हलवाई की दुकान और कुत्ते का नाश्ता
उन्हें आज पहली बार मालूम हुआ कि गांव में मेहमान के आने का ऐलान कुत्ते, चोर और बच्चे करते हैं उसके बाद वो सारे गांव और हर घर का मेहमान बन जाता है।
उन्हें आज पहली बार मालूम हुआ कि गांव में मेहमान के आने का ऐलान कुत्ते, चोर और बच्चे करते हैं उसके बाद वो सारे गांव और हर घर का मेहमान बन जाता है।
पिछ्ले दिनों एक सेमिनार में गया था और एअरर्पोर्ट पर एक किताब दिखायी थी “डब्बेवाले”. डब्बेवालों के बारे में काफी कुछ सुना था. सुना था कि आई-आई-एम वाले लोग उन पर अध्ययन कर चुके हैं. एक बार बंगलौर में मुझे भी एक सेमिनार में इस संस्था के लोगों द्वारा ही तैयार किया प्रजेंटेसन देखने को [...]
पहली बार उसे अपनी लड़की होने का अहसास हुआ. एक लड़की किस हद तक मजबूर हो सकती है इस बात से मन ही मन उसे खुद से घृणा होने लगी.
सरकार की हर योजना में कुछ ना कुछ खोट निकाल कर भोली भाली भूखी जनता के सामने पकवानों की थाली की तरह प्रस्तुत करना पत्रकारों और बुद्धिजीवीयों का एक अच्छा टाइमपास है.मूर्ख बनाने का काम केवल सरकार ही करे यह ज़रूरी तो नहीं
गब्बर, सांभा, कालिया और हरी सिंह की टिप्पणीयां.
कभी अपने बुजुर्ग या बॉस या अपने से अधिक बदमाश आदमी को सही रास्ता बताने की कोशिश न करना। उन्हें ग़लत राह पर देखो तो तीन ज्ञानी बंदरों की तरह अंधे, बहरे और गूंगे बन जाओ!
समझ में न आया कि नेकचलनी का क्या सुबूत हो सकता है, बदचलनी का अलबत्ता हो सकता है। उदाहरण के लिये चालान,मुचलका, गिरफ़्तारी-वारंट, सजा के आदेश की नक़्ल या थाने में दस-नम्बरी बदमाशों की लिस्ट।पांच मिनट में आदमी बदचलनी तो कर सकता है नेकचलनी का सुबूत नहीं दे सकता।
साहित्य क्रांति नहीं करता; वह मनुष्यों के दिमाग़ बदलता और उन्हें क्रांति की ज़रूरत के प्रति जागरूक बनाता है.