क्या अमरीका में सचमुच ऎसा होता है?

मैं कभी अमरीका नहीं गया …हाँलाकि मेरे कई मित्र अभी अमरीका में हैं. वैसे मेरे पास भी कई ऑफर आये अमरीका जाने के (आई.टी. में यह कोई बड़ी बात नहीं है) लेकिन ना जाने क्यों अभी तक खुद को तैयार नहीं कर पाया इस के लिये.

अभी कुछ दिनों पहले एक मित्र से मुलाकात हुई जो अमरीका में रह चुके थे. उन्होने अमरीका के बारे में एक मजेदार बतायी. जिस प्रकार भारत में लेन ड्राइविंग होती है उसी प्रकार अमेरिका में भी होती है. लेकिन सामान्यत; भारत में यह निर्धारित नहीं है कि किस लेन में कौन चलेगा. लेकिन अमेरिका में एक लेन (शायद सबसे बांये वाली) ऎसी होती है जिसे पूल-कार लेन कहा जाता है. इसमें चलने वाले अपनी गाड़ी की स्पीड सामान्य से ज्यादा रख सकते हैं और आमतौर पर इसमें ट्रैफिक जाम भी नहीं लगता…. लेकिन इसमें वही गाड़ी चल सकती है जिसमें एक से ज्यादा लोग बैठे हों. इसके पीछे तर्क यह होता है कि आप ट्रैफिक को कम करने के लिये कार पूल का उपयोग करें तो जितने लोग आपकी पूल कार में बैठे हैं उतनी गाडियाँ सड़क पर कम चल रही हैं. …तो इस लेन में चलने के लिये जरूरी है कि आपके कार में एक से ज्यादा लोग बैठे हों.

इससे निबटने का तरीका भी अमरीका वालों ने बहुत खूब निकाला. वहाँ दुकानों में इस तरह कि डमी मॉडल (खिलोने) मिलते हैं जो देखने में बिल्कुल जीते जागते इंसान की तरह ही लगते हैं. लोग इनको खरीद के अपनी गाड़ी में बिठा लेते हैं और पूल-कार लेन में आराम से अधिक स्पीड में चलते हैं.  

carpool

यह दाढ़ी और चश्मा लगाये सज्जन सचमुच में नहीं हैं वरन एक खरीदे हुए मॉडल हैं.

(चित्र गूगल इमेज सर्च द्वारा)

इसी से जुड़ा हुआ एक किस्सा और सुनाया उन्होने. एक व्यक्ति हमेशा ट्रैफिक की वजह से ऑफिस में देरी से पहुचता था. पहले उसने सोचा कि वह भी इस तरह की डमी खरीद ले लेकिन फिर उसके दिमाग में एक आइडिया आया. वह अपने घर के पास वाली सड़क में एक बोर्ड लेकर खड़ा हो जाता जिसमें लिखा होता ” Today Traffic is bad. Either spend two hours or pay me $15 and get there in 15 minutes” [आज सड़क पूरी तरह जाम है. या तो इस जाम में दो घंटे फंसे रहो या फिर मुझे 15 डालर दो और 15 मिनट में ऑफिस पहुंचो ] 

कौन कहता है कि केवल भारतीय ही जुगाड़ू होते हैं?

By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

13 comments

  1. इसमें चलने वाले अपनी गाड़ी की स्पीड सामान्य से ज्यादा रख सकते हैं
    काकेश इस लेन में हमने भी खूब गाड़ी चलायी है, कुछ बातें सही करूँगा – पहली जरूरी नही ये सब जगह हो, ज्यादातर ये उतने हिस्से में होती हैं जहाँ ट्रैफिक जाम ज्यादा रहता है, दूसरा इस में चलाने की स्पीड लिमीट भी उतनी ही होती है जितना उस हाईवे के लिये निर्धारित होती है। चूँकि बाकी की लेन में जाम होता है या ट्रैफिक ज्यादा होता है इसलिये पूल लेन में तुलनात्मक रूप से थोड़ा तेज गाडी जाती है।

    वैसे ये डमी वाला जुगाड़ पहली बार सुना है 🙂

  2. haa,lekin yeh lane kuchh hi jagaho pe hoti hai.Aur rahi baat jugad ki to pata nahi kitana sach hai.

  3. काकेश जी अमेरिका जाने की इच्छा रखने वाले भाइयो को नय्रे धंधे का आईडिया खुब दिया..दिन भर इअधर से उधर घूमे और पैसे भी कमाये..?

  4. bharteeyae samaj mae ham jasee avivahit single strreeyon kae liyae yae jaanakari bahut achhee hae . agli baar mae eas ek putla usa se jarur laaugee !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!1

  5. गजब है. फ्री में यात्रा ही नहीं 15 डॉलर की कमाई ऊपर से. वह दिन कब आयेगा जब हम जैसे पैदल भी इसी तरह का बोर्ड लेकर कारवालों को फांसने का काम करेंगे. क्या वह समय आनेवाला है?
    वैसे काकेश भाई पहले ही हल्के दर्जे के माईग्रेशन के शिकार तो हैं ही हम लोग. अपना गांव छोड़ शहर आ बैठे हैं. अब बड़े दर्जे के माइग्रेशन करने में कोई समझदारी नहीं है. अब प्लान ये बनाईये कि मूल की ओर कैसे लौटा जाए?

  6. जय जुगाड़, जुगाड़ ही जिंदगी है, चाहे भारत हो या यू एस ए या हो कोई और कोना दुनिया का 😉

  7. Kakesh bhai,bada anand aaya lekh padh kar.Sach kaha aapne ”Jugadupaan” ka jo adbhut samarthya ham bhaartiyon ke paas hai,uspar ham garv kar sakte hain.
    Ek prarthna thi,bhai ji.Tippaniyan to aapne dekhi hongi.Ab kshama kar dijiye…Ekakipan sachmuch bada kashtdayi hoti hai,aadmi ka dimaag chalne deta hai kya?.
    Bahut kuch apne aas paas ghat raha jo bada hi kashtdayi hai.Ve vishay aapke kalam ki baat joh rahe hain.

  8. वाह, हम तो परमानेण्ट डमी हैं। कार चलाना नहीं आता – सो हमेशा साथ बैठते ही हैं। यह अलग बात है कि हमें आज तक किसी महिला ने डमी नहीं बनाया।

  9. वाह बड़िया जानकारी है, अब ये बताइए कि डमी का इस्तेमाल क्या सिर्फ़ कार यात्रा के लिए ही होता है या जिन्दगी के किसी और पहलू में भी

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