Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

11 responses to “स्वामी जी का चिंतन”

  1. दिनेशराय द्विवेदी

    एक क्वांटम मेकेनिक्स है दूसरी जनरल मैकेनिक्स। वैज्ञानिक दोनों में समन्वय का प्रयास कर रहे हैं।

  2. अनिल रघुराज

    दिनेश जी, बिलकुल सही बोले हैं। दुन्नौ सही है। स्वामी/गोस्वामी का चिंतवना एकदम सहिअय है नू।

  3. ghughutibasuti

    काकेश जी, हमें तो बहुत पहले से पता था कि गोस्वामी जी काफी कनफ्युजिए गए थे । तभी तो हमारी धुनाई की सलाह देकर चलते बने । अब हम उनका क्या बिगार सकते हैं सिवाय अपना सिर धुनने के !
    घुघूती बासूती

  4. ghughutibasuti

    काकेश जी, हमें तो बहुत पहले से पता था कि गोस्वामी जी काफी कनफ्युजिए गए थे । तभी तो हमारी धुनाई की सलाह देकर चलते बने । अब हम उनका क्या बिगाड़* सकते हैं सिवाय अपना सिर धुनने के !
    घुघूती बासूती

  5. alok puranik

    सवाल तो जोरदार है। जवाब तलाशने पड़ेंगे।

  6. Shiv Kumar Mishra

    अभी हम आए थे सवाल देखने के लिए. अलोक पुराणिक जी ने भी जवाब तलाशने के लिए मोहलत मांगी है, सो हम भी मांग रहे हैं. समय दीजिये, जवाब लेकर आते हैं……………:-)

    वैसे स्वामी जी के बारे में आपने जो कुछ लिखा, ठीक है. लेकिन ‘गो-स्वामी’ को कहीं आप ‘गो का स्वामी’ साबित करने पर तो नहीं तुले हैं?……..:-)

  7. अतुल शर्मा

    जैसे गोस्वमीजी कनफुजिया गए थे वैसे ही बुद्ध, महावीर, कबीर, नानक, मीराबाई, सहजोबाई, दादूदयाल, रैदास, राबिया, रसखान, रहीम, रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद (सूची बहुत लंबी हो सकती है) भी बहुत कनफुजियाए हुए थे। इन लोगों ने अपना कनफ़्यूज़न तो दूर कर लिया था पर हमसे साफ साफ कुछ कह नहीं पाए और लोग इनके नाम पर लाठियाँ भाँजने और सिन धुनने लगे। वैसे ये कहकर भी क्या जाते, गूँगे ने गुड़ खाया तो स्वाद कैसे बताएगा।

  8. अतुल शर्मा

    वैसे दिनेशरायजी ने पते की बात कह दी है।

  9. Gyan Dutt Pandey

    गोस्वामी जी के कथन में विरोधाभास नजर आता है, पर विरोध है नहीं। कर्म फल, कर्म पर आर्धारित है, पर कर्म-फल केवल कॉज-इफेक्ट रिलेशनशिप नहीं है। उसका नियंता वह है जिसका नाम तुलसी पहली चौपाई में ले रहे हैं।
    हिन्दुओं में यह बड़ी खराब बात है – कहेंगे कि इत्ता बढ़िया काम कर रहे हैं पर सारा चीटिंग भगवान उनके साथ ही करते हैं। :-)

  10. Gyan Dutt Pandey

    And this one from Raman Maharshi:
    Karma (कर्म) it self can not give Phalam (फलम). It is Jadam (जड़म). It is God who dispenses Karma Phalam.

  11. ई-स्वामी

    बहुत बहुत धन्यवाद!
    मुझे इस विषय पर आपके चिंतन की भी प्रतिक्षा रहेगी! :)

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