो अपनी मादरीजबान में ही मजा देता है

5. धीरे धीरे ंड बढ़ने लगी है

www.blogvani.com