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	<title>Comments on: बालक की अभिलाषा .</title>
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	<description>Kakesh's KudKud</description>
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		<title>By: Shrish</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/abhilasha/comment-page-1/#comment-44</link>
		<dc:creator>Shrish</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Mar 2007 15:07:53 +0000</pubDate>
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		<description>अरे भाई टेंशन काहे लेते हो। खुद तो ऐसे विवाद पर बात की वो भी अनाधिकार, निहपक्षता से लिखते तो कोई कुछ न कहता। लेकिन आपने बात को पूरी तरह जाने बिना ही अपनी राय दे दी।

खैर छोड़िए, ऐसी छोटी-मोटी बातें तो यहाँ होती रहती हैं। आप लिखते रहिए और बेहतरीन लिखिए।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरे भाई टेंशन काहे लेते हो। खुद तो ऐसे विवाद पर बात की वो भी अनाधिकार, निहपक्षता से लिखते तो कोई कुछ न कहता। लेकिन आपने बात को पूरी तरह जाने बिना ही अपनी राय दे दी।</p>
<p>खैर छोड़िए, ऐसी छोटी-मोटी बातें तो यहाँ होती रहती हैं। आप लिखते रहिए और बेहतरीन लिखिए।</p>
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		<title>By: सृजन शिल्पी</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/abhilasha/comment-page-1/#comment-43</link>
		<dc:creator>सृजन शिल्पी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Mar 2007 03:49:55 +0000</pubDate>
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		<description>पुनश्च: यह भी रेखांकित कर रहा हूं कि कुछ पुराने चिट्ठाकारों के लिए(जिसमें आप शायद मुझे भी शामिल करके चल रहे हैं)&lt;b&gt; &#039;मगरमच्छ&#039; &lt;/b&gt; शब्द का प्रयोग करने की पहल आपने ही की थी। उसके बाद ही मैंने आपके लिए &#039;धूमकेतु&#039; शब्द का प्रयोग किया था।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पुनश्च: यह भी रेखांकित कर रहा हूं कि कुछ पुराने चिट्ठाकारों के लिए(जिसमें आप शायद मुझे भी शामिल करके चल रहे हैं)<b> &#8216;मगरमच्छ&#8217; </b> शब्द का प्रयोग करने की पहल आपने ही की थी। उसके बाद ही मैंने आपके लिए &#8216;धूमकेतु&#8217; शब्द का प्रयोग किया था।</p>
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		<title>By: सृजन शिल्पी</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/abhilasha/comment-page-1/#comment-42</link>
		<dc:creator>सृजन शिल्पी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Mar 2007 03:24:03 +0000</pubDate>
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		<description>काकेश जी, मेरी टिप्पणी से आपकी संवेदना आहत हुई, इसके लिए मुझे खेद है। लेकिन आप खुद ही सोच कर देखें कि आपने चिट्ठा लेखन की शुरुआत &quot;शुरुआती झटके&quot; श्रेणी के अंतर्गत पोस्ट लिखकर की और विषय भी विवादास्पद चुना और लहजा भी कुछ ऐसा, जिसमें नवागत-सुलभ विनम्रता के कोई संकेत नहीं थे। जिस विषय की पृष्ठभूमि से आप भलीभांति अवगत न हों, उसपर भिड़ने के लिए आप ताल ठोंककर मैदान में उतर आएं तो फिर आपको कुछ सुनने के लिए तैयार भी रहना चाहिए। आपकी आपत्ति यही थी न कि चिट्ठाकारों के लिए ऐसी कोई आचार-संहिता नहीं होनी चाहिए जिसमें एक-दूसरे पर किसी प्रकार का व्यक्तिगत आक्षेप या प्रहार किए जाने पर प्रतिबंध लागू हो। यदि आप व्यक्तिगत आक्षेप या प्रहार किए जाने को सही ठहराए जाने का पक्ष लेते हैं तो फिर आपके आहत होने का तुक समझ में नहीं आता।

