Archive for January, 2008

आमा और जंबू का धुंगार..

कल से तो सतझड़ (बारिश होना) पड़ रहे हैं भुला. सारे लकड़ी, गुपटाले भीग गये हैं. चूल्हा जलाने में धुंआ तो होगा ही. आमा (दादी) चूल्हे में फूंक मारते मारते अपने नाती को समझा रही है. लेकिन नाती जो अभी मात्र पांच साल का ही है उसे इस सतझड़ और गुपटालों (उपले)  से क्या मतलब. [...]

हमहूँ झुमरी तलैया- बिहार शिफ्ट हो रहा हूँ..

कहते हैं हम को समय की मांग के हिसाब से काम करना चाहिये.कल अमरीका जाने की बात की तो गुरु अजदक नाराज हो गये. वो खुद पहले इटली और अब चीन की यात्रा कर रहे हैं लेकिन हमको अमरीका नहीं जाने देंगे. इसलिये हमहूँ डिसाइड कर लिये कि हम झुमरी तलैया शिफ्ट हो जाते हैं. [...]

एक और भयानक चिट्ठाचोर..कहीं आपका…??

नमस्कार!
मैं Ashley Layla , अन्तर-जाल व्यापार का विशेषज्ञ हूँ| मैं खोज यन्त्र संधान कर्ता भी हूँ | मैं इस क्षेत्र में गत 1 वर्षो से हूँ तथा इसके प्रत्येक गुण एवं दोष से भालीभाती परिचित हूँ| आपके किसी भी जिज्ञाषा को शांत करने में पूर्णतया समर्थ, मैं आपकी सेवा में उपस्थित हूँ !
इन सब के [...]

क्या अमरीका में सचमुच ऎसा होता है?

मैं कभी अमरीका नहीं गया …हाँलाकि मेरे कई मित्र अभी अमरीका में हैं. वैसे मेरे पास भी कई ऑफर आये अमरीका जाने के (आई.टी. में यह कोई बड़ी बात नहीं है) लेकिन ना जाने क्यों अभी तक खुद को तैयार नहीं कर पाया इस के लिये.
अभी कुछ दिनों पहले एक मित्र से मुलाकात हुई जो [...]

टिप्पणीयाँ और कॉपीराइट

हिन्दी चिट्ठाजगत चोरी की घटनाऎं बीच बीच में सामने आती रहती हैं. कॉपीराइट का प्रश्न भी यदा-कदा उठता ही रहता है. अभी कुछ दिनों पहले टिप्पणीकार की किसी पोस्ट पर भी टिप्पणीयों पर कॉपीराइट की चर्चा हुई थी. इसलिये हमने सोचा कि इस यक्ष प्रश्न को फिर से उठाया जाय.
मेरी एक पोस्ट पर किसी बहन [...]

ये बहन जी कौन हैं?

मेरी टिप्पणी वाली पोस्ट पर विस्तृत टिप्पणीयाँ थमने का नाम ही नहीं ले रही. कल जब सोच रहा था कि शायद अब यह सिलसिला थम गया होगा तो आज सुबह देखा एक और बड़ी टिप्पणी आयी. यह टिप्पणी क्या ..यह तो किसी पोस्ट से भी बड़ी है. यह भी छ्द्म नाम से की गयी है [...]

दौड़ता हुआ पेड़

एक अच्छे व्यंगकार की खासियत है कि हास्य के रंगो के साथ साथ यथार्थ के ऎसे रंग मिलाये जायें कि पाठक को पता भी ना चले और गहरी से गहरी बात उसके दिमाग में सीधे उतर जाये.अंतिम पैरे में किबला के गांव का वर्णन तो देखिये. लगता है पूरा का पूरा चित्र आंखों के सामने [...]

मीर तकी मीर कराची में

[ व्यंग्य की दुनिया का अद्भुत नमूना है “खोया पानी”. यदि किसी को व्य़ंगकार की ओबजर्वेशन की ताकत का पता करना हो तो इस उपन्यास को पढ़े.यह पाकिस्तान के मशहूर व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद यूसुफी की किताब आबे-गुम का हिन्दी अनुवाद है. इस पुस्तक के अनुवाद कर्ता है ‘लफ़्ज’ पत्रिका के संपादक श्री ‘तुफैल चतुर्वेदी’ जी.  [...]