चिट्ठाकारी

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ब्लॉगिंग में विमर्श:मन के प्रश्न !!

सबको लिंकित करने वाली नीलिमा जी,हम को न लिंकित करने की चूक कर, बता रही हैं कि हिन्दी ब्लॉगिंग में  विमर्श की नयी परंपराऎं बन रही हैं. अब कोई शोधार्थी यह कहे तो अपन की क्या विसात कि उससे सहमत ना हो. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हमने सोचा कि इस विमर्श के नये [...]

अनुगूँज 22: हिन्दुस्तान अमरीका बन जाए तो कैसा होगा – पाँच बातें

नौ-दो-ग्यारह रहने वाले यदि सुबह के भूले की तरह शाम को घर आकर “अनुगूंज बाइस” करें तो क्या हो ? किसी नये ब्लॉगर ने चुपके से मेरे कान में सवाल पूछा. अब हम भी कोई पुराने ब्लॉगर तो थे नहीं कि अपनी फुरसत का उपयोग,कुछ नया ना लिख पाने की हताशा में, अपने पुराने संस्मरणों [...]

हिन्दी चिट्ठाजगत..कुछ आत्मालाप..

हिन्दी चिट्ठाजगत की दुनिया आजकल शोधमय भी है और हिटास के प्रति जागरूक भी.कोई हिट होना सिखा रहा है तो कोई हिट करना.हिट पर आधारित सभी चीजें हिट हैं.हिट की हीट का ये असर है कि लोग हिट की चाह में लेखन कर रहे हैं.भले ही आप कहें कि हिट के लिये न लिखो खुद [...]

छोटे शहरों की बड़ी चिट्ठाकारी,सन्दर्भ-टाइम्स ऑफ इन्डिया.

रविवार 8 जुलाई को  अंग्रेजी के प्रमुख समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया में एक लेख छ्पा था ” Blogging straight from the heartland” . हाँलाकि मैं इस समाचार पत्र को पढ़ता हूँ पर मेरी नजर इस लेख पर नहीं पड़ी.शाम को श्रीश जी ने बातचीत के दौरान इस लेख के बारे में बताया. तुरंत खोज कर [...]

पूजा का प्रतिरोध और हम..

कल के टाइम्स ऑफ इंडिया में पूजा की तसवीर पहले पन्ने पर थी.चित्र नीचे देंखें ..खबर पढ़ी तो दिल दहल गया और साथ ही मन ही मन पूजा के साहस की प्रसंशा भी की.आज मसिजीवी ने जब इस पर लिखा और फिर सुजाता जी ने भी इसे छुआ तो रहा ना गया..और कुछ शब्दों की [...]

पूजा की नग्नता से उठते सवाल…..

कल योगेश जी ने बताया कि पूजा की अर्ध-नग्नता के पीछे किसी मीडिया वाले का हाल था.यदि ये सच है तो निन्दनीय है. सच जो भी हो मुझे आश्चर्य इस बात का है कि कैसे मीडिया इस बात को इतना बढ़ा चढा कर पेश कर सकता है.टाइम्स ऑफ इंडिया ने पूजा की अनसैंसर्ड चित्र को [...]

समूहबद्धता और जातिवाद…

पिछ्ले लेख पर ज्यादा प्रतिक्रियाऎं तो नहीं आयी लेकिन जो  भी आयीं उन्होने कुछ नये प्रश्न खड़े कर दिये.प्रमोद जी बोले यह दिल्‍ली ही नहीं, मुंबई- कमोबेश किसी भी बड़े भारतीय शहर की अंदरूनी डायरी है. इस अनुभव से नतीजा क्‍या निकलता है? एक तो वह जिसे आप समूहबद्धता की सहूलियत का सीधा, आसान-सा नाम [...]

अहमदाबाद और दिल्ली का जातिवाद ? ..

पहले रवीश जी की पोस्ट आयी अहमदाबाद के जातिवाद के बारे में.पढ़कर बहुत आश्चर्य हुआ. अब रवीश जी जैसा सम्मानित पत्रकार जब स्पेशल रिपोर्ट कर रहा है तो फिर शक की गुंजाइस तो थी नहीं फिर भी मन नहीं माना.अपने एक मित्र से संपर्क किया जो अहमदाबाद में रहे हैं तो उन्होने  भी इस तरह [...]

क्या केवल “सैक्स” ही बिकता है..एक “सैक्सी” विश्लेषण..

अपनी पिछ्ली पोस्ट में मैं कुछ उधेड़बुन में था कि ब्लौग क्या बिना उद्देश्य के भी लिखा जा सकता है … आप लोगों की टिप्पणीयों से साहस बंधा कि मुझे इस प्रश्न पर सर खपाने की बजाय लिखते रहना चाहिये …. इसलिये अब अपने सारे पूर्वाग्रह और दुराग्रह छोड़ के फिर से उपस्थित हुआ हूँ [...]

ब्लौगिंग का उद्देश्य .. और अपनी पहचान..

आज कई दिन बाद फिर से अवतरित हुआ हूँ इस ब्लौग में… इस बीच ना जाने कितने नये ब्लौग आ चुके होंगे और नयी पोस्ट तो और भी ज्यादा होंगी ..लेकिन मैं कुछ भी पोस्ट करने का साहस नहीं जुटा पा रहा था ..एक तो समय की कमी और दूसरी मन में ब्लौग को लेकर [...]