Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

6 responses to “नेकचलनी का साइनबोर्ड”

  1. Shiv Kumar Mishra

    “शेर कितना ही घटिया और कमजोर क्यों न हो उसे स्वयं काटना और रद्द करना उतना ही मुश्किल है जितना अपनी औलाद को बदसूरत कहना या जंबूर से ख़ुद अपना हिलता हुआ दांत उखाड़ना। ग़ालिब तक से ये पराक्रम न हो सका।”

    बाप रे बाप. क्या लिखते हैं साहब. वाह! वाह!

  2. अतुल शर्मा

    “मुंडा हुआ सर, आंखों में सुरमे की लकीर, एड़ी से ऊंचा पाजामा, सर पर मख़मल की काली रामपुरी टोपी, घर, मस्जिद और मुहल्ले में पैर में खड़ाऊं….. इस हुलिये के साथ वो चाहते भी तो नेकचलनी के सिवा और कुछ संभव न था।”
    “यह वही हुलिया था जो इस इलाक़े के निचले मिडिल क्लास ख़ानदानी शरीफ़ घरानों के नौजवानों का हुआ करता था। ख़ानदानी शरीफ़ से अभिप्राय उन लोगों से है जिन्हें शरीफ़ बनने, रहने और कहलाने के लिये व्यक्तिगत कोशिश बिल्कुल नहीं करनी पड़ती थी।”

    ….तो ऐसी होती है शराफत

  3. Sanjeet Tripathi

    “शेर कितना ही घटिया और कमजोर क्यों न हो उसे स्वयं काटना और रद्द करना उतना ही मुश्किल है जितना अपनी औलाद को बदसूरत कहना या जंबूर से ख़ुद अपना हिलता हुआ दांत उखाड़ना। ग़ालिब तक से ये पराक्रम न हो सका”

    इस बात के तो हम कायल हो गए , धांसू लिखा है!!

    रोचक बनती जा रही है यह श्रृंखला भी!!

  4. balkishan

    बहुत खूब. बढ़िया है. भरी दोपहरी मे इतना जानदार और शानदार व्यंग्य. बढ़िया है.

  5. neeraj

    काकेश जी
    आप आए खुदा की कुदरत है…कभी हम अपने ब्लॉग को कभी आप की टिपण्णी को देखते हैं….
    मेरे लिए आप का आना ही महत्वपूर्ण है…टिपियायें या निकल जायें ये आप की श्रद्धा है…मेरा हाल आप से अलग नहीं. आप का ब्लॉग पढ़ना दिनचर्या का हिस्सा है. मेरे द्वारा “खोया पानी” पुस्तक देल्ही से मंगवा कर पढने में आप ही हाथ है. सबसे पहले उसके बारे में आप से ही जाना था. उसके बाद ही सोचा की जो इंसान इस पुस्तक को इतना पसंद करता है वो ख़ुद कैसा होगा…(कहानी याद है न आप को बन्दर और मगरमच्छ की दोस्ती वाली, जिसमें बन्दर मगरमच्छ को जामुन खिलाया करता था…)
    नीरज

  6. मीनाक्षी

    ऐड़ी से ऊँचा पाज़ामा — पढ़कर ठिठक गए आज …और याद आ गया ,,,, मूँछे नदारद ….और लम्बी दाढ़ी वाला चेहरा… आज भी हम रियाद, दम्माम जाते है तो ऐसे मतुए को देखते ही बुरका ठीक करने लगते है और सिर ढके दुपटटे से अपना चेहरा भी ढक लेते हैं..

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