सुनो-पंगेबाज 2007-2008 के सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर पुरुस्कार दे रहे हैं. एक ओर जब भारत रत्न के लिये लाइन लगी है वहीँ दूसरी ओर पंगेबाज जी महोदय की  टिप्पणीयों में लोग दावा कर रहे हैं कि उन्हे पुरुस्कार दिया जाय लेकिन शायद वो अपने पुराने पंगेबाज यानि खाकसार को भूल गये.

देखिये जी आजकल सब खेल पहले होने का है कल हमने अपनी भी अपनी एक पहली पोस्ट डाली थी पूरे प्रूफ के साथ.लेकिन आप लोग उसे देखना भूल गये ….तो पहले तो उसे देखिये फिर हम देते हैं पंगेबाज पुरस्कार के लिये अपना नामांकन.वैसे भी जब मेन पंगेबाज दौड़ से बाहर हैं तो हमारे चांसेज तो पक्के हो ही जाते हैं. [ वैसे भी कल हम एक स्पेशल चांदनी बार में सुनो-पंगेबाज से मिल चुके हैं और उन्हे गिफ्ट भी प्रदान कर चुके हैं.अब देखते हैं कौन रोकता है हमें]

क्या आपने किसी नये ब्लोगर को अपनी दूसरी पोस्ट में ही बड़े बडों से पंगा लेते सुना है. नहीं सुना तो आप खाकसार को नहीं जानते.हमने अपनी दूसरी ही पोस्ट में पंगा ले लिया जी. पढिये आचार संहिता का अनाचार जिसको पढ़कर हमारे एक अग्रज और मित्र हमें धूमकेतु नाम से पुकारने लगे और हम निराश होकर कविता करने लगे.

फिर हमने पंगा लिया अपने पत्रकार भाइयों से जब हमने अपना शोध-पत्र पत्रकार यूँ बने ब्लौगर !!  पेश किया. ये लोग जब ज्यादा नहीं चिढ़े तो हमने पंगे को और आगे बढाया. उनसे सीधा पूछ ही लिया कि क्या होगा आपका पत्रकार महोदय ?? 

फिर हमने जूता- सैंडल पुराण – भाग 1 में उस समय के चिट्ठाजगत के दो महारथियों से  पूरा पंगा लिया.. यह अलग बात है जूते खाने से हम भी परेशान रहे और जूता – सैंडल पुराण -भाग 1.5 में हमें बहुत डांट पड़ी. जिसको हमने रिकॉर्ड कर पॉडकास्ट द्वारा लोगों को भी सुनाया…खैर रोते-धोते जूता-सैंडल पुराण का अंतिम भाग किसी प्रकार पूरा किया गया.

फिर बेनामी की एक सूनामी आयी तो हम बोले बेनामी सूनामी से भी ज्यादा भयंकर !!?? है और फिर ज्ञान देने लगे कि आओ ‘अनाम’ के अस्तित्व को स्वीकारें.

इधर हम अपने सामाजिक दायरे को लेकर भी चिंतित थे. क्योंकि हमारे मोहल्ले का माहौल बड़ा विकट हो रहा था तो हम लिखे आईये ‘मोहल्ला’ बदल डालें…जिसे पाठकों ने ना जाने किस किस से जोड़ने की कोशिश की ..हम तो डिस्क्लेमर लगा ही चुके थे जी इसलिये हम सदी की सबसे बरबाद कविता लिख कर फिर पंगा लेने लगे.

उधर हमें सुनो-पंगेबाज की असलियत पता चली और हम गदर्भ गान गाने लगे गधा मिलन को जाना. लेकिन तभी हमारे पड़ोसी बिरयानी और दाल-भात जैसे विषयों पर लड़ने लगे. उनको समझाया गया और एक और गीत धड़-धड़-धड़-धड़, बम बम बम बम….. गाया गया.

फेहरिस्त तो अभी काफी लंबी है पर हमें लगता है इस छोटे से पुरस्कार के लिये इतना काफी है.

आप क्या बोलते हैं जी ??

  7 Responses to “सुनो-पंगेबाज हम ही हैं लाइन में”

  1. पंगेबाज ने स्पष्ट किया है कि गिफ्ट-उफ्ट देने पर अवार्ड मिलेगा। और आप लिन्क – हाइपर लिन्क चमकाये जा रहे हैं! :-)

  2. कुछ दिन तो लगो अभी लाइन में, फिर पंगेबाज बन जाओ तो क्या.
    अभी बहुत से पंगे लेने हैं, थोड़ी सी पोस्ट दिखाओ तो क्या.

    तुम चांदनी बार मे किससे मिले? जब खास मुझे न बुलाओ तो क्या?
    जब मेरा लिंक दिया ही नहीं, बस अपने लिंक लगाओ तो क्या.

    जूते सैंडल की यादों में धड़ धड़ धड़ बम बम गाओ तो क्या
    तुम बेनामी, हम बेनामी, माने ना कोई मनवाओ तो क्या.

    प्राइज का साइज अय वाइज, दे बढ़ई को बनबाओ तो क्या
    तुम लिखते हो, हम पढ़ते हैं, अब ब्लाग रतन पा जाओ तो क्या

  3. बहुत सही दावा है। भिड लो। पंगेबाज से पंगा ज़रूरी है। हमें क्या, सांडों की लडाई में जितनी धूल उड़ेगी, उतना ही आनंद आएगा। :)

  4. आपका नामांकन पक्का है जी पर गिफ़्ट की कीमत पर भी निर्भर करता है ये पुरुस्कार..अगर कल किसी ने हमे बडा गिफ़्ट भेज दिया तो…मतलब हम तब मजबूर होगे जी काहे कि हम बेईमानी तो कतई नही करेगे अपने ब्लोगर मित्रो के साथ…फ़िर भी आप पुरुस्कार के हमदार तो अवश्य ही बनेगे इस्मे कोई संशय नही है जी…सुनोपंगेबाज की डेस्क से उनकी पाचवी सेक्रेटरी..चंदा मालपानी.

  5. सबसे धांसू रचनाकार आलोक पुराणिक
    दूसरे नंबर के धांसू रचनाकार ज्ञानदत्त पांडेय
    तीसरे नंबर के धांसू रचनाकार काकेश
    चौथे से दसवें के लिए आक्शन चल रहा है।
    मिनिमम दस हजार कि बिड ठेल कर नाम लिखाइये। सभी ब्लागरों से निवेदन है कि काकेशजी अब तक इस मद में पचास लाख इकट्ठा कर चुके हैं।
    यह सब बंटना है।
    फौरन भेजिये।

  6. आलोक जी, चौथा स्थान अपन ने कब्जा लिया है, देखते हैं कौन ……हमका हटाता है।

  7. भइया ऐसा है कि आपलोग फैसला कर लीजिये. जिस नम्बर तक लेना चाहें, ले लें. उसके बाद वाला नम्बर मुझे दे दें. बाकी रास्ता मैं निकाल लूंगा. इतनी भीड़-भाड़ में बाहर वाला पहले थोडी सी जगह चाहता है. बाद में अपने हिसाब से जगह बना लेता है.

 Leave a Reply

(required)

(required)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>

   
© 2012 काकेश की कतरनें Suffusion theme by Sayontan Sinha