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	<title>Comments on: छोटे शहरों की बड़ी चिट्ठाकारी,सन्दर्भ-टाइम्स ऑफ इन्डिया.</title>
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	<description>Kakesh's KudKud</description>
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		<title>By: बसंत आर्य</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-441</link>
		<dc:creator>बसंत आर्य</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Jul 2007 11:24:13 +0000</pubDate>
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		<description>भाई साहब आप लोगों ने वाकई एक बड़ा काम कर दिया है जाने अनजाने. अब आप माने या न माने. दुनिया सब कुछ जान रही है और मन ही मन मान रही है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भाई साहब आप लोगों ने वाकई एक बड़ा काम कर दिया है जाने अनजाने. अब आप माने या न माने. दुनिया सब कुछ जान रही है और मन ही मन मान रही है.</p>
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		<title>By: Shrish</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-429</link>
		<dc:creator>Shrish</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Jul 2007 10:11:58 +0000</pubDate>
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		<description>मैंने अपना मत पत्र में सपष्ट कर ही दिया था, अन्य साथियों के लिए यहाँ फिर लिखता हूँ:

&lt;blockquote&gt;पल्लवी जी को भेजी जानकारी में मैंने नारद तथा सर्वज्ञ का लिंक दिया था। हाँ मैं इनका अधिक जिक्र नहीं कर सका क्योंकि उन्होंने कुछ निर्धारित प्रश्न भेजे थे जिनके जवाब मुझे देने थे, उन्हीं में मैंने इन दोनों साइटों का नाम और लिंक शामिल किया। इनके बारे में अधिक विस्तार से लिख सकूँ ऐसा कोई प्रश्न नहीं था।

फिर भी मुझे लगता था कि चूंकि रिपोर्टर ने मुझसे संपर्क किया तो वह अवश्य हिन्दी चिट्ठे पढ़ती रहती होंगी अतः उम्मीद थी कि नारद का उल्लेख/लिंक किया जाएगा।

मैं इस बात से निराश था लेकिन फिर जीतू भैया ने समझाया कि उस लेख का विषय भिन्न था, वह हिन्दी चिट्ठाकारी पर न था कि नारद आदि का नाम आता ही आता अतः हिन्दी का जितना उल्लेख हुआ वह भी संतोषजनक है।

मुझे उनकी बात उचित जान पड़ी, लेखिका ने मेरे और रवि जी समेत कुछ अन्य लोगों से बात कर स्टोरी तैयार की थी अतः मेरी दी सब जानकारी का शामिल संभव न था।
&lt;/blockquote&gt;

वैसे पल्लवी जी ने हमसे भी कंप्यूटर के साथ फोटो मंगवाई थी पर हमारे पास थी नहीं। अगर होती तो शायद हमारा फोटो भी छप जाता। :( :)

&lt;blockquote&gt;मैने प्रमुख चिट्ठों के पते जानने के लिये उन्हे चिट्ठा जगत डॉट कॉम की सकियता सूची को देखने की भी सलाह दी. ताकि वो अपने अगले लेख में अधिकाधिक हिन्दी चिट्ठाकारों को सम्मिलित कर सकें.&lt;/blockquote&gt;

मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं कि प्रमुख चिट्ठों की पहचान के लिए सक्रियता ही एकमात्र पैमाना है।