कोई नया चिट्ठाकार यदि इस तरह से शुरुआत करे तो कोई भी यह अनुमान लगा सकता है कि आप इरादतन ऐसा कर रहे हैं, चाहे वह अपनी तरफ सबका ध्यान आकर्षित करने के लिए कर रहा हो या फिर किसी से प्रेरित होकर ऐसा कर रहा हों। &#039;धूमकेतु&#039; शब्द का प्रयोग व्यंग्यात्मक अर्थ में मैंने नहीं किया था, वह सिर्फ लक्षणात्मक था। धूमकेतु के लक्षण भी ऐसे ही होते हैं। यदि आप ऐसे नहीं हैं तो फिर अन्य आकाशीय पिंडों की तरह नियमित कक्षा में ही परिभ्रमण करें, बेहतर होगा। लेकिन यदि आपको विवादों में उलझना पसंद है और चिट्ठा जगत में एक-दूसरे पर व्यक्तिगत आक्षेप या प्रहार किए जाने को भी सही मानते हैं, तो फिर इस तरह की छोटी-छोटी बातों पर आहत मत हों। आप तो घोषणा कर ही चुके हैं कि आपको चिट्ठा जगत की राजनीति समझनी है और यहां के मगरमच्छों से निपटना है!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>काकेश जी, मेरी टिप्पणी से आपकी संवेदना आहत हुई, इसके लिए मुझे खेद है। लेकिन आप खुद ही सोच कर देखें कि आपने चिट्ठा लेखन की शुरुआत &#8220;शुरुआती झटके&#8221; श्रेणी के अंतर्गत पोस्ट लिखकर की और विषय भी विवादास्पद चुना और लहजा भी कुछ ऐसा, जिसमें नवागत-सुलभ विनम्रता के कोई संकेत नहीं थे। जिस विषय की पृष्ठभूमि से आप भलीभांति अवगत न हों, उसपर भिड़ने के लिए आप ताल ठोंककर मैदान में उतर आएं तो फिर आपको कुछ सुनने के लिए तैयार भी रहना चाहिए। आपकी आपत्ति यही थी न कि चिट्ठाकारों के लिए ऐसी कोई आचार-संहिता नहीं होनी चाहिए जिसमें एक-दूसरे पर किसी प्रकार का व्यक्तिगत आक्षेप या प्रहार किए जाने पर प्रतिबंध लागू हो। यदि आप व्यक्तिगत आक्षेप या प्रहार किए जाने को सही ठहराए जाने का पक्ष लेते हैं तो फिर आपके आहत होने का तुक समझ में नहीं आता।</p>
<p>कोई नया चिट्ठाकार यदि इस तरह से शुरुआत करे तो कोई भी यह अनुमान लगा सकता है कि आप इरादतन ऐसा कर रहे हैं, चाहे वह अपनी तरफ सबका ध्यान आकर्षित करने के लिए कर रहा हो या फिर किसी से प्रेरित होकर ऐसा कर रहा हों। &#8216;धूमकेतु&#8217; शब्द का प्रयोग व्यंग्यात्मक अर्थ में मैंने नहीं किया था, वह सिर्फ लक्षणात्मक था। धूमकेतु के लक्षण भी ऐसे ही होते हैं। यदि आप ऐसे नहीं हैं तो फिर अन्य आकाशीय पिंडों की तरह नियमित कक्षा में ही परिभ्रमण करें, बेहतर होगा। लेकिन यदि आपको विवादों में उलझना पसंद है और चिट्ठा जगत में एक-दूसरे पर व्यक्तिगत आक्षेप या प्रहार किए जाने को भी सही मानते हैं, तो फिर इस तरह की छोटी-छोटी बातों पर आहत मत हों। आप तो घोषणा कर ही चुके हैं कि आपको चिट्ठा जगत की राजनीति समझनी है और यहां के मगरमच्छों से निपटना है!</p>
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		<title>By: अनूप शुक्ला</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/abhilasha/comment-page-1/#comment-41</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ला</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Mar 2007 02:05:45 +0000</pubDate>
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		<description>पढ़ लिया दर्द!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पढ़ लिया दर्द!</p>
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