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	<title>Comments on: गब्बर सिंह के ख़त पर दनदनाती टिप्पणीयां</title>
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	<description>Kakesh's KudKud</description>
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		<title>By: neeraj</title>
		<link>http://kakesh.com/2008/blog-mahima/comment-page-1/#comment-1921</link>
		<dc:creator>neeraj</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Feb 2008 05:03:36 +0000</pubDate>
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		<description>जब से हरी सिंह जी की टिपण्णी पोस्ट पर आयी तब से क्या हुआ रामगढ के पास के गब्बर के अड्डे पर सुनिए:
गब्बर &quot; यहाँ से पचास पचास कोस दूर जब कोई बच्चा रोता था तो उसकी माँ कहती थी की बेटा सोजा नहीं तो गब्बर आ जाएगा....और ये हमारा बाप हरी सिंह हमारा नाम पूरा मिटटी में मिला दिए हैं....अरे क्या जरूरत थी उनको टिपियाने की? और सबको बताने की, की उनकी माली हालत ख़राब है...  ई का नाम है हाँ...अलोक पुराणिक का ब्लॉग पढने का जुगाड़ कर लिए वो और नमक का जुगाड़ नहीं कर पाए ..धिक्कार है....  इसकी सज़ा जरूर मिलेगी..बराबर मिलेगी...अरे ओ साम्भा जरा बता तो सज़ा किसको दें? अपने बाप को की उस बनिए को या आलोक पुराणिक को? 
साम्भा: सरकार अभी हम मोबाइल पे एस एम् एस पोल लेके बता देते हैं...आज कल इस धंदे में खूब कमाई है सरकार. जनता बिल्कुल तैयार ही रहती है. होली तक का टाइम देते हैं सरकार...हरी सिंह के लिए एच , बनिए के लिए बी और आलोक पुराणिक के लिए ऐ टाइप करें अपना नाम लिखें और ४२०४२०४२०० पर भेज दें. 
(आप क्या पढ़ रहे हैं? उठईये अपना मोबाइल और शुरू हो जाईये ....)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>जब से हरी सिंह जी की टिपण्णी पोस्ट पर आयी तब से क्या हुआ रामगढ के पास के गब्बर के अड्डे पर सुनिए:<br />
गब्बर &#8221; यहाँ से पचास पचास कोस दूर जब कोई बच्चा रोता था तो उसकी माँ कहती थी की बेटा सोजा नहीं तो गब्बर आ जाएगा&#8230;.और ये हमारा बाप हरी सिंह हमारा नाम पूरा मिटटी में मिला दिए हैं&#8230;.अरे क्या जरूरत थी उनको टिपियाने की? और सबको बताने की, की उनकी माली हालत ख़राब है&#8230;  ई का नाम है हाँ&#8230;अलोक पुराणिक का ब्लॉग पढने का जुगाड़ कर लिए वो और नमक का जुगाड़ नहीं कर पाए ..धिक्कार है&#8230;.  इसकी सज़ा जरूर मिलेगी..बराबर मिलेगी&#8230;अरे ओ साम्भा जरा बता तो सज़ा किसको दें? अपने बाप को की उस बनिए को या आलोक पुराणिक को?<br />
साम्भा: सरकार अभी हम मोबाइल पे एस एम् एस पोल लेके बता देते हैं&#8230;आज कल इस धंदे में खूब कमाई है सरकार. जनता बिल्कुल तैयार ही रहती है. होली तक का टाइम देते हैं सरकार&#8230;हरी सिंह के लिए एच , बनिए के लिए बी और आलोक पुराणिक के लिए ऐ टाइप करें अपना नाम लिखें और ४२०४२०४२०० पर भेज दें.<br />
(आप क्या पढ़ रहे हैं? उठईये अपना मोबाइल और शुरू हो जाईये &#8230;.)</p>
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	<item>
		<title>By: Gyan Dutt Pandey</title>
		<link>http://kakesh.com/2008/blog-mahima/comment-page-1/#comment-1910</link>
		<dc:creator>Gyan Dutt Pandey</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 14:34:10 +0000</pubDate>
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		<description>हरी सिंह जी के देश को योगदान पर देश रत्न का सम्मान दिया जाये।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हरी सिंह जी के देश को योगदान पर देश रत्न का सम्मान दिया जाये।</p>
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		<title>By: कुन्नु सिंह</title>
		<link>http://kakesh.com/2008/blog-mahima/comment-page-1/#comment-1909</link>
		<dc:creator>कुन्नु सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 12:01:37 +0000</pubDate>
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		<description>वाह काकेश जी आपने तो कमाल ही कर दिया साईट को ब्लोग बना दिया। आप तो मास्टर माईंड नीकले!!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>वाह काकेश जी आपने तो कमाल ही कर दिया साईट को ब्लोग बना दिया। आप तो मास्टर माईंड नीकले!!!</p>
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		<title>By: कालिया (जो पहले नमक खाता था)</title>
		<link>http://kakesh.com/2008/blog-mahima/comment-page-1/#comment-1908</link>
		<dc:creator>कालिया (जो पहले नमक खाता था)</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 10:45:45 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://kakesh.com/?p=337#comment-1908</guid>
		<description>शिव कुमार जी ( देखिये हम लोग कितने सुधर गए हैं. अब लोगों के नाम के साथ जी लगाने लगे हैं) ने पुराणिक जी की पोस्ट पर मेरी हाजिरी भूल से लगा दी. मैं यह हलफनामा देता हूँ कि मैंने पुराणिक जी की पोस्ट पर कोई कमेंट नहीं किया. इसलिए यहाँ कमेंट लिख रहा हूँ.