कुल मिलाकर अखबारों में लेख छपने से हमारा मुख्य मतलब यह है कि आम हिन्दुस्तानी को हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में पता चले ताकि अधिकतम लोग इससे जुड़ सकें, इसलिए आगे भी ऐसे लेख छपते रहें ऐसी हमारी इच्छा है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैंने अपना मत पत्र में सपष्ट कर ही दिया था, अन्य साथियों के लिए यहाँ फिर लिखता हूँ:</p>
<blockquote><p>पल्लवी जी को भेजी जानकारी में मैंने नारद तथा सर्वज्ञ का लिंक दिया था। हाँ मैं इनका अधिक जिक्र नहीं कर सका क्योंकि उन्होंने कुछ निर्धारित प्रश्न भेजे थे जिनके जवाब मुझे देने थे, उन्हीं में मैंने इन दोनों साइटों का नाम और लिंक शामिल किया। इनके बारे में अधिक विस्तार से लिख सकूँ ऐसा कोई प्रश्न नहीं था।</p>
<p>फिर भी मुझे लगता था कि चूंकि रिपोर्टर ने मुझसे संपर्क किया तो वह अवश्य हिन्दी चिट्ठे पढ़ती रहती होंगी अतः उम्मीद थी कि नारद का उल्लेख/लिंक किया जाएगा।</p>
<p>मैं इस बात से निराश था लेकिन फिर जीतू भैया ने समझाया कि उस लेख का विषय भिन्न था, वह हिन्दी चिट्ठाकारी पर न था कि नारद आदि का नाम आता ही आता अतः हिन्दी का जितना उल्लेख हुआ वह भी संतोषजनक है।</p>
<p>मुझे उनकी बात उचित जान पड़ी, लेखिका ने मेरे और रवि जी समेत कुछ अन्य लोगों से बात कर स्टोरी तैयार की थी अतः मेरी दी सब जानकारी का शामिल संभव न था।
</p></blockquote>
<p>वैसे पल्लवी जी ने हमसे भी कंप्यूटर के साथ फोटो मंगवाई थी पर हमारे पास थी नहीं। अगर होती तो शायद हमारा फोटो भी छप जाता। <img src='http://kakesh.com/wp-includes/images/smilies/icon_sad.gif' alt=':(' class='wp-smiley' />  <img src='http://kakesh.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<blockquote><p>मैने प्रमुख चिट्ठों के पते जानने के लिये उन्हे चिट्ठा जगत डॉट कॉम की सकियता सूची को देखने की भी सलाह दी. ताकि वो अपने अगले लेख में अधिकाधिक हिन्दी चिट्ठाकारों को सम्मिलित कर सकें.</p></blockquote>
<p>मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं कि प्रमुख चिट्ठों की पहचान के लिए सक्रियता ही एकमात्र पैमाना है।</p>
<p>कुल मिलाकर अखबारों में लेख छपने से हमारा मुख्य मतलब यह है कि आम हिन्दुस्तानी को हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में पता चले ताकि अधिकतम लोग इससे जुड़ सकें, इसलिए आगे भी ऐसे लेख छपते रहें ऐसी हमारी इच्छा है।</p>
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		<title>By: समीर लाल</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-430</link>
		<dc:creator>समीर लाल</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jul 2007 17:38:36 +0000</pubDate>
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		<description>बढ़िया समाचार. रवि भाई का नाम हो बहुत रोशन, तस्वीर तो राकेश रोशन!! बहुत खूब. बधाई. पल्लवी जी को साधुवाद.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बढ़िया समाचार. रवि भाई का नाम हो बहुत रोशन, तस्वीर तो राकेश रोशन!! बहुत खूब. बधाई. पल्लवी जी को साधुवाद.</p>
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		<title>By: ghughutibasuti</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-432</link>
		<dc:creator>ghughutibasuti</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jul 2007 07:26:27 +0000</pubDate>
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		<description>लेख पढ़कर बहुत प्रसन्नता हु ई।किन्तु मेरे हिसाब से तो ये सब चिट्ठाकार महानुभाव महानगरों में रहते हैं। यदि ये छोटी जगह के हैं तो मैं, जो 500 या शायद 600 की जनसंख्या व एक दुकान वाली जगह में रहती हूँ, जिसे मैं गाँव का दर्जा देने से भी हिचकिचाती हूँ, कहाँ की हूँ ? शायद बहुत ही छोटी जगह की और भी  बहुत ही छोटी  चिट्ठाकार !कद भी छोटा, बुद्धि भी छोटी, जगह भी  छोटी । लगता है इस छोटेपन को पेटेंट करा लूँ ।
कल जब दिल्ली की सड़क पार करना असंभव लगा और फिर अपने घुटनों को कष्ट देकर सबवे (यह शब्द भी मुझ छोटी जगह की प्राणी को अपनी भतीजी से पूछना पड़ा ! हमारे जंगल में ऐसी वस्तुएँ नहीं पाई जाती।) का उपयोग करना पड़ा ।
जब मैं बेटियों से मिलने शहर आती हूँ तो वे उँगली पकड़ कर मुझे साथ ले जाती हैं व सड़क भी पार करवाती हैं। जैसे छोटे बच्चों को सड़क पर अन्दर की तरफ़ रखा जाता है वैसे !
