नराई हरेले की
कका बालकनी में बैठे हुए सामने पार्क में खेलते हुए बच्चों को देख रहे थे.साथ ही पातड़ा (पंचाग) भी देख रहे थे. मैने उनसे पूछा.
"कका.. पंचाग में क्या देख रहे हो..? "
"अरे देख रहा था हरेला कब है. भोल (कल) हरेला है."
"ओ..कल है! कका बताइये कल क्या क्या करना है. "
"अरे यहां [...]




