Archive for the 'मधुशाला' Category

उमर की रुबाइयों के अनुवाद भारतीय भाषाओं में

5. कुछ प्रमुख अनुवादों की चर्चा
पिछ्ले अंक में हमने रुबाइयों के कुछ हिन्दी अनुवादों की चर्चा की. आज कुछ और अनुवादों की चर्चा करते हैं. हिन्दी के अलावा विश्व की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में उमर की रुबाइयों के अनुवाद हो चुके हैं. जिनमें जर्मन, रशियन, अफ्रिकन, इटेलियन, डच, थाइ, अल्बेनियन भाषा शामिल हैं. अनेक [...]

मधुशाला में विराम..टिप्पणी चर्चा के लिये

मधुशाला के निर्धारित क्रम को तोड़ते हुए आइये एक चर्चा करे पिछ्ले लेखों में हुई टिप्पणीयों पर.कुछ बहुत ही अच्छी टिप्पणीयां आयी जिंन्होने सोचने पर भी बाध्य किया और आगे लिखने के लिये प्रेरित भी. सबसे पहले राकेश जी का धन्यवाद जिन्होने डिजिटल लाइब्रेरी का पता बताया और मैं मैथिलीशरण गुप्त जी की पुस्तक को [...]

उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवाद..

पिछ्ले लेख में आपने उमर खैयाम और उनकी प्रसिद्ध रुबाईयों के बारे में जाना.अब आगे पढिये.
3. रुबाइयों के अंग्रेजी अनुवाद: उमर खैय्याम की रुबाइयों के कई अंग्रेजी अनुवाद हुए.लेकिन इन सभी अनुवादों में जो सर्वप्रमुख और सर्वप्रसिद्ध अनुवाद है वो है जॉन फिट्जराल्ड का. जॉन का पहला अनुवाद सन 1859 में आया उसके बाद [...]

खैयाम की मधुशाला..

मधुशाला शब्द सुनते ही मस्तिष्क में एक ही नाम उभरता है और वो नाम है श्री हरिवंश राय बच्चन का. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चन की मधुशाला मूलत: पारसी भाषा की रचना से प्रेरित है और मूल रचना का रचनाकाल बच्चन की मधुशाला से आठ सौ वर्ष पहले का है. जी हाँ! बच्चन [...]