सो मैं चिटटकाकारों की गिनती में आऊँ ना आऊँ छोटी जगह की तो हूँ
ही । इस श्रेय को कोई मुझसे छीने मुझे कदापि सह्य नहीं है।
घुघूती बासूती</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>लेख पढ़कर बहुत प्रसन्नता हु ई।किन्तु मेरे हिसाब से तो ये सब चिट्ठाकार महानुभाव महानगरों में रहते हैं। यदि ये छोटी जगह के हैं तो मैं, जो 500 या शायद 600 की जनसंख्या व एक दुकान वाली जगह में रहती हूँ, जिसे मैं गाँव का दर्जा देने से भी हिचकिचाती हूँ, कहाँ की हूँ ? शायद बहुत ही छोटी जगह की और भी  बहुत ही छोटी  चिट्ठाकार !कद भी छोटा, बुद्धि भी छोटी, जगह भी  छोटी । लगता है इस छोटेपन को पेटेंट करा लूँ ।<br />
कल जब दिल्ली की सड़क पार करना असंभव लगा और फिर अपने घुटनों को कष्ट देकर सबवे (यह शब्द भी मुझ छोटी जगह की प्राणी को अपनी भतीजी से पूछना पड़ा ! हमारे जंगल में ऐसी वस्तुएँ नहीं पाई जाती।) का उपयोग करना पड़ा ।<br />
जब मैं बेटियों से मिलने शहर आती हूँ तो वे उँगली पकड़ कर मुझे साथ ले जाती हैं व सड़क भी पार करवाती हैं। जैसे छोटे बच्चों को सड़क पर अन्दर की तरफ़ रखा जाता है वैसे !<br />
सो मैं चिटटकाकारों की गिनती में आऊँ ना आऊँ छोटी जगह की तो हूँ<br />
ही । इस श्रेय को कोई मुझसे छीने मुझे कदापि सह्य नहीं है।<br />
घुघूती बासूती</p>
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		<title>By: arun</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-431</link>
		<dc:creator>arun</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jul 2007 04:44:49 +0000</pubDate>
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		<description>मास्साब १४ को बिना मिठाई के मत आ जाना...:)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मास्साब १४ को बिना मिठाई के मत आ जाना&#8230;:)</p>
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		<title>By: Tarun</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-433</link>
		<dc:creator>Tarun</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jul 2007 00:45:48 +0000</pubDate>
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		<description>वैसे श्रीश और रविजी (रविजी के लिये तो अब ये आम बात हो गयी है ;)) को बधाई</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वैसे श्रीश और रविजी (रविजी के लिये तो अब ये आम बात हो गयी है <img src='http://kakesh.com/wp-includes/images/smilies/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /> ) को बधाई</p>
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	<item>
		<title>By: Tarun</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-437</link>
		<dc:creator>Tarun</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Jul 2007 00:45:05 +0000</pubDate>
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		<description>इस बार चाहे और किसी ना आये ना आये तुम्हारा तो पक्का आयेगा, खैर मजाक एक तरफ लेकिन अच्छा किया मेल डाल कर वैसे हम उसे पढ़कर समझ गये थे कि ऐसा ही कुछ वजह है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस बार चाहे और किसी ना आये ना आये तुम्हारा तो पक्का आयेगा, खैर मजाक एक तरफ लेकिन अच्छा किया मेल डाल कर वैसे हम उसे पढ़कर समझ गये थे कि ऐसा ही कुछ वजह है।</p>
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		<title>By: रवि</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-436</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 18:10:49 +0000</pubDate>
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		<description>अरे, असली बात तो रह गई, आप सभी का फिर से एक बार धन्यवाद.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अरे, असली बात तो रह गई, आप सभी का फिर से एक बार धन्यवाद.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: रवि</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-435</link>
		<dc:creator>रवि</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 18:10:04 +0000</pubDate>
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		<description>भई, हमें पूरी बात कहनी नहीं आती - या समझानी नहीं आती. रेखा ने कोई दस बीस एंगल से कोई बीस पच्चीस फोटो खींची थी और जब उन्हें जमा पूरी तरह तब उसे भेजा. इसीलिए कहा कि उनका हाथ है!

