Archive for the 'पुस्तक समीक्षा' Category

डब्बेवाले

पिछ्ले दिनों एक सेमिनार में गया था और एअरर्पोर्ट पर एक किताब दिखायी थी “डब्बेवाले”. डब्बेवालों के बारे में काफी कुछ सुना था. सुना था कि आई-आई-एम वाले लोग उन पर अध्ययन कर चुके हैं. एक बार बंगलौर में मुझे भी एक सेमिनार में इस संस्था के लोगों द्वारा ही तैयार किया प्रजेंटेसन देखने को [...]

चयनम् : क्या साहित्य विफल है ?

साहित्य क्रांति नहीं करता; वह मनुष्यों के दिमाग़ बदलता और उन्हें क्रांति की ज़रूरत के प्रति जागरूक बनाता है.

पुस्तकें जो खरीदी गयीं….

किताबों का अनोखा

गाली,गिनती और गंदा लतीफा तो अपनी मादरीजबान में ही मजा देता है

[ री-कैप : "खोया पानी" यह है उस व्यंग्य उपन्यास का नाम जो पाकिस्तान के मशहूर व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद यूसुफी की किताब आबे-गुम का हिन्दी अनुवाद है. इस पुस्तक के अनुवाद कर्ता है 'लफ़्ज' पत्रिका के संपादक श्री 'तुफैल चतुर्वेदी' जी. पुस्तक क्या है हास्य का पटाख़ा है और इतना महीन व्य़ंग्य की आपके समझ [...]

अद्भुत व्यंग्य उपन्यास:’खोया पानी’ -1

पिछ्ले दिनों मैने आपको एक विमोचन समारोह पर आधारित कार्यक्रम के बारे में बताया था.खैर वो तो व्यंग्य था आज उस दिन खरीदी गई पुस्तक की समीक्षा करते हैं.
“खोया पानी” यह है उस व्यंग्य उपन्यास का नाम जो पाकिस्तान के मशहूर व्यंग्यकार मुश्ताक अहमद यूसुफी की किताब आबे-गुम का हिन्दी अनुवाद है. इस पुस्तक के [...]