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	<title>Comments on: सागर भाई की उलझन और रचना जी की माफी</title>
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	<description>Kakesh's KudKud</description>
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		<title>By: kedar arya</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-8270</link>
		<dc:creator>kedar arya</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Jun 2010 09:49:20 +0000</pubDate>
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		<description>Rachna ji-------bilkul thik kaha---hindi dil hai to ----eng-demag hai aor apney kal ko behatar bananey ke liye---bhvi peedhi ko---english ko madhyam banana hi padega---sampurn shamat hu aapse--</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>Rachna ji&#8212;&#8212;-bilkul thik kaha&#8212;hindi dil hai to &#8212;-eng-demag hai aor apney kal ko behatar bananey ke liye&#8212;bhvi peedhi ko&#8212;english ko madhyam banana hi padega&#8212;sampurn shamat hu aapse&#8211;</p>
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		<title>By: anitakumar</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-2323</link>
		<dc:creator>anitakumar</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Apr 2008 02:14:30 +0000</pubDate>
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		<description>्मुद्दा सिर्फ़ हिन्दी और इंगलिश पर ही क्युं सीमित है। मुझे तो लगता है कि हम जितनी ज्यादा हो सके उतनी भाषाएं सीखें। मेरी भी ग्याहर्वीं तक की शिक्षा हिन्दी माध्यम से ही हुई थी, अंतिम दो साल गुजराती भी सीखनी पड़ी थी, जो हमने सहर्ष सीखी थी, कॉलेज में आते ही इंगलिश माध्यम में पढ़ाई शुरु हो गयी पर अगर मन में कोई डर या पूर्वग्रह न हो तो कोई भी भाषा सीखना इतना मुश्किल नहीं। हम रचना जी से भी सहमत है। हिन्दी मेरा भी दिल है और अग्रेंजी मेरा दिमाग्। आगे बढ़ने के लिए दोनो जरुरी</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>्मुद्दा सिर्फ़ हिन्दी और इंगलिश पर ही क्युं सीमित है। मुझे तो लगता है कि हम जितनी ज्यादा हो सके उतनी भाषाएं सीखें। मेरी भी ग्याहर्वीं तक की शिक्षा हिन्दी माध्यम से ही हुई थी, अंतिम दो साल गुजराती भी सीखनी पड़ी थी, जो हमने सहर्ष सीखी थी, कॉलेज में आते ही इंगलिश माध्यम में पढ़ाई शुरु हो गयी पर अगर मन में कोई डर या पूर्वग्रह न हो तो कोई भी भाषा सीखना इतना मुश्किल नहीं। हम रचना जी से भी सहमत है। हिन्दी मेरा भी दिल है और अग्रेंजी मेरा दिमाग्। आगे बढ़ने के लिए दोनो जरुरी</p>
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	<item>
		<title>By: गरिमा</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1210</link>
		<dc:creator>गरिमा</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Nov 2007 06:23:02 +0000</pubDate>
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		<description>हिन्दी इंग्लिश की गिटपिट मे तो मै ऐसी पिसी की बस अब तक कोई रास्ता नही मिला... 