सरदार की हालत बिल्कुल वैसी ही हो गई है जैसा उन्होंने वित्त मंत्री को लिखी गई चिट्ठी में दिया है. हमलोग उनसे सचमुच में बहुत तंग हैं. एक दिन जब हमलोग आटा, चावल, दाल वगैरह नहीं ले आए तो उन्होंने हम तीनों को लाइन में खड़ा कर दिया. फिर मुझसे अपना वही वर्ल्ड फेमस डायलाग बोले कि तेरा क्या होगा कालिया. मैंने कहा सरदार मैंने आपका शेयर खाया था. जानते हैं क्या कहा उन्होंने? बोले शेयर खाया था अब गोली खा. अब दो ही चीज सस्ती बची है. शेयर और गोली. तुम शेयर पहले ही खा चुके हो इसलिए अब गोली खा.

हमसब धन्यवाद देते हैं उन साहित्यकार को जिन्होंने हमारी तकलीफ न केवल जनता के सामने रखी अपितु जनता के दिल में हमारे लिए हमदर्दी जगाई. उड़ती ख़बर सुनी है कि हम डाकुओं के लिए अब स्पेशल &#039;डाकू कार्ड&#039; बनाने पर वित्त मंत्री राजी हो गए हैं. इन कार्ड के जरिये हमें अब सस्ता चावल, गेंहू, दाल, आलू, प्याज वगैरह मिल जायेगा. 

यहाँ केवल एक ही लोचा है, हम लोग चाहते हैं कि हमें गोली, बंदूक, ए के ४७ वगैरह भी इसी कार्ड के जरिये सस्ते में मिले. अभी तो सरकार हमारी बातें मानने से इनकार कर रही है लेकिन हमें आशा है कि एक-दो मीटिंग के बाद मान जायेगी. हमने सरकार को भरोसा दिला दिया है कि अगले चुनाव तक डाकुओं की आवादी में करीब चालीस प्रतिशत की बढोतरी की उम्मीद है. नेता लोग इस बात से खुश हैं कि उन्हें एक नया वोट बैंक मिलेगा. और नए नेता भी.

पुनश्च:

हरी चचा प्रणाम.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शिव कुमार जी ( देखिये हम लोग कितने सुधर गए हैं. अब लोगों के नाम के साथ जी लगाने लगे हैं) ने पुराणिक जी की पोस्ट पर मेरी हाजिरी भूल से लगा दी. मैं यह हलफनामा देता हूँ कि मैंने पुराणिक जी की पोस्ट पर कोई कमेंट नहीं किया. इसलिए यहाँ कमेंट लिख रहा हूँ.</p>
<p>सरदार की हालत बिल्कुल वैसी ही हो गई है जैसा उन्होंने वित्त मंत्री को लिखी गई चिट्ठी में दिया है. हमलोग उनसे सचमुच में बहुत तंग हैं. एक दिन जब हमलोग आटा, चावल, दाल वगैरह नहीं ले आए तो उन्होंने हम तीनों को लाइन में खड़ा कर दिया. फिर मुझसे अपना वही वर्ल्ड फेमस डायलाग बोले कि तेरा क्या होगा कालिया. मैंने कहा सरदार मैंने आपका शेयर खाया था. जानते हैं क्या कहा उन्होंने? बोले शेयर खाया था अब गोली खा. अब दो ही चीज सस्ती बची है. शेयर और गोली. तुम शेयर पहले ही खा चुके हो इसलिए अब गोली खा.</p>
<p>हमसब धन्यवाद देते हैं उन साहित्यकार को जिन्होंने हमारी तकलीफ न केवल जनता के सामने रखी अपितु जनता के दिल में हमारे लिए हमदर्दी जगाई. उड़ती ख़बर सुनी है कि हम डाकुओं के लिए अब स्पेशल &#8216;डाकू कार्ड&#8217; बनाने पर वित्त मंत्री राजी हो गए हैं. इन कार्ड के जरिये हमें अब सस्ता चावल, गेंहू, दाल, आलू, प्याज वगैरह मिल जायेगा. </p>
<p>यहाँ केवल एक ही लोचा है, हम लोग चाहते हैं कि हमें गोली, बंदूक, ए के ४७ वगैरह भी इसी कार्ड के जरिये सस्ते में मिले. अभी तो सरकार हमारी बातें मानने से इनकार कर रही है लेकिन हमें आशा है कि एक-दो मीटिंग के बाद मान जायेगी. हमने सरकार को भरोसा दिला दिया है कि अगले चुनाव तक डाकुओं की आवादी में करीब चालीस प्रतिशत की बढोतरी की उम्मीद है. नेता लोग इस बात से खुश हैं कि उन्हें एक नया वोट बैंक मिलेगा. और नए नेता भी.</p>
<p>पुनश्च:</p>
<p>हरी चचा प्रणाम.</p>
]]></content:encoded>
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	<item>
		<title>By: हरी सिंह</title>
		<link>http://kakesh.com/2008/blog-mahima/comment-page-1/#comment-1907</link>
		<dc:creator>हरी सिंह</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 08:14:28 +0000</pubDate>
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		<description>काकेश जी,

आपने हाल ही में शंका व्यक्त की थी कि साहित्य क्रांति लाने में सक्षम है या नहीं. मेरा व्यक्तिगत अनुभव कहता है कि निश्चित तौर पर साहित्य क्रांति लाने में सक्षम है. और मेरे जीवन में इस क्रांति के लिए मैं आलोक पुराणिक जी को और उनके साहित्य को धन्यवाद देता हूँ.

देखिये न, मैंने उनकी पोस्ट पर टिपण्णी लिखते हुए अपने पुत्र गब्बर से डाक द्वारा रुपये भेजने के लिए कहा था. आज ही मुझे पन्द्रह हजार का मनीआर्डर मिला है. मेरे जीवन में इस क्रांति के लिए मैं पूरा का पूरा श्रेय आलोक पुराणिक जी को देता हूँ. गाँव के बनिए का उधार चुकाने के बाद अगर कुछ पैसा बच गया तो मैं इंस्टालमेंट पर एक कंप्यूटर लूंगा. मैंने निश्चय किया है कि अब मैं ख़ुद साहित्य का सृजन करूंगा. मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि मैं अपना एक ब्लॉग बनाऊँगा जिसका नाम होगा &#039;लूट-पाट&#039;. 

