अलाहदीन अष्टम
उनके रोग न केवल बहुत से थे, बल्कि बहुत बढ़े हुए भी थे। इनमें सबसे खतरनाक रोग बुढ़ापा था। उनका एक दामाद विलायत से सर्जरी में नया-नया एफ़आर. सी.एस. करके आया था। उसने अपनी ससुराल में किसी का एपेंडिक्स बाक़ी नहीं छोड़ा। किसी की आंख में भी तकलीफ़ होती तो उसका एपेंडिक्स [आगे पढ़ें.....]
1. रेबीज के नये इंजेक्शन की कसम, किसी कुत्ते में कहां है वह दम, जो भोंकता भी हो, चाटता भी हो,गरियाता भी हो, काटता भी हो,हम तो ऐसे ही थे, औरऐसे ही रहेंगे सनम.
2.
तेरे बिना जिन्दगी का नूर चला जायेगा,बिन काटे किसी को क्या मजा आयेगा,गाली खाने से नहीं डरते हैं हम,मेरे दोस्तखायी गाली [आगे पढ़ें.....]
केडीके महोदय बालकिशन जी की इस पोस्ट पर अपना कुदरती कवितायी हुनर दिखाना चाहते थे लेकिन सफल नहीं हुए तो हमको बोले कि इस “कवि की कल्पना” को किसी तरह ठेल दो. हमको भला क्या तकलीफ.हम ठेल रहे हैं. गाली.प्रसंशा सब केडीके साहब की.
बालकिशन जी आप किस शोध के चक्कर में पढ़ गये. [आगे पढ़ें.....]
लज्जा और अपमान की सबसे जलील सूरत यह है कि व्यक्ति स्वयं अपनी दृष्टि में भी कुछ न रहे। सो वो इस नर्क से भी गुजरे-उनका बायां बेजान हाथ अलग लटका इस गुजरने की तस्वीर खींचता रहता।
आप बहुत बड़े हो सकते हैं.उच्च पद पर आसीन हो सकते है, बड़े ब्लॉगर हो सकते हैं, बड़े साहित्यकार हो सकते हैं, दार्शनिक भी हो सकते हैं, बड़े और गरिष्ठ वरिष्ठ कवि भी, बड़े कलाकार भी,बड़े व्यवहार कुशल भी,बड़े लेखक भी,बड़े व्यंग्यकार भी.लेकिन इन सबसे से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप परिणाम कैसे दे [आगे पढ़ें.....]
शाही सवारी
उन्हें इस घोड़े से पहली नजर में मुहब्बत हो गयी और मुहब्बत अंधी होती है, चाहे घोड़े से ही क्यों न हो। उन्हें यह तक सुझायी न दिया कि घोड़े की प्रशंसा में उस्तादों के जो शेर वो ऊटपटांग पढ़ते फिरते थे, उनका संबंध तांगे के घोड़े से नहीं था। यह मान [आगे पढ़ें.....]
डार द्रुम पलना,बिछौना नवपल्लन केसुमन झँगूला सौहे तन छवि भारी देंमदन महीपजू को बालक बसंत प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दे.
- कविवर देव
पिछ्ले अंक में हमने होली में शास्त्रीय होली की बात की थी आज उसे ही आगे बढ़ाते हैं. कुछ लोग मानते हैं पर्वतीय क्षेत्र में और विशेषकर कुमाऊं में होली की [आगे पढ़ें.....]
कल एक समाचार पढ़ा कि कानपुर के कलक्टरगंज थाने में रखे विस्फोटकों में विस्फोट हो गया.लिखा था कि यह विस्फोटक पुलिस द्वारा बरामद किये गये थे और थाने में ही रखे थे. एक हिन्दी के समाचार पत्र ने इस पर अपना संपादकीय भी बरबाद किया. इस बरबादी के पीछे तो कारण यह भी हो [आगे पढ़ें.....]
चोर,उचक्के,मर्डरर का मंत्री हो जाना समय का बदलना है. आप लाख सर पीटें यह रुकने वाला नहीं.मंत्री हो जाना ही उसकी नियति है.शादियों में हवाई फायर से मरने का नया चलन है. कुछ दिनों में हमें इसकी आदत हो जायेगी.धमाकों से मरने की आदत धीरे धीरे हो ही रही है ना.
हमारे एक नये नये मित्र बने हैं.नाम है कमलादत्त कांडपाल.नये नये पत्रकार बने हैं. रहने वाले हैं ग्राम कांडा, पट्टी कत्यालू, कफड़खान के. जनेऊ धारी ब्राह्मण है लेकिन खुद को बामण कहलाना ज्यादा पसंद करते हैं.कान में जनेऊ डालने के बाद ही कोई शंका करते हैं चाहे वह लघु हो या दीर्घ. एक ढाई [आगे पढ़ें.....]
आपके सदविचार