लेकिन एक बात पक्की है, हिन्दी को बढाने के लिये कुछ भी कर कर लिया जाये, पर जो हिन्दी पर अटक जाते हैं, वास्तव मे खुद कोसते ही हैं... उदाहरण के तौर पर मै भी हूँ :)
हाँ इतना जरूर किया है कि, मेरे बाद भाई बहनो को तकलीफ ना हो, इसलिये हिन्दी से उनकी मुलाकात ना हो, इसका बन्दोबस्त कर दिया है... ताकि कम से कम उनका भविष्य बेहतर बने।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हिन्दी इंग्लिश की गिटपिट मे तो मै ऐसी पिसी की बस अब तक कोई रास्ता नही मिला&#8230; </p>
<p>लेकिन एक बात पक्की है, हिन्दी को बढाने के लिये कुछ भी कर कर लिया जाये, पर जो हिन्दी पर अटक जाते हैं, वास्तव मे खुद कोसते ही हैं&#8230; उदाहरण के तौर पर मै भी हूँ <img src='http://kakesh.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /><br />
हाँ इतना जरूर किया है कि, मेरे बाद भाई बहनो को तकलीफ ना हो, इसलिये हिन्दी से उनकी मुलाकात ना हो, इसका बन्दोबस्त कर दिया है&#8230; ताकि कम से कम उनका भविष्य बेहतर बने।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: सागर  नाहर</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1207</link>
		<dc:creator>सागर  नाहर</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 22 Nov 2007 05:41:39 +0000</pubDate>
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		<description>धन्यवाद काकेश जी, 
 मैं जल्दी ही पूरी बात आपके सामने रखने की कोशिश करूंगा। साथ ही रचना जी  क्षमा मांग कर मुझे शर्मिन्दा ना करें, मौका ही ऐसा था कि कोई भी यही समझता कि मैं आपको हिन्दी लिखने को बाध्य कर रहा हूँ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>धन्यवाद काकेश जी,<br />
 मैं जल्दी ही पूरी बात आपके सामने रखने की कोशिश करूंगा। साथ ही रचना जी  क्षमा मांग कर मुझे शर्मिन्दा ना करें, मौका ही ऐसा था कि कोई भी यही समझता कि मैं आपको हिन्दी लिखने को बाध्य कर रहा हूँ।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: mamta</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1199</link>
		<dc:creator>mamta</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 12:39:25 +0000</pubDate>
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		<description>मेरे ख़याल से तो कोई भी भाषा वो चाहे हिन्दी हो या इंग्लिश हो उसे जानने या  बोलने  मे कोई  हर्ज नही है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे ख़याल से तो कोई भी भाषा वो चाहे हिन्दी हो या इंग्लिश हो उसे जानने या  बोलने  मे कोई  हर्ज नही है।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Shiv Kumar Mishra</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1198</link>
		<dc:creator>Shiv Kumar Mishra</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 10:02:54 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://kakesh.com/?p=234#comment-1198</guid>
		<description>व्यवहारिकता सर्वोपरि है. अंग्रेजी जानना या अंग्रेजी का इस्तेमाल गुलामी को दर्शाता है, ऐसी बात कहना शायद जायज नहीं है. वैसे ही हिन्दी का इस्तेमाल देशभक्त होने की निशानी है, यह बात भी ठीक नहीं.

लेकिन मातृभाषा का इस्तेमाल जितना ज्यादा कर सकें उतना ही बढ़िया है. रचना जी और नाहर जी ने बड़ी इमानदारी से अपनी बातें रखी हैं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>व्यवहारिकता सर्वोपरि है. अंग्रेजी जानना या अंग्रेजी का इस्तेमाल गुलामी को दर्शाता है, ऐसी बात कहना शायद जायज नहीं है. वैसे ही हिन्दी का इस्तेमाल देशभक्त होने की निशानी है, यह बात भी ठीक नहीं.</p>
<p>लेकिन मातृभाषा का इस्तेमाल जितना ज्यादा कर सकें उतना ही बढ़िया है. रचना जी और नाहर जी ने बड़ी इमानदारी से अपनी बातें रखी हैं.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: balkishan</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1196</link>
		<dc:creator>balkishan</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 05:57:47 +0000</pubDate>
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		<description>मुझे तो आप सब के लेखों का इंतजार है जी क्योंकि अपन न तो हिन्दी अच्छे से जानते है और ना ही इंग्लिश.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे तो आप सब के लेखों का इंतजार है जी क्योंकि अपन न तो हिन्दी अच्छे से जानते है और ना ही इंग्लिश.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: संजय बेंगाणी</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1195</link>
		<dc:creator>संजय बेंगाणी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 05:32:52 +0000</pubDate>
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		<description>मुझे लगता है हमारी भावनाएं एक सी है बस व्यक्त अलग अलग तरह से कर रहे हैं. साथ ही खुद को दुसरे से ज्यादा हिन्दी प्रेमी मानने की भावना भी कुछ कुछ काम कर रही है.

अंग्रेजी मजबुरी है तो कहीं कहीं जरूरी भी है. अंग्रेजी हमारे मानस पर शासन न करे और हिन्दी को मजबुत करने के लिए मन से काम करें यही कामना है. अंग्रेजी को एक हथियार के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए. और हिन्दी का मजाक बर्दास्त न करें, चाहे वह फिल्मी कॉमेडी ही क्यों न हो.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मुझे लगता है हमारी भावनाएं एक सी है बस व्यक्त अलग अलग तरह से कर रहे हैं. साथ ही खुद को दुसरे से ज्यादा हिन्दी प्रेमी मानने की भावना भी कुछ कुछ काम कर रही है.</p>
<p>अंग्रेजी मजबुरी है तो कहीं कहीं जरूरी भी है. अंग्रेजी हमारे मानस पर शासन न करे और हिन्दी को मजबुत करने के लिए मन से काम करें यही कामना है. अंग्रेजी को एक हथियार के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए. और हिन्दी का मजाक बर्दास्त न करें, चाहे वह फिल्मी कॉमेडी ही क्यों न हो.</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: शास्त्री जे सी फिलिप्</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1194</link>
		<dc:creator>शास्त्री जे सी फिलिप्</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 04:19:56 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://kakesh.com/?p=234#comment-1194</guid>
		<description>चिट्ठा पढ कर अच्छा लगा. प्रिय सागर ने जो कहा है वह बहुत लोगों का अनुभव है. रचना जी ने जिस तरह जवाब दिया वह उनके विशाल हृदय को दिखाता है. साथ ही साथ उन्होंने एक बहुत अच्छा कथन दिया है:

