Article written by काकेश

मैं एक परिन्दा….उड़ना चाहता हूँ….नापना चाहता हूँ आकाश…

15 responses to “महबूबा ..महबूबा ..”

  1. Shiv Kumar Mishra

    वाह! वाह!महबूबा महबूबा. गुलशन में माइक चलते हैं, जब विधानसभा में मिलते हैं…
    आये और खूब आये. महबूबा के साथ आये….:-)

  2. sbai

    लगे रहिए, पढने वाले भी पीछे पीछे आएंगे।

    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

  3. ज्ञानदत्त पाण्डेय

    मैं सोचता था फिल्म के बारे में जानकारी संवर्धन होगा। आजकल सुना है कोई स्वयंवर चल रहा है आर्यावर्त में। उसपर भी टार्च डालें मित्रवर!

  4. anitakumar

    बहुत खूब …।:) ये ज्ञान जी अभी भी स्वयबर में दिलचस्पी ले रहे हैं? क्या बात है?

  5. रंजना

    बहुत बहुत लाजवाब कटाक्ष…

    बहुत सही नस पकडी आपने….घर में बेलन खाना और बात है,पर सार्वजानिक स्थल पर….और वो भी जहाँ कैमरे लगे हों…..यादव भाइयों का बुरा मानना और अड़ना स्वाभाविक है भाई….

    ज्ञान भैया की मांग के साथ हम भी हैं…ध्यान रखियेगा…

  6. sharad kokas

    आपके ब्लॉग पर कतरने तो पढ़ ही रहा हूँ लेकिन फिलहाल शब्दों का सफर पर आपके योगदान को रेखांकित करते हुए लेख मे आपका नाम पढकर यहाँ पहुंचा हूँ । आपको बधाई एवं शुभकामनायें -शरद कोकास ,दुर्ग, छ.ग..

  7. अतुल शर्मा

    महिलाएँ किसी बात में कम हैं क्या?
    स्माइली लगाना ठीक रहेगा क्या? ये वाला :-)

  8. Lovely

    kahan hain kakesh ji ?

  9. Asha Joglekar

    Bahut hee dinon ke bad idhar aana hua aur aapke Mehbooba se mulakat ho gaee. Shukr hai mike Widhan sabha men he feken gaye Marne wale aur khane wale dono kee chamdee motee hai.

  10. ghughutibasuti

    अरे, कब चुपके से यह पोस्ट कर गए? कहाँ हैं?
    घुघूती बासूती

  11. hempandey

    इतने दिनों बाद आपकी कलम चलती देख सुख मिला,किन्तु लेखन अभी नियमित नहीं है. इसलिए ‘परुली’ जैसी रचना के लिए न जाने कितनी प्रतीक्षा करनी पड़े.

  12. अफ़लातून

    @ ज़ाकिर भाई, आपने चिट्ठेकारी शुरु की उसके पहले से काकेश का एक पाठक-वर्ग बन चुका था।
    हिन्दी चिट्ठों की पठनीयता बचाये रखने में काकेश का फिर लिखना शुरु करना एक जरूरी कदम माना जाएगा।
    सप्रेम शुभ कामना

  13. Sanjay

    बहुत बढ़िया लगा जी, और शिव कुमार मिश्र जी की टीप ने चार चांद लगा दिये।
    सर जी, बहुत समय बाद आये हैं आप, ’खोया पानी’ जैसा कोई प्रोजैक्ट और नहीं परवान चढ़ रहा क्या?

  14. shefali

    isee vishay par maine bhi vyangy likha tha, lekin poora nahi kar paee….aaj aapke blog par aana hua to laga achchha hee hua varna itna badhiya vynag nahi padh patee….

  15. manju

    मैं तो कन्फ्यूज हू लेखक अपने घर की बात बता रहे हैं या जम्बू कश्मीर विधान सभा की, और महबूबा की बात कह रहे हैं या महबूब की, जरा स्पष्ट कीजिये

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