Archive for March, 2008

मंथली रिव्यू प्रजेंटेशन

अभी प्रशांत ऑफिस पहुंचा था और मेल चैक कर रहा था.साथ साथ यह भी प्लानिंग कर रहा था कि आज किस किस से चैट करनी है और फिर अपनी ऑर्कुट की स्क्रैपबुक चैक कर सब को जबाबी स्क्रैप दागना है कि इंटरनल फोन पर घंटी बजी. उधर से कलीग प्रिया थी.
हाइ… प्रसान्त …(उफ यह [...]

कुत्ते की तारीफ और मुशायरा

वो रिश्वत की दूध जलेबी खा-खा कर इतना मोटा और काहिल हो गया था कि सिर्फ़ दुम हिलाता था। भोंकने में उसे आलस आने लगा था। पहले तो कुत्ते की जात है और फिर इसे तो ऐसी ट्रेनिंग दी गई है कि सिर्फ़ शरीफ़ों को काटता है।

ज़लील करने के अलग अलग शेड

मैंने आंख से, कुहनी के टहूके से, खंखार के, बहुतेरे इशारे किये कि अल्लाह के बंदे! अब तो बस कर। हद ये कि मैंने दायें कूल्हे पर चुटकी काटी को बायां भी मेरी तरफ़ करके खड़ा हो गया।मीर तक़ी मीर, जो ख़ुद बचपने में यतीम हो गये थे, ने मोहनी नाम की बिल्ली और कुतिया पर तो प्रशंसा में काव्य लिखे पर मासूम यतीमों पर फ़ूटे मुंह से एक लाइन न कह के दी।

कुमांऊनी होली: छालड़ी के रंग

छालड़ि का एक प्रमुख हिस्सा होता है अशीष (आशीर्वाद) देने का. हर घर में होली गाने के बाद होली का मुखिया अपने साथियों के साथ घर के मुखिया और उसके पूरे परिवार को लाख बरस जीने का आशीर्वाद देता है. यह आशीर्वाद पहले एक गाने के रूप में सभी देवताओं को दिया जाता है.

परुली:ब्या टालने की उहापोह

जोस्ज्यू तुम्हारी तो मति मारी गयी है.इतना अच्छा घर कहाँ मिलेगा परुली को. चिंन्ह भी कैसा बढिय़ा साम्य हुआ ठहरा. शादी ब्या तो अंजल (संजोग) की बात होने वाली हुई. पहले तो डॉक्टर बनना ही कितना मुश्किल हुआ फिर परुली को डॉक्टर बना भी लिया तो कौन सा उसको जनम भर अपने घर में रख लोगे. ब्या तो तब भी करना ही पड़ेगा ना.

आइडियल यतीम का हुलिया

छोटे क़द और बीच की उम्र के हों। इतने बड़े और ढ़ीठ न हों कि थप्पड़ मारो तो घंटे भर तक हाथ झनझनाता रहे और उन हरामियों का बाल भी बांका न हो। जाड़े में जियादा जाड़ा न लगता हो। यह नहीं कि जरा-सी सर्दी बढ़ जाये तो सारे क़स्बे में कांपते, कंपकंपाते, किटकिटाते फिर रहे हैं

ब्लॉगवाणी का मर्जर, ब्लॉगरों के मजे

कल शाम को ऑफिस से निकलने ही वाला था कि मेरी पोस्ट पर कमेंट आया.
गूगल इंडिया के बंगलोर ऑफिस से जारी की गयी न्यूज़ के अनुसार ब्लागवाणी अब गूगल.ब्लागवाणी .कॉम हो गयी हैं ।

पहले तो कुछ समझ में नहीं आया कि यह क्या है.लेकिन फिर केवल सच का पीछा करते हुए यहां पहुंचे तो [...]

ज़लील करने के कायदे

यह इज्जत किसे नसीब होती है कि अकारण जलील होने के फ़ौरन बाद दूसरों को अकारण जलील करके हिसाब बराबर कर दे। उनके घायल स्वाभिमान के सारे घाव पल भर में भर गये।