Archive for July, 2008

कोई दीवार सी गिरी है अभी

सरकस में करतब दिखाने वाली लड़की तने हुए तार पर चलती है। लेकिन क्या बात है, वो तो अपने आप को खुली छतरी से संतुलित करती रहती है। जरा डगमगा कर गिरने लगती है तो दर्शक पलकों पर झेल लेते हैं।

नराई हरेले की

कका बालकनी में बैठे हुए सामने पार्क में खेलते हुए बच्चों को देख रहे थे.साथ ही पातड़ा (पंचाग) भी देख रहे थे. मैने उनसे पूछा.
"कका.. पंचाग में क्या देख रहे हो..? "
"अरे देख रहा था हरेला कब है. भोल (कल) हरेला है."
"ओ..कल है! कका बताइये कल क्या क्या करना है. "
"अरे यहां [...]