Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

6 responses to “डब्बेवाले”

  1. अतुल शर्मा

    डब्बेवालों की कहानी मुझे शुरु से ही बड़ी अद्भुत लगती रही है। आज भी इनकी कार्यप्रणाली मेंरे लिए आश्चर्य और कौतुहल की चीज़ है।

  2. anuradhasrivastav

    योजनाबद्ध तरीके से काम करके अपनी पहचान बनाने वाले ये मेहनतकश सभी के लिये प्रेरणास्त्रोत हैं।

  3. mamta

    मुम्बई की कल्पना बिना डिब्बेवाले के कभी नही की जा सकती है।

  4. Shiv Kumar Mishra

    बढ़िया किताब से परिचय कराने के लिए धन्यवाद. मुम्बई के डब्बेवालों की कहानी सचमुच में गजब है.

  5. समीर लाल

    जी, जब मैने सिक्स सिग्मा किया तब इसे देखा था. हावर्ड में भी इस पर बहुत शोध हुआ. अद्भुत है,. यह तो एक मिसाल सा बन गया है. आपने जिक्र किया..आभार.

  6. अनूप शुक्ल

    बहुत अच्छा। six sigma के बारे में थोड़ी जानकारी भी दे दें। 16 मिलियन लेन-देन में मूल दर 1% है. में भूल दर होना चाहिये शायद मूल दर की जगह।

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