उमर की रुबाइयों के अनुवाद भारतीय भाषाओं में

5. कुछ प्रमुख अनुवादों की चर्चा

पिछ्ले अंक में हमने रुबाइयों के कुछ हिन्दी अनुवादों की चर्चा की. आज कुछ और अनुवादों की चर्चा करते हैं. हिन्दी के अलावा विश्व की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में उमर की रुबाइयों के अनुवाद हो चुके हैं. जिनमें जर्मन, रशियन, अफ्रिकन, इटेलियन, डच, थाइ, अल्बेनियन भाषा शामिल हैं. अनेक भारतीय भाषाओं में भी रुबाइयों के अनुवाद हुए हैं.

बांग्लादेश के राष्ट्र कवि काज़ी नजरूल इस्लाम ने रुबाइयों का बंगला में अनुवाद 1958 में  किया.ज्ञात रहे कि नजरूल की गेय रचनाऎ नजरुल गीतिका की नाम से काफी प्रसिद्ध हैं जैसे रवीन्द्र नाथ टैगोर की रचनाऎं रवीन्द्र संगीत के अंतर्गत गायी जाती हैं उसी तरह. नजरूल ने उमर की रुबाइयों को ओमार खैय्याम गीति के अंतर्गत रखा है. बंगला भाषा में ही मुहम्मद शहीदुल्लाह का अनुवाद 1942 में ‘रुबाईयत-ई-ओमार खैय्याम’ (Rubaiyat-i-Omar Khaiyam) नाम से प्रकाशित हुआ था.ज़फर सिकन्दर अबू का बंगाला अनुवाद 1966 में ‘ओमार खय्याम’ नाम से आया है. इसके अलावा भी बंगला में अनेक अनुवाद हुए जिसमे कांती घोष, नरेन्द्र देव और शक्ति चट्टोपाध्याय के नाम प्रमुख हैं.

परमहंस योगानंद जिनकी पुस्तक ‘एक योगी की आत्मकथा’(Autobiography of a Yogi )  काफी प्रसिद्ध है उन्होने भी “वाइन ओफ द मिस्टिक’ (Wine of the Mystic) के नाम से एक पुस्तक लिखी है जिसमें खैय्याम की रुबाइयों के आध्यात्मिक पक्ष को समझाया गया.यह किताब करीब 60 वर्ष पहले लिखी गयी थी. कुछ सालों पहले इसे “रुबाइयत ऑफ ओमार खैय्याम एक्स्प्लेन्ड” (Rubaiyat” of Omar Khayyam Explained) के नाम से फिर निकाला गया.

narayan_das_cover_page पंडित नारायन दास, जिनका पूरा नाम पंडित अज्जदा अदिभतला नारायन दास था Pandit Ajjada Adibhatla Narayana Das और जो हिन्दी ,तेलगू,संस्कृत ,फारसी समेत नौ भाषाओं के जानकार थे, भी उमर खैय्याम से बहुत प्रभावित थे. उनका मानना था कि फिट्जराल्ड का अनुवाद उमर की रुबाइयों के साथ पूरा न्याय नहीं करता. इसी बात को सिद्ध करने के लिये उन्होने संस्कृत और तेलगू दो भाषाओं में रुबाइयों का अनुवाद कर डाला.यह अनुवाद 1932 में छ्पा और इसे उस समय का बहुत बड़ा साहित्यिक योगदान माना गया.

(बांये किताब का मुखपृष्ठ)

नीचे पहली रुबाई का संस्कृत अनुवाद.narayan_das_1st_page

जी शंकर कुरुप ने 1932 में मलयालम में रुबाइयों का अनुवाद किया.

1946 में ओमार खैय्याम नाम की एक हिन्दी फिल्म भी आयी थी. मुरली पिक्चर्स द्वारा निर्मित इस फिल्म में के.एल.सहगल,सुरैया,वस्ती और बैंजामिन शाकिर की प्रमुख भुमिकाऎं थी. इसके निर्देशक थे मोहन सिन्हा और इसमें संगीत दिया था इकबाल मोहम्मद ने. इसके एक गाने के बोल मुझे बहुत पसंद हैं जो इस प्रकार हैं.

बेदर्द ज़रा सुन ले ग़रीबों की कहानी
खाना तो है खाना इन्हें मिलता नही पानी

मालामाल के बिछौने पे है तू ऐश में खोया
हमसाया तेरा रात को पत्थर पे है सोया
तू ख़ुश है मुसलमानों को आराम कहाँ है
बतला मेरे हमदर्द इस्लाम कहाँ है
दोज़ख को भुला क्यों शोलाफ़शानी
बेदर्द ज़रा सुन ले … 
——————————-

बीमार ग़रीबों के लिए बन के भिखारी
ऎ भाइयों आए हैं खिदमत में तुम्हारी
है कार-ए-सबब आँख अगर रहम की खोली
दाता भला हो भर दे फ़क़ीरों की झोली
इस शाम से पैदा करो सुबह सुहानी
बेदर्द ज़रा सुन ले … 

इस गाने को  सुरैया ने गाया था.

अन्य भाषाओं में भी उमर पर बहुत फिल्में बनी पर उन पर चर्चा इस लेख का हिस्सा नहीं है. कई चित्रकारों ने उमर की रुबाइयों पर अनेक पेंटिग्स भी बनायी. अंग्रेजी की अनेक किताबें नामी गिरामी चित्रकारों की पेंटिग्स के साथ छ्पी.   RubaiyatDula

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ऊपर जो दो चित्र आप देख रहे हैं वो एडमंड डुलाक के चित्रों से भरपूर अंग्रेजी अनुवाद है. ये पुस्तक 1915 के आसपास प्रकाशित हुई थी. यह संस्करण अब तक का सबसे मंहगा और विशिष्ट संस्करण माना जाता है.

अगले अंक में चर्चा करेंगे मैथिलीशरण गुप्त और रघुवंश गुप्त के हिन्दी अनुवादों की…..

यह श्रंखला आपको कैसी लग रही है टिप्पणीयों से बतायें…

क्रमश:…………………………

श्रंखला के पिछ्ले लेख.

1. खैयाम की मधुशाला..

2. उमर खैयाम की रुबाइयों के अनुवाद..

3. मधुशाला में विराम..टिप्पणी चर्चा के लिये

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By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

4 comments

  1. अद्भुत! यह शृंखला तो बहुत शानदार बनती जा रही है. रुबाइयां मेरा जाना विषय नहीं है और विविध जानकारी के लिये मैं अपने को कृतज्ञ पाता हूं. आपके प्रति प्रशंसाभाव में भी उसी प्रकार इजाफा हो रहा है. धन्यवाद.

  2. मै ज्ञान जी से सहमत हूँ जितनी पोस्ट पढ़ती जा रही हूँ आप के प्रति श्रद्धा बड़ती जा रही है।

  3. Mai google pe serch kar rahi thi ki kahi se mujhe khayyam k kuch sher mil jaye but mai to ashary chakit rah gai yaha aakar yaha to pura khajana bhara pada he….. Bahut achha……… maine to is website ko apna homepage bana liya……

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