Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

25 responses to “पुस्तकें जो खरीदी गयीं….”

  1. प्रमोद सिंह

    डेढ़-दो महीने गुजर जाने दो पहले.. फिर किताबों को ऊपर ताक-टांड़ में रख देना..

  2. जीतू

    पढने की कोशिश करो, यात्राओं मे पढो या फिर किसी से मिलने के इन्तज़ार के बीच पढो।

    अगर ना पढ सको, तो किसी को गिफ़्ट कर देना।
    ( जानकारी के लिए बता दूं मै मार्च 2008 मे एक हफ़्ते के लिए भारत आ रहा हूँ।)

    (काकेश : जीतू जी : य़ह जानकर खुशी हुई कि आप ढेर सारी किताबें बतौर गिफ्ट लेकर आ रहे हैं.)

  3. Gyan Dutt Pandey

    इतनी पुस्तकें पढ़ने पर तो आप दशकों तक ठेल लेंगे ब्लॉग पर!

    (काकेश : ज्ञान जी : हर साल लगभग इतनी ही पुस्तकें खरीदता हूँ)

  4. sujata

    अरे बाप रे!जीतू से सहमत । किताबें खरीदी हैं , पढी नही जाती हैं हम है न !हमे गिफ्ट करें ! वैसे हमने भी बहुत सी खरीद ली है । बुढापे का सहारा । खाली बैठे क्या करेंगे :)

  5. अतुल शर्मा

    क्या मेले में क्षमा कौल का उपन्यास ‘दर्दपुर’ मिल सकेगा?

  6. सागर चन्द नाहर

    इतनी सारे पुस्तकें!!! कब पढ़ पाते हैं आप इन्हें? इतना समय मिल जाता है आपको? भाभीजी चिढ़ती नहीं?…
    बहुत सवाल पूछ लिये है ना..
    एक आखिरी सवाल… इन्हें पढ़ लेने के बाद क्या करते हैं? ;)

  7. Nishant

    App kuchh kitabein is site se kharid sakte hain
    http://www.flipkart.com/
    aapki jyadatar kitbein uplabdh hain.

  8. प्रत्यक्षा

    नहीं मिलने वाली किताबें बुक्स बियांड या लैंडमार्क या कफे टर्टल में मिलेंगी । सब गुड़गाँव में ।
    बाकी किताबें पढ़ें न पढ़ें .. मेरी पढ़ लीजियेगा :-)

  9. Sanjeet Tripathi

    भैया जौन किताब न पढ़ पाओ हमका भेज दियो हां ;)

    बारामासी के बाद चतुर्वेदी जी की मरीचिका भी आ चुकी है वह भी बढ़िया है!!

  10. sanjay tiwari

    अच्छा है. इसी बहाने कुछ और किताबों के बारे में पता चला.

  11. anuradhasrivastav

    बढिया है जी बुढापे का इन्तजाम अभी से…..

  12. dr parveen chopra

    काकेश जी, खूब पढिये और फिर हम सब से यह ज्ञान अपनी पोस्टों के द्वारा बांटिये कि इन में क्या कुछ भरा पड़ा है। और हां, यह किसी की टिप्पणी के साथ ही आप का जवाब देख कर बहुत अच्छा लगा। यह सब कैसे संभव होता है, क्या बतलाने का कष्ट करेंगे।

    (काकेश : प्रवीन जी : वर्डप्रेस टिप्पणीयों को ऎडिट करने की सुविधा देता है)

  13. मैथिली

    क्यों जला रहो हो?

  14. जीतू

    अमां तुम लोग इत्ती इत्ती किताबें खरीदते हो फिर वो बाद मे पड़ी धूल फांकती है (दूसरों को क्या बोले, हमारे यहाँ भी यही हाल है।)

    क्यों ना एक बुक लवर्स क्लब बनाया जाए और लोग अपनी अपनी (पढ चुकी )पुस्तकें दूसरों के पास भेज दें। जिसमे पुस्तक पाने वाला डाक-खर्च वहन करें। इसके लिए तकनीकी रुप से एक वैब साइट का निर्माण भी किया जा सकता है, जहाँ पर लोग अपनी अपनी पुस्तकों के बारे मे बताएं और दूसर बंदा वहाँ पर पुस्तक पसन्द कर ले। लोग आपस मे मिल मिलाकर डाक-खर्च का भुगतान करें, अथवा साइट को ही बिचौलिया बना लें।

    आप लोग तैयार हो तो तकनीकी रुप से मै इस प्रोजेक्ट को रुपरेखा से लेकर अंजाम तक पहुँचा सकता हूँ। लेकिन हाँ फ्री मे नही करूंगा, नो प्रोफ़िट नो लॉस बेसिस पर। अगर तैयार हो तो मेरे को इमेल करना।

  15. masijeevi

    पुस्‍तक मेले में आपका झोला देखते ही समझ गए थे कि आप खूब समेटने के इरादे से पहुँचे हैं। कीमतें नहीं बताईं आपने और ये भी कि आपकी खरीद के फलस्‍वरूप प्रत्‍यक्षा को कितनी रायल्‍टी मिली :)

    यदि मेरा अनुमान सही है तो घर के बाकी लोगों (यानि पत्‍नी) ने भी अपना स्‍टॉक खरीदा ही होगा अगर नहीं तो फिर हम चोखेरवालियों को रिपोर्ट करते हैं कि देखो किताब खरीद में पुरुषवाद..

