छोटे शहरों की बड़ी चिट्ठाकारी,सन्दर्भ-टाइम्स ऑफ इन्डिया.

रविवार 8 जुलाई को  अंग्रेजी के प्रमुख समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया में एक लेख छ्पा था ” Blogging straight from the heartland” . हाँलाकि मैं इस समाचार पत्र को पढ़ता हूँ पर मेरी नजर इस लेख पर नहीं पड़ी.शाम को श्रीश जी ने बातचीत के दौरान इस लेख के बारे में बताया. तुरंत खोज कर पढ़ा ..लेख पढ़ कर लगा कहीं कुछ अधूरा सा है .. हिन्दी चिट्ठाकारी [पल्लवी जी,जिन्होने ये लेख लिखा था, ने कहा है कि ये लेख हिन्दी चिट्ठाकारी पर नहीं वरन हिन्दी और अंग्रेजी चिट्ठाकारी दोनों पर था] पर लेख और उल्लेख केवल कुछ ही चिट्ठों का!! बात कुछ हजम नहीं हुई ..श्रीश जी से इस बाबत बात हुई हाँलाकि नाम छपने से श्रीश जी खुश तो थे  पर थोड़ा निराश लगे कि इसमें नारद, सर्वज्ञ आदि का नाम नहीं आया. उनका कहना था कि उन्होने इस का उल्लेख तो लेखिका से किया था पर ना जाने छ्पा क्यों नहीं. 

नारद,हिन्दी ब्लॉग्स डॉट कॉम और सर्वज्ञ का हिन्दी चिट्ठाजगत में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है…. और हिन्दी चिट्ठाजगत पर  लेख बिना इनके अधूरा सा लगता है.. इसके अलावा और भी कई महत्वपूर्ण स्तंभ (चिट्ठाकार) हैं हिन्दी चिट्ठाजगत में जिनके बारे में इस लेख में कोई जिक्र नहीं था.

वैसे बता दूँ कि इस लेख में किस किस का उल्लेख है.इसमें उल्लेख है यमुनानगर के श्रीश जी का, रतलाम के रवि जी का, जालन्धर के गोपाल अग्रवाल का, नागपुर के संतोष मिश्रा का, कोