आओ अब इस वर्ष को विदा कर ही दें. हर साल जाते समय कुछ यादें छोड़ जाता है ..कुछ सपने ..जो सपने ही रह जाते हैं.. कुछ सुनहली यादें..कुछ नये रिश्ते ..कुछ नये मित्र ..कुछ पुरानी शत्रुताऎं…सब कुछ पुराना सा लगने लगता है…नया वर्ष ..मन को समझाने के लिये आ जाता है..कल से नया साल है ..कुछ नया करो…नये संकल्प लो.. पुराने जो लिये थे उनका क्या…?? लेकिन मन को समझाते हैं… नहीं अब अगले साल तो ये करेंगे ही …चलिये कुछ नये संकल्प लें नये साल में…. कोशिश करें कि शायद इस बार पूरा कर पायें उन्हें….

आप सभी को नये वर्ष की शुभकामनाऎं….

(1)

नया साल आये…नया ख्याल आये..
मुझे रास्ता दिखाने कितने सवाल आये

मेरे शहर में कितने ,नये फ्लाईओवर बने हैं..
तेरे शहर से अब तो  तेरा हाल चाल आये..

वो रास्ता अब जल्दी कटने लगा तभी तो
मेरे दिमाग में ये  कैसे बबाल आये

मैं टौल टैक्स देकर खुशियां खरीदता हूँ
ट्रैफिक से बचके जल्दी ऑफिस पहुंचता हूँ
चेहरे पे फिर भी मेरे कैसा मलाल आये
मुझे रास्ता दिखाने कितने सवाल आये

फिर से यही कहूँगा शुभ हो ये नूतन वर्ष भी
उस बासी कड़ी में शायद फिर से उबाल आये

(2)

मच्छर …
तुम खून चूसते रहे साल भर
देते रहे नये नये रोग
अब तो साल खतम हो रहा है
और तुम बांकी मच्छरों के साथ
पार्टी मना रहे हो
इस शहर से दूर
तुम आज खूब पियो
खूब नाचो
पर फिर से आ जाओ
इस शहर में
उसी गंदगी में पलो बढ़ो
और नये साल के लिये
संकल्प लो
कि इस बार थोड़ा ज्यादा खून चूसोगे
क्योंकि
देश प्रगति कर रहा है…

8 Responses to “आओ विदा कर ही दें…”

  1. कहां हौ भईया, भौत दिनों बाद।
    जिस टोल ब्रिज पे पैसे देकर खुशी खऱीदते हो, उसी टोल ब्रिज की कंपनी नोएडा टोल ब्रिज का शेयर खरीद लो, पांच साल बाद भौत खुशी मिलेगी।

  2. नया तो नया ही होता है। नए के आने का उल्लास मनाइए। नव वर्ष मंगलमय हो।

  3. बासी कढ़ी में उबाल क्यों ? कढ़ी ही नई बना लें ? :-)
    नया साल मंगलमय हो !

  4. आप थे कहां इत्ते रोज़ से हुजूर….प्रत्यक्षा जी के सुझाव में दम है। अब यूं ही नमूदार रहिये…

  5. दर-असल नया या नव सुनते ही हमारे मन में नई आशाएं आती हैं जिसके चलते नव का स्वागत करेंगे ही क्योंकि आगत का स्वागत करना ही हम सीखते हैं और अगर वह आगत नव हो तो फिर बात ही क्या है!!
    नव वर्ष की शुभकामनाएं

  6. नव वर्ष के कई रंग बिखेरती रचनाएँ देने के लिए शुक्रिया. नूतन वर्ष में भी आप की कलम चलती रहे और मुस्कान चेहरे पे तैरती रहे येही कामना है.
    नीरज

  7. कहां थे मित्र? मच्छरों की संगत में? मलेरिया से तो बचे रहे न? चलो नये साल में कहीं मत जाना। मुबारक।

  8. बहुत खूब। साल मुबारक, काकेश ।

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