  16. anitakumar

    काकेश जी अब कौन सी किताब से शुरु करेगें हम से ज्ञान बांटना। सच्ची इत्ती सारी एक साथ देख कर ही मै तो सीधा उन्हें टांड पर डाल देती, बुढ़ापे के लिए, थोड़ा वक्त बाकी है…:)

  17. अनूप शुक्ल

    सही है। किताबों के बारे में लिखना जारी रखें।

  18. Tarun

    Are baap re, Itni kitaabe. Tumne keha har saal itni hi khareedte ho, kitne saalon se ye silsila chal reha hai…..bus yehi jaane ke liye pooch reha hoon kitne kamron ka ghar hai…Arre tumhara nahi in kitaabon ka.

    Bare saalon baad itni saari hindi ki kitaabe aur unke chitra dekhkar accha laga.

  19. swapandarshi

    बहुत अच्छा किया आपने किताबो की लिस्त देकर. इन किताबो के बारे मे अपनी राय भी लिखे, कुछ महीनो बाद अगर हिन्दुस्तान आना हुया तो मुझे बडी सहुलियत होगी खरीदने मे.

  20. Manish

    शुक्रिया इस फेरहिस्त को सार्वजनिक करने के लिए!:) मैंने इनमें कितने पाकिस्तान और Gone With the Wind पढ़नी शुरु की थी पर कभी खत्म नहीं कर पाया।

    Disgrace मैंने पढ़ी पर वो किताब इतनी प्रभावित नहीं कर पाई। क्या आपके यहाँ रूपा एंड कंपनी की स्टॉल लगती है?

  21. उन्मुक्त

    मैंने तो इनमें से केवल एक Gone with the wind पढ़ी है। Edward De Bono की कई पुस्तकें पढ़ी हैं पर यह वाली नहीं पढ़ी है।

  22. Hem Pant

    काकेश जी एक सुझाव देने की इजाजत चाहता हूँ… आप “दावानल” से शुरुआत करें. मैने यह पुस्तक पढी है, आशा है मेरी तरह आपको भी यह पसंद आयेगी.

  23. Manish

    बहुत सही – १ से १० के बीच दिल्ली में दौड़ भाग के दौरान हमनें भी काफी खरीदीं – ज़्यादातर कविताएँ – प्रत्यक्षा जी / विनोद जी (angare.blogspot.com) की कहानियाँ छोड़ कर दस को घर वापस लौटे तो अभी पढ़नी चालू हैं – इधर कहानी अच्छी लिखीं – मनीष [ जोश्ज्यु [:-) ]

  24. डॉ.सुभाष भदौरिया

    काकेशजी आप इतनी सारी किताबें खरीद कर पढ़ते है.बधाई
    हाल में ही मैने कितने पाकिस्तान कमलेश्वरजी की पढी.बेहतरीन रचना है,
    ज्ञान चतुर्वदी की बारहमासी पढ़ी उन पर एम.ए.में शोध प्रबंध का कार्य कराया था.
    आप उनका उपन्यास नरक यात्रा न पढा हो ततो ज़रूर पढ़े.तस्लीमा जी नष्टब्भ्रष्ट लड़की मिले तो पढ़े.मेरे पास अच्छी किताबे घर पर एक भी नहीं कोई मंटो ले गया कोई दुष्यन्त अभी कुछ रोज़ पहले उर्दू मे परवीन साकिर और शहरयार को खास कर ग़ज़लें आप इन लोगों को हिन्दी में मिलें तो जरूर पढे.
    एक किताब अभी हिन्दी में खुसवंतसिंहजी की ये औरते पढ़ी कमाल किया है साहब ने.
    शंकर पुणतांबेकरजी एक मंत्री स्वर्गलोक में आप जरूर देखें इसमें फंटासी का जबरदस्त प्रयोग है.
    अभी चलने फिरने लायक नहीं घर में गुजराती के चंद्रकान्त बक्षी को पढ़ा.
    आप के ने जो लिस्ट बनायी है बेहतरीन है.आपकी संज़ीदगी की यही वज़ह है.

  25. Satish Yadav

    काकेश जी, ईतनी सारी किताबें लेकर कोई लाईबरेरी तो नहीं न खोल रहे हैं ः)

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