काकेश की कतरनें
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मैं कहीं कवि ना बन जाऊं….

By काकेश on February 5, 2008

आप कहीं यह अनुमान ना लगा लें कि मैं किसी कविता नामक सुकन्या के प्रेमपाश में बंधकर कवि बनना चाहता हूँ इसलिये मैं यह घोषणा करना चाहता हूँ कि मुझ बाल बच्चेदार को किसी से प्यार व्यार नहीं है (अपनी पत्नी से भी नहीं ) बल्कि मैं तो लिखी जाने वाली कविता से प्रेम की [...]

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