Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

10 responses to “चयनम् : क्या साहित्य विफल है ?”

  1. अनिल रघुराज

    यकीनन, अच्छा लेख है। पढ़वाने के लिए शुक्रिया।

  2. alok puranik

    भईया क्रांति से कम ना मानोगे क्या. साहित्य को बहुत कुछ करना है। क्रांति भी करने दो, और भी बहुत कछ करने दो। जिसका जो मन आये, वो करने दो।

  3. प्रमोद सिंह

    इसके पहले कि मेरे मुंह से कोई ग़लत बात निकल जाये, मैं असल काम की बात कह लूं! असल काम की बात यह कि हां, साहित्‍य विफल है!

  4. संजय बेंगाणी

    प्रमोदजी ने कह दिया तो कह दिया.

    साहित्य विफल है. अब काहे की मगज मारी, झिकझिक…

  5. दिनेशराय द्विवेदी

    साहित्य में हमें टिप्पणी विधा सर्वोत्तम लगती है।

  6. Gyan Dutt Pandey

    क्या लेना देना। अपन तो लेखक/आलोचक/पाठक हैं नहीं साहित्य के।

  7. अतुल कुमार 'अनजान'

    “लगभग सत्तर वर्ष पहले जब टी.एस. एलियट ने कहा कि उपन्यास मर चुका है, और बाद में जब एडमंड विल्सन ने घोषणा की कि एक ‘मरती हुई विधा’ है, तो उनका आशय यही था कि दूसरे रूप और पद्धतियाँ उनका स्थान ले लेंगी”

    इनका आशय कहीं ब्लॉग से तो नहीं था?…..:-)

  8. प्रियंकर

    साहित्य सोए हुए को जगाता है . जागे हुए को नहीं . सो यह सफल-विफल का मुद्दा क्यों ?

    साहित्य दुनिया के अंधेरे में जुगनू ही सही,नियोन और सोडियम लैम्पों के ज़माने में लालटेन ही सही, पर वह प्रकाश का सपना तो ज़िंदा रखता है .

    और क्रांति क्या फ़्रांस और रूस की क्रांति ही है . भारत के किसी पिछड़े गांव के अभावग्रस्त परिवार की एक बच्ची जब गांव की पगडंडी पर पहली बार साइकिल चलाते हुए नए अर्जित आत्मविश्वास के साथ निकलती है तो मेरे लिए तो वह भी किसी क्रांति से कम नहीं है . क्रांति ऐसे भी घटित हो सकती है चुपचाप .

    आले साहब का आलेख बहुत अच्छा लगा .

  9. Shiv Kumar Mishra

    सवाल पूछने की बात है तो पूछ सकते हैं लेकिन साहित्य का काम क्रांति लाना नहीं है. कोई क्रांति लाने के लिए साहित्य का सृजन करे, यह जरूरी नहीं. लेकिन ये बात भी ठीक है कि क्रांति क्या केवल उसे कहेंगे जो सोवियत रूस या फ्रांस में हुई है? शायद इतिहास के ‘डॉक्टरों’ के लिए उसी स्तर की क्रांति को क्रांति माना जाता है.

    लेकिन क्रांति तो हर स्तर पर हो सकती है. उसके द्वारा भी जिसने शायद साहित्य नहीं पढ़ा, या फिर उसे साहित्य की समझ नहीं है. बढ़िया प्रस्तुति.

  10. अशोक पांडे

    अंग्रेज़ी भाषा का एक शब्द है: Floccinaucinihilipilification. बाइ द वे यह अंग्रेज़ी का सबसे लम्बा शब्द भी माना जाता है. इस का अर्थ होता है: “किसी भी चीज़ को आदतन बुरा-भला कहते हुए खा़रिज कर देना”.

    रहा सवाल सफल-विफल का, तो उस पर कुछ कहे जाने की ज़रूरत नहीं है. जिन्हें लगता है साहित्य विफल है वे सारे कबीर-तुलसी-ग़ालिब-निराला वगैरा को खड्ड में गाड़ आएं. जिन्हें ऐसा नहीं लगता उन्हें सब कुछ मनमाफ़िक सहेजने की छूट तो दो यार.

    और ब्रह्मवाक्यों से बचो प्यारे!

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