Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

7 responses to “मैं और मेरी मधुशाला..”

  1. प्रमेन्‍द्र पताप सिंह

    बहुत खूब,

    बेहतरीन जानकारी भरा आलेख बधाई।

  2. अरूण अरोरा

    ये अच्छी बात नई है..हमे खाली सुनाओगे..? अरे भाई बुलाओ पिलाओ फ़िर सुनाओ..तभी मधुशाला का पूरा सम्मान कर पाओगे..आने के इंतजार मे ..:)

  3. अतुल शर्मा

    बढ़िया है!

  4. अभय तिवारी

    भई वाह

  5. Sanjeet Tripathi

    बहुत खूब!!
    अगर मिले तो मधुशाला के बाद मधुबाला और मधुकलश भी पढ़िए बच्चन साहब की हालांकि मधुशाला वाला टेस्ट आपको नही मिलेगा इनमे लेकिन पढ़िएगा जरुर!!

  6. Rohit Tripathi

    Wah kakesh ji bahut acha likha, aaj keval yahi bhag padh paya hu, agli bar aur bahg padhne ki koshish karuga.

    latest Post :Urgent vacancy for the post of Girl Friend…

  7. Saurabh

    बचपन में ही मैंने भी पहली बार मन्ना डे के आवाज़ में मधुशाला का कैसेट सुना था.. पता नहीं क्यों मगर तभी से अच्छा लगता है..
    अपनी बात बताकर आपने याद ताज़ा कर दी..
    सौरभ

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