Archive for the 'चिट्ठाकारी' Category

ये बहन जी कौन हैं?

मेरी टिप्पणी वाली पोस्ट पर विस्तृत टिप्पणीयाँ थमने का नाम ही नहीं ले रही. कल जब सोच रहा था कि शायद अब यह सिलसिला थम गया होगा तो आज सुबह देखा एक और बड़ी टिप्पणी आयी. यह टिप्पणी क्या ..यह तो किसी पोस्ट से भी बड़ी है. यह भी छ्द्म नाम से की गयी है [...]

मुँह ना खुलवाइये-वरना जितना आरोप एक स्त्री लगा सकती है उससे कहीं ज्यादा एक पुरुष

मेरी पोस्ट स्त्रियां क्या खुद से सवाल पूछती हैं?, जिसमे‌ पूरी पोस्ट मात्र टिप्पणीयों से ही बनी थी,उस पर् टिप्पणीयों के नये रिकॉर्ड बन रहे हैं.उसमे‌ कोइ आदम जी तो जैसे स्त्रियो‌ के पीछे ही पड गये हैं.आप भी देखें.

मेरी माँ बहन बेटी सभी स्त्रियाँ है लेकिन मैं जब बेटी का रिश्ता करने जाऊगा तो [...]

असहमति के बहाने

आज सुबह जब पोस्ट लिखी (सुबह सुबह चार बजे उठ कर) तो यह अन्दाजा नहीं था कि यह एक बहस का रूप ले लेगी.हाँलाकि मंशा तो थी ही कि एक बहस हो. लेकिन आशा के विपरीत लोग आये और उन्होने बिना किसी पूर्वाग्रह के अपने विचार लिखे. कुछ लोगों ने जहाँ मेरी सोच से सहमति [...]

बिन अंग्रेजी सब सून

पिछली पोस्ट से शायद यह लगा कि मैं कोई हिन्दी-अंग्रेजी विवाद उत्पन्न करना चाहता हूँ जो कि बकौल ज्ञान जी हिन्दी वालों का प्रिय शगल रहा है. लेकिन मेरा लक्ष्य यह नहीं था.मैं तो अपने अनुभव आपसे बांटना चाहता था.मैं अग्रेजी का विरोध नहीं करता बल्कि मैं तो अंग्रेजी की वकालत करता हूँ और कहता [...]

अंग्रेजी व हीन भावना

जब मैने पिछ्ला लेख लिखा था तब कोई इरादा नहीं था कि मैं कोई विवाद खड़ा करूं लेकिन ना जाने कुछ लोगों को वो पोस्ट विवादगर्भा लगी. खैर जाने दीजिये आप तो मेरी कहानी सुनिये जिसका वादा मैने अपनी पोस्ट में किया था. बचपन से अंग्रेजी ना जानना आपको कदम कदम पर परेशान करता है. [...]

सागर भाई की उलझन और रचना जी की माफी

मेरी पिछ्ली पोस्ट पर काफी अच्छे कॉमेंट आये.सागर जी और रचना जी के कॉमेंट प्रस्तुत हैं.
सागर भाईसा बोले काकेश जी , इस लेख में तो विषयांतर हुआ कोई बात नहीं पर इस लेख की अगली कड़ी में उसे भी पूरा करें। क्यों कि मुझे यह लग रहा है कि आप मेरी कहानी लिख रहे हैं।मैने [...]

भारत की राष्ट्रभाषा अंग्रेजी क्यों नहीं है??

आप को लग रहा होगा कि मैं क्या बकवास कर रहा हूँ…. हिन्दी चिट्ठा लिखता हूँ लेकिन अंग्रेजी की वकालत कर रहा हूँ. लेकिन नहीं जी … मैं ऎसा सोच समझ कर कह रहा हूँ. कारण है कि हमारे महान देश भारत में कोई भी काम अंग्रेजी के बिना नहीं होता. किसी भी प्राइवेट कंपनी [...]

स्वागत करें एक कनपुरिया पांडे जी का

कानपुर हॉस्टल में मेरे एक कवि मित्र हुआ करते थे.मित्र तो अभी भी हैं लेकिन उनसे मेरी मुलाकात पिछ्ले 12-13 सालों से नहीं हुई है.एक दिन अचानक उनका फोन आया और फोन करते ही बोले “काकेश भाई”. हम सोचे कि कोई ब्लॉगर मित्र ही होगा. वरना खाकसार को कौन याद करता है इस नाम से.पता [...]