&quot;देश भक्त होने का मतलब मेरी नज़र मै इंग्लिश का बहिष्कार नहीं हे अपितु इंग्लिश सीख कर उस पर शासन करना है ।&quot; 

यह एक दम सही है. मेरी लगभग सारी पढाई हिन्दी माध्यम में हुई. स्नातकोत्तर होने के बाद मैं ने स्वयं के प्रयत्न से अंग्रेजी सीखी एवं धाराप्रवाह बोलने लगा. लेकिन इसके बावजूद मैं हिन्दीप्रेमी ही रहा एवं अंग्रेजी बोलने में ऊचा एवं हिन्दी बोलने में नीच नहीं समझता क्योंकि कोई भी भाषा न तो ऊची है न नीची. हां एक बात जरूर है, हिन्दुस्तान में कई लोग जिस तरह अंग्रेजी को आगे बढाने के लिये हिन्दी का दमन करते हैं उसका मैं घोर विरोध करता हूं     -- शास्त्री 

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.
मैं अंग्रेजी खबर जाल से मुफ्त में पढ लेता हूँ. घर 
पर हिन्दी अखबार मंगाता हूं. एक दर्जन हिन्दी
पत्रिकायें भी मंगाता हूं.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>चिट्ठा पढ कर अच्छा लगा. प्रिय सागर ने जो कहा है वह बहुत लोगों का अनुभव है. रचना जी ने जिस तरह जवाब दिया वह उनके विशाल हृदय को दिखाता है. साथ ही साथ उन्होंने एक बहुत अच्छा कथन दिया है:</p>
<p>&#8220;देश भक्त होने का मतलब मेरी नज़र मै इंग्लिश का बहिष्कार नहीं हे अपितु इंग्लिश सीख कर उस पर शासन करना है ।&#8221; </p>
<p>यह एक दम सही है. मेरी लगभग सारी पढाई हिन्दी माध्यम में हुई. स्नातकोत्तर होने के बाद मैं ने स्वयं के प्रयत्न से अंग्रेजी सीखी एवं धाराप्रवाह बोलने लगा. लेकिन इसके बावजूद मैं हिन्दीप्रेमी ही रहा एवं अंग्रेजी बोलने में ऊचा एवं हिन्दी बोलने में नीच नहीं समझता क्योंकि कोई भी भाषा न तो ऊची है न नीची. हां एक बात जरूर है, हिन्दुस्तान में कई लोग जिस तरह अंग्रेजी को आगे बढाने के लिये हिन्दी का दमन करते हैं उसका मैं घोर विरोध करता हूं     &#8212; शास्त्री </p>
<p>हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है.<br />
मैं अंग्रेजी खबर जाल से मुफ्त में पढ लेता हूँ. घर<br />
पर हिन्दी अखबार मंगाता हूं. एक दर्जन हिन्दी<br />
पत्रिकायें भी मंगाता हूं.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: rachna</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1192</link>
		<dc:creator>rachna</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 03:12:19 +0000</pubDate>
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		<description>मेरे माता पिता दोनो विश्वविद्यालय मे रीडर के पद से रिटायर हुए  है । उनका सब्जेक्ट हिन्दी था । पर मेरी माता की जिद ने हमे इंग्लिश मीडियम मे शिक्षित किया । पर घर पर इंग्लिश कभी नहीं बोली जाती थी । मैने बहुत मेहनत की अपनी अग्रेजी बोलचाल को सुधारने की और आज मे दोने भाषायो मे काम कर सकती हूँ । देश भक्त होने का मतलब मेरी नज़र मै इंग्लिश का बहिष्कार नहीं हे अपितु इंग्लिश सीख कर उस पर शासन  करना है । मुझे फक्र है कि मे इंग्लिश और हिन्दी दोने माद्यम मे काम कर सकती हूँ । हिन्दीमेरा दिल है और हिन्दी मेरा अभिमान है और मै हिंदुस्तान मे रह कर इस बात को कहती हूँ । इंग्लिश मेरी मजबूरी नहीं मेरी ज़रूरत है और मै बिना hypocracy के इसे मानती हूँ । मेरे विचारों को आपने मंच दिया धन्यवाद .</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मेरे माता पिता दोनो विश्वविद्यालय मे रीडर के पद से रिटायर हुए  है । उनका सब्जेक्ट हिन्दी था । पर मेरी माता की जिद ने हमे इंग्लिश मीडियम मे शिक्षित किया । पर घर पर इंग्लिश कभी नहीं बोली जाती थी । मैने बहुत मेहनत की अपनी अग्रेजी बोलचाल को सुधारने की और आज मे दोने भाषायो मे काम कर सकती हूँ । देश भक्त होने का मतलब मेरी नज़र मै इंग्लिश का बहिष्कार नहीं हे अपितु इंग्लिश सीख कर उस पर शासन  करना है । मुझे फक्र है कि मे इंग्लिश और हिन्दी दोने माद्यम मे काम कर सकती हूँ । हिन्दीमेरा दिल है और हिन्दी मेरा अभिमान है और मै हिंदुस्तान मे रह कर इस बात को कहती हूँ । इंग्लिश मेरी मजबूरी नहीं मेरी ज़रूरत है और मै बिना hypocracy के इसे मानती हूँ । मेरे विचारों को आपने मंच दिया धन्यवाद .</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: अनूप शुक्ल</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1190</link>