अलोक पुराणिक जी के ब्लॉग पर मैंने कमेंट किया ही था. आपके ब्लॉग पर इसलिए कर रहा हूँ जिससे आप भी मेरे ब्लॉग &#039;लूट-पाट&#039; पर आयें और कमेंट करें.

हरी सिंह
गब्बर सिंह के वालिद</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>काकेश जी,</p>
<p>आपने हाल ही में शंका व्यक्त की थी कि साहित्य क्रांति लाने में सक्षम है या नहीं. मेरा व्यक्तिगत अनुभव कहता है कि निश्चित तौर पर साहित्य क्रांति लाने में सक्षम है. और मेरे जीवन में इस क्रांति के लिए मैं आलोक पुराणिक जी को और उनके साहित्य को धन्यवाद देता हूँ.</p>
<p>देखिये न, मैंने उनकी पोस्ट पर टिपण्णी लिखते हुए अपने पुत्र गब्बर से डाक द्वारा रुपये भेजने के लिए कहा था. आज ही मुझे पन्द्रह हजार का मनीआर्डर मिला है. मेरे जीवन में इस क्रांति के लिए मैं पूरा का पूरा श्रेय आलोक पुराणिक जी को देता हूँ. गाँव के बनिए का उधार चुकाने के बाद अगर कुछ पैसा बच गया तो मैं इंस्टालमेंट पर एक कंप्यूटर लूंगा. मैंने निश्चय किया है कि अब मैं ख़ुद साहित्य का सृजन करूंगा. मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि मैं अपना एक ब्लॉग बनाऊँगा जिसका नाम होगा &#8216;लूट-पाट&#8217;. </p>
<p>अलोक पुराणिक जी के ब्लॉग पर मैंने कमेंट किया ही था. आपके ब्लॉग पर इसलिए कर रहा हूँ जिससे आप भी मेरे ब्लॉग &#8216;लूट-पाट&#8217; पर आयें और कमेंट करें.</p>
<p>हरी सिंह<br />
गब्बर सिंह के वालिद</p>
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		<title>By: balkishan</title>
		<link>http://kakesh.com/2008/blog-mahima/comment-page-1/#comment-1906</link>
		<dc:creator>balkishan</dc:creator>
		<pubDate>Mon, 25 Feb 2008 07:56:02 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://kakesh.com/?p=337#comment-1906</guid>
		<description>क्या वंहा टिपण्णी न दे पाये हो तो यह दें दें.
पहले ये बताइए इस पोस्ट पर हमारी जो टिपण्णी थी वो कंहा गई. री-पोस्ट करें.  
दुसरे ये बताएं हमरा ये आइडिया आपतक कैसे पंहुचा. हम तो ई पब्लिश ही करने वाले थे की आप ने कर दिया.
दो-डबल नुकसान हो गया.
बहुत नाइंसाफी है ये. इसकी सज़ा मिलेगी. बराबर मिलेगी.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>क्या वंहा टिपण्णी न दे पाये हो तो यह दें दें.<br />
पहले ये बताइए इस पोस्ट पर हमारी जो टिपण्णी थी वो कंहा गई. री-पोस्ट करें.<br />
दुसरे ये बताएं हमरा ये आइडिया आपतक कैसे पंहुचा. हम तो ई पब्लिश ही करने वाले थे की आप ने कर दिया.<br />
दो-डबल नुकसान हो गया.<br />
बहुत नाइंसाफी है ये. इसकी सज़ा मिलेगी. बराबर मिलेगी.</p>
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