अजीत जी पब्लिक को ऐसे भी फूल ना बनायें

अभी ऑफिस के लिये तैयार हो रहा था कि अनूप जी उर्फ फुरसतिया का फोन आया. कहने लगे.. छा गये काकेश..क्या झक्कास ईमानदार चिरकुटई की है. अभी हमारे साथ वाले कानपुर हॉस्टल के किस्से भी लिखोगे. ज्यादा ना लिखें वरना वैसा ही कंटाप पड़ेगा जैसा रैगिंग के समय में पड़ा था.यह तो उन्होने मजाक में ही कहा था. (यहाँ पर मैं यह बताता चलूँ कि कानपुर के हॉस्टल में अनूप जी ,जिन्हे तब हम सभी सीनियरों की तरह “अनूप भाईसाहब” कहते थे, हमारे सीनियर होते थे. जब इन्हें पता चला कि हम भी कुछ कविता वगैरह करते हैं तो इन्होंने रात रात भर बैठाकर अपनी ढेर सारी कविताऐं हमें सुनायी थीं.कई बार हमारी कई कविताओं को इन्होने हम से ले लिया था और कॉलेज की मैगजीन में अपने नाम से छ्पवाया था.) हम सोचे कि अनूप जी सुबह सुबह किस मूड में हैं. हमने पूछा आखिर बात क्या हुई.बोले वो अजीत जी के ब्लॉग पर तुम्हारे बकलमखुद का पहला भाग पढ़ा था.तो अनूप जी का फोन तो रखवाया लेकिन हमारे भेजे में हमेशा की तरह उनकी बात कुछ समझ में ना आयी.

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि हम तीन दिन से पंगेबाज पुरस्कारों की तैयारियों में व्यस्त थे. कल रात बारह बजे तक कार्यक्रम की रिकॉर्डिंग खतम कर वीडियो बनाया. इसमें हमने वॉयस चेंजर सोफ्टवेयर का प्रयोग भी किया.सॉफ्ट्वेयर तो अच्छा है लेकिन हिन्दी में अभी भी इसकी वॉयस क्वालिटी उतनी अच्छी नहीं है. हो सकता है अगले वर्जनों में इसे सुधारा जाय. खैर हमने कार्यक्रम की सी डी बना के तीन सी डी एक खास चैनल को दी. यदि यह चैनल वालों ने भुगतान समय पर कर दिया तो हिन्दी ब्लॉगरों को यह सी डी मुफ्त प्रदान की जायेगी. अभी तो इस सी डी की पांच मिनट की झलकियां कल मैं पंगेबाज जी के ब्लॉग पर चढ़ाउंगा.

कंप्यूटर ऑन करने की सोच ही रहे थे कि एक टी वी चैनल से फोन आया. बतचीत कुछ ऐसी हुई.

हैलो क्या आप काकेश बोल रहे हैं?

हांज्जी, मैं काकेश

हाय काकेश ,हमें आपका नम्बर अजीत ने दिया है. हम अपने कल एयर होने वाले प्रोग्राम ये जिन्दगी कितनी टेड़ी है के लिये आपसे कुछ बात करना चाहते हैं. क्या आप आज दोपहर तीन बजे से लेकर चार बजे तक फौन पर उपलब्ध है?.

हांज्जी, ..न…नहीं जी ..हम दिलकार नेगी को पढ़ चुके हैं जी.

और तुरंत फोन कट गया.

तब तक हम समझ चुके थे कि आज अप्रेल फूल है और सब मिलकर हमें अप्रेल फूल बना रहे हैं. क्योंकि जब अजीत जी ने बकलमखुद शुरु किया था तो उनकी एक मेल हमारे पास आयी थी. उसके कुछ अंश ऐसे थे.(बिना उनसे अनुमति लिये छाप रहा हूँ)

काकेश जी आपसे साधिकार आग्रह है कि  ******बकलमखुद् की तैयारी कर लीजिए। ************अपने शौक, ब्लागमेनिया, परिजन, यारी-दुश्वारी, मस्ती की पाठशाला,नौकरी, बेकारी-बेज़ारी जैसे नगीने जड़े हो तो बढ़िया न हो तो भी जो लिखेंगे, रंग तो भी जमेगा ही।

आतुरता से प्रतीक्षारत…

अजीत

हम सोच रहे थे कि अपने बारे में क्या लिखें ??…कुछ तो है ही नहीं …या फिर कि लिखें भी कि नहीं लिखें और सोचते सोचते अनामदास जी का यह लेख आ गया. इससे हमें प्रेरणा मिल ही रही थी कि हमको तो सरकलमखुद नहीं ही लिखना है कि दो बातें हो गयीं. एक तो अजदक मियां का लेख आ गया और दूसरे अजीत जी का तकाजा. तो हमने तो अजीत जी को साफ साफ कह दिया कि हम अपनी व्यस्तताओं के चलते अभी सरकलमखुद बकलमखुद नहीं लिख पायेंगे.उनका जबाब तो क्या आता विमल भाई की चिट्ठी आ गयी लेकिन विमल भाई की चिट्ठी भी हमें अपने इरादे से नहीं डिगा पायी.