		<dc:creator>अनूप शुक्ल</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 02:18:51 +0000</pubDate>
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		<description>आगे की कड़ी का इंतजार है। :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आगे की कड़ी का इंतजार है। <img src='http://kakesh.com/wp-includes/images/smilies/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: अभय तिवारी</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1189</link>
		<dc:creator>अभय तिवारी</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 01:36:10 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://kakesh.com/?p=234#comment-1189</guid>
		<description>मतलब भाषा की समस्या सुलझा कर ही मानोगे? ठीक है.. अब किसी को तो करना था.. चलो लग जाओ बन्धु..</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मतलब भाषा की समस्या सुलझा कर ही मानोगे? ठीक है.. अब किसी को तो करना था.. चलो लग जाओ बन्धु..</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: bhupen</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1187</link>
		<dc:creator>bhupen</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 00:21:29 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://kakesh.com/?p=234#comment-1187</guid>
		<description>भाषा की राजनीति पर भी बात हो तो बात बने.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भाषा की राजनीति पर भी बात हो तो बात बने.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Gyan Dutt Pandey</title>
		<link>http://kakesh.com/2007/english-tippani/comment-page-1/#comment-1186</link>
		<dc:creator>Gyan Dutt Pandey</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Nov 2007 00:08:35 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://kakesh.com/?p=234#comment-1186</guid>
		<description>उनसब के घर मै इंग्लिश के अखबार भी आते हैं और उनमे बहुत से केवल टाइम पास के लिये भाषा पर वाद विवाद करते हैं ।
--------------------------------------------------

मैं इस कथन से अपनी सहमति दर्ज कराये बिना नहीं रह सकता। मैं स्वयम हिन्दी मध्यम के स्कूल में पढ़ा हूं - हायर सेकेण्डरी तक। और अपने बच्चे,पैसे की कमी के कारण नहीं, पूरी सोच से हिन्दी माध्यम के स्कूल में पढ़ाये हैं। यह मानता रहा हूं कि प्रारम्भिक शिक्षा मातृभाषा में सर्वोचित है। 
पर हिन्दी के प्रति जबरी सेण्टी होना बेकार की बात लगती है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>उनसब के घर मै इंग्लिश के अखबार भी आते हैं और उनमे बहुत से केवल टाइम पास के लिये भाषा पर वाद विवाद करते हैं ।<br />
&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8211;</p>
<p>मैं इस कथन से अपनी सहमति दर्ज कराये बिना नहीं रह सकता। मैं स्वयम हिन्दी मध्यम के स्कूल में पढ़ा हूं &#8211; हायर सेकेण्डरी तक। और अपने बच्चे,पैसे की कमी के कारण नहीं, पूरी सोच से हिन्दी माध्यम के स्कूल में पढ़ाये हैं। यह मानता रहा हूं कि प्रारम्भिक शिक्षा मातृभाषा में सर्वोचित है।<br />
पर हिन्दी के प्रति जबरी सेण्टी होना बेकार की बात लगती है।</p>
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