Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

13 responses to “बुद्धिजीवियों के देश में…..”

  1. हर्षवर्धन

    ‘नेता बुद्धिजीवी नहीं हो सकते पर बुद्धिजीवी तो नेता हो सकते हैं’
    गलत है काकेश बाबू अब तो सारे बुद्धिजीवी नेता हो गए हैं। औ नेतागीरी कर लेते हैं तभी बुद्धिजीवी कहलाते हैं, उसके बिना बुद्धिजीवी मानेगा कौन। औ बुद्धिजीवी नेता एक बार सत्ता में आया तो, बुद्धि दूसरों के लिए लगाना बंद कर देता है। बस अपने कल्याण में लगाता है।
    काकेश आपने लिखा बहुत अच्छा है।

  2. Gyan Dutt Pandey

    बुद्धिजीवी माने हाईली इम्प्रेसिव और थॉरोली यूजलेस!

  3. नितिन

    भारत एक “agriculture” प्रधान देश है और हम (सारे बुद्धिजीवी) ऐग्री करने के कल्चर में विश्वास करते है। वैसे नेतागिरी का बुद्धि से कोई लेना देना नहीं है।

  4. sujata

    कालांतर में इस छवि में परिवर्तन हुआ. अब आप क्लीन शेव भी हो सकते हैं, झोला विहीन भी भ्रमण कर सकते हैं,सिगरेट छोड़ भी सकते हैं लेकिन दूसरो के कामों में बुद्धि लगाना नहीं छोड़ सकते. वही आपका असली धंधा है.
    ***
    बहुत मज़ेदार ! सही पकडा है ।

  5. अरूण अरोरा

    मै अरूण अरोरा यहा एतद द्वारा घोषित करता हू कि हमारा भी बुद्धी से कोई लेना देना नही है.हमने कही भी कही भी आज तक बुद्धि का कोई प्रयोग नही किया है (अगर जरा भी किया होता तो यहा ब्लोगिंग मे ब्लोगरो के साथ समय ना खराब कर मुद्रा कमा रहे होते ..कम से कम एड्सेंस से ही सही..)इसलिये किसी भी कोने से हम बुद्धी जीवी नही है..

  6. अतुल शर्मा

    मुझे यकीन है आपने ये सब लिखने में कोई बुद्धि नहीं लगाई है फिर भी एक बात पूछना है।
    एक चीज़ होती है विमर्श, क्या इसमें भी बुद्धि की ज़रूरत होती है?

  7. Anonymous

    भाई साहब के कहने का मतलब है कि लिखने से पहले इनसे विमर्श क्यों नहीं किया आपने.

  8. अतुल शर्मा

    Anonymous भैया मुझ बुद्धिहीन की टिप्पणी में क्यों बुद्धि लगा रहे हैं?
    रही बात काकेश महोदय की हमसे विमर्श लेने की, तो समझ लें हमारी पहले से ही आपसी सेटिंग है :-)

  9. Anonymous

    विमर्श न लेने की?

  10. Anonymous

    अगर ऐसा है तो फिर काहे की शिकायत?

  11. अतुल शर्मा

    अरे Anonymous भैया/दीदी, इस अल्पबुद्धि को कोई शिकायत नहीं है जी :-)
    आप व्यर्थ ही दूसरों के काम में बुद्धि लगा रहे हैं। मैंने काकेशजी को जो कहा वो केवल उनके लिए ही है और वे समझ गए हैं। आप क्यों में परेशान हो रहे हैं?
    वैसे भी हम अरुणजी अरोरा के पदचिह्नों पर ही चल रहे हैं।

  12. kirtish

    बढ़िया है काकेश जी,
    आप बुद्धि और बुद्धिजीवी पर चर्चा कर रहे हैं तो में आपको एक बात बताना चाहूँगा (संभवतः इस पर अपने ब्लॉग में भी एक दो दिन में कुछ डालूँगा) कि मेरी बुद्धि पर एक बुद्धिजीवी ने अपना पुरा संपादकीय ही ठोक दिया है. में बात कर रहा हूँ अहा!! ज़िंदगी !! पत्रिका की. संपादक यशवंत व्यास ने मेरे कार्टून की सोच पर सम्पादकीय लिखा है. आप पढ़ें.

  13. Tarun

    kasam udan jhalle ki miyan is puri post me tumne itni jegah buddhi likh daala hai ki mujhe to buddhijivi hi lag rahe ho…..ab bhala aap kuch bhi kehte raho.

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