Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

6 responses to “पास हुआ तो क्या हुआ”

  1. ज्ञान दत्त पाण्डेय

    नौकरी के संदर्भ में भी हम गुणसम्पन्नता, तरक़्क़ी की दुआ नहीं मांगते, अपने लिये हमारी अकेली दुआ होती है कि सम्मान के साथ विदा लें।
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    सही बात। रेलवे में कोई कर्मचारी रिटायर होता है तो फेयरवेल स्पीच में मुख्यत: यही कहा जाता है कि इन्होने पूरी नौकरी में कोई चार्जशीट फेस नहीं की या इनकी सर्विस एक्सीडेण्ट फ्री थी!

  2. nitin

    “बेइज्जती के जितने प्रचुर अवसर हमारे यहां हैं दुनिया में कहीं और नहीं। नौकरी पेशा आदमी बेइज्जती को प्रोफ़ेशनल हेजर्ड समझ कर स्वीकार करता है।” बहुत बढिया।

    अगली कडी का इन्तजार रहेगा।

  3. अरूण अरोरा

    का कहे हम तो बहुतै पहलै रिटायर हो चुके है,अब पुराना घिसा पिटा टायर क्या बोलेगा..:)

  4. ghughutibasuti

    बहुत बढ़िया !
    घुघूती बासूती

  5. kirtish

    बन्दे ने १० साल में ५ नौकरियां आजमायी है. बेईज्जतियों का हिसाब नही लगा पा रहा हूँ

  6. Sanjeet Tripathi

    पढ़ रहा हूं

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