और हम फुरसतिया जी की भी बात समझ रहे हैं, फोटो की तरह झकास बनने के लिए प्रयास जारी रखा जाएगा :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भई, हमें पूरी बात कहनी नहीं आती &#8211; या समझानी नहीं आती. रेखा ने कोई दस बीस एंगल से कोई बीस पच्चीस फोटो खींची थी और जब उन्हें जमा पूरी तरह तब उसे भेजा. इसीलिए कहा कि उनका हाथ है!</p>
<p>और हम फुरसतिया जी की भी बात समझ रहे हैं, फोटो की तरह झकास बनने के लिए प्रयास जारी रखा जाएगा <img src='http://kakesh.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: अनूप शुक्ल</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-434</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ल</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 17:48:04 +0000</pubDate>
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		<description>बहुत अच्छा लगा। यह समाचार पढ़ा था। रवि रतलामी और श्रीश बधाई के हकदार हैं। रविरतलामी की फोटो उनके मुकाबले बहुत झकास आ गयी। बधाई। :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बहुत अच्छा लगा। यह समाचार पढ़ा था। रवि रतलामी और श्रीश बधाई के हकदार हैं। रविरतलामी की फोटो उनके मुकाबले बहुत झकास आ गयी। बधाई। <img src='http://kakesh.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: paramjitbali</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-440</link>
		<dc:creator>paramjitbali</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 17:28:44 +0000</pubDate>
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		<description>पल्लवी जी धन्यवाद तो करना ही चाहिए।यमुनानगर के श्रीश जी का, रतलाम के रवि जी का,भी धन्यवाद, जिन के कारण चिट्ठाकारी को यश मिल रहा है</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पल्लवी जी धन्यवाद तो करना ही चाहिए।यमुनानगर के श्रीश जी का, रतलाम के रवि जी का,भी धन्यवाद, जिन के कारण चिट्ठाकारी को यश मिल रहा है</p>
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	<item>
		<title>By: मैथिली</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-439</link>
		<dc:creator>मैथिली</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 16:47:51 +0000</pubDate>
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		<description>सुश्री पल्लवी जी सही हैं
हम महानगर में बैठकर जो काम करने की सोच नही पाते वह रवि जी एवं श्रीश जी कैसे कर लेते हैं!

मैं तो रवि जी के ऊपर मिठाईयां खिलाने की उधारी गिन गिन कर रख रहा हूं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सुश्री पल्लवी जी सही हैं<br />
हम महानगर में बैठकर जो काम करने की सोच नही पाते वह रवि जी एवं श्रीश जी कैसे कर लेते हैं!</p>
<p>मैं तो रवि जी के ऊपर मिठाईयां खिलाने की उधारी गिन गिन कर रख रहा हूं.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: अभय तिवारी</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/article-in-times-of-india/comment-page-1/#comment-438</link>
		<dc:creator>अभय तिवारी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jul 2007 16:06:43 +0000</pubDate>
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		<description>सही है.. सवाल करने पर जवाब भी आता है..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सही है.. सवाल करने पर जवाब भी आता है..</p>
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