इसलिये हमें अनूप जी की बात पर भी यकीन नहीं हुआ.लेकिन फिर भी हमने कंप्यूटर ऑन किया और अजीत जी के ब्लॉग पर पहुंचे. वहाँ पहुंचे तो क्या देखते हैं कि हमारे बारे में ना जाने क्या अगड़म बगड़म लिखा है. अगड़म बगड़म लिखने का अधिकार या तो आलोक जी को है या फिर पंगेबाज को. अजीत जी ने आज अप्रेल फूल के दिन हमारे बारे में गलत सलत लिख कर पूरी ब्लॉग-जनता को बेवकूफ बनाया है. इस बात का अन्दाजा इस बात से भी मिलता है कि एक तो उन्होने हमें ईमानदार लिखा है. जो हमें जानते हैं वो तो अब तक हँस हँस कर लोटपोट हो गये होंगे और फिर उन्होने लिखा

हम यह बता देना चाहते हैं कि वे (यानि काकेश) ब्लाग दुनिया के उन लोगों में हैं जिनसे हमारी पिछले जन्म की रिश्तेदारी है।

अजीत जी आप किसे बेवकूफ बना रहे हैं. आज के दिन में जब लोग इस जनम की रिश्तेदारी नहीं निभाते तो पिछ्ले जनम की रिश्तेदारी क्या निभायेंगे. जनता बेवकूफ जरूर है पर इतनी भी नहीं जनाब. तो जनता को पक्का पता चल गया है कि यह आप हमारी मान-हानि करने के लिये हमारे बारे में कुछ भी छाप रहे हैं.

इसलिये सभी लोगों से अपील है वह इस पोस्ट को ना पढ़ें और जिन्होने पढ़ ली हो तो इसे सच ना माने.

सभी लोग जो बेवकूफ नहीं बने या जिन्हें पता है कि वह बेवकूफ नहीं है वह यहाँ जरूर टिप्पणी करें.जो वेवकूफ हैं वो भी यहाँ टिप्पणी करके बेवकूफ ना होने का सार्टिफेकेट ले सकते हैं. जिस हिन्दी ब्लॉगर की टिप्पणी हमारी पोस्ट पर नहीं आयेगी उसे बेवकूफ मान लिया जायेगा और अगले पंगेबाज पुरस्कारों में उसका नाम महामूर्ख पुरस्कार के लिये स्वत: नामांकित हो जायेगा. 

तो फिर देरी कैसी??? और क्यों…???

 

world-record

हम पंगेबाज को गिनीज बुक ऑफ रिकार्डस में जगह बनाने के लिये बधाई देते हैं.

   

By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

14 comments

  1. अजीब विडंबना है, चाहत लिये बैठा हूं महामूर्ख पुरस्कार पाने का.. पर अगर टिप्पणी ना किया तो भी आप हमें नामांकित नहीं करेंगे, क्या करें आजकल सभी मेरा नाम भूल रहे हैं.. और अगर टिप्पणी किया तो हमारा नामांकन ऐसे ही रिजेक्ट हो जायेगा..:(

  2. ये हमे मिलने वाले गिनीज के प्रमाण पत्र को यहा पर हमे देने से पहले ही जारी कर दिया गया..या इलाहॊ ये माजरा क्या है…:)

  3. हा हा हा …, मजा आया आपको यहाँ पढ कर भी और शब्दों के सफर में भी …

  4. अरे, इतना सब कुछ हो गया और मुझे पता नहीं. हम यहाँ मार्च मास ‘मनाने’ में लगे थे और आपने इतने बड़े-बड़े आयोजन कर डाले!

    वैसे इस सरकलम सॉरी बकलम की वजह से ये तो पता चला कि अनूप जी आपकी कविता सुनने के बहाने अपनी कविताएँ सुनाया करते थे. और आपकी कवितायें कॉलेज की पत्रिका में अपने नाम से छपवा चुके हैं. शुक्रिया है अजीत भाई को जिनकी बकलम की वजह से कितने सरकलम हो रहे हैं….:-)

    पंगेबाज जी को इस ‘पुरूस्कार’ के लिए बधाई. और हाँ, ये आपके पास पंगेबाज पुरस्कारों का जो वीडियो राईट्स है, उसका क्या लेंगे? मैं खरीदने के लिए राजी हूँ..

  5. आप बेशक अप्रिल फ़ूल मना रहे पर हम ‘दर्द हिन्दुस्तानी’से केस जीत गये है

  6. अरे भाई (या फिर बहन जी),

    किस हिन्दुस्तानी को दर्द हो रहा है? और आपने जो केस जीता उसमें क्या रखेंगे/रखेंगी? सच बोलियेगा और केवल सच बोलियेगा. वैसे बहुत केसी हिसा-किताब लग रहा है.

  7. 🙂
    जो शुरू में लिखा वही करने का मन हो रहा है। लेकिन अब कलम बकलम पढ़ने का मन है सो छोड़ रहे हैं। 🙂

  8. 🙂 ये अजीत जी की पिछ्ले जन्म की रिश्तेदारी क्या है इसका भेद जरुर खोलें जी, और अब एक पुरुस्कार के लिए दावा हम भी ठोक रहे हैं हम भी तो देखे इस मधुमक्खी के छ्त्तें में कित्ता शहद है

  9. ओहो ! तो आज ये तीर मारा है हमने ! चलिये, कनकौवे तो खूब काटे हैं बचपन में गैरों की छतों पर । आज अपनी छत से काग का शिकार किया ( ऐसा वो खुद कह रहे है )

  10. मैं भी टि‍प्पणी कर देता हूँ क्योंकि…
    सभी लोग जो बेवकूफ नहीं बने या जिन्हें पता है कि वह बेवकूफ नहीं है वह यहाँ जरूर टिप्पणी करें.जो वेवकूफ हैं वो भी यहाँ टिप्पणी करके बेवकूफ ना होने का सार्टिफेकेट ले सकते हैं. जिस हिन्दी ब्लॉगर की टिप्पणी हमारी पोस्ट पर नहीं आयेगी उसे बेवकूफ मान लिया जायेगा और अगले पंगेबाज पुरस्कारों में उसका नाम महामूर्ख पुरस्कार के लिये स्वत: नामांकित हो जायेगा.

Leave a comment

Your email address will not be published.