Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

13 responses to “फ़ेल होने के फायदे”

  1. समीर लाल

    मजा आया इस कड़ी में भी: फ़ेल होने पर बक़ौल मिर्ज़ा सिर्फ एक दिन आदमी की बेइज्जती खराब होती है इसके बाद चैन ही चैन। (ये तो एकदम नया फंडा समझ आया) :) -जारी रखें.,

  2. Tarun

    kya baat hai ye pehle para hota to phel hone me itna dar nahi hota

  3. samredra sharma

    मजा आ गया,काश पहले पता होता तो बात ही कुछ होती

  4. sujata

    आदमी की बेइज्जती खराब होती है

    *****

    vaah vaah !!
    मिर्ज़ा ने सही फरमाया । मान गये ।

  5. अरूण अरोरा

    फ़िर तो हम अपने सारे दुशमनो को आज से यही बद्दुआ देगे की वो कभी फ़ेल ना हो..:)

  6. kirtish

    मज़ेदार है :)

  7. anuradhasrivastav

    अगली कडी का इन्तजार है……..

  8. सृजन शिल्पी

    यह कड़ी कुछ विशेष रोचक लगी। यूसुफी साहब के लेखन में दिलचस्प उपमानों की जो नायाब रेंज मिलती है, वह उनके लेखन में रोचकता को हर पल बनाये रखती है और पाठक बंधा रहता है।

  9. Sanjeet Tripathi

    रोचक है, अमां कुछ साल पहले पढ़ने मिलती तो बेहतर आत्मसात होती ;)
    इंतजार रहेगा।

  10. Balkishan

    बहुत गजब. आपकी इस प्रस्तुति का इंतजार रहता ही है. क्या खूब कही मिर्जा ने…

    वैसे आपसे प्रार्थना है कि आप मेरी पोस्ट पर कमेंट जरूर करिये नहीं तो मेरी पोस्ट फेल हो जायगी. आख़िर एक दिन की बेइज्जती भी ख़राब हुई तो भी ससुरा एक दिन का कष्ट तो रहेगा ही………:-)

  11. Gyan Dutt Pandey

    एक कथन है – न पढ़ते तो सौ तरीके थे कमाने के। पढ़ लिये तो नकारा हो गये हर काम से।

  12. ghughutibasuti

    बढ़िया है ।
    घुघूती बासूती

  13. Rajesh Kumar Tyagi

    I am also Hindi Story Writer If you want plz mail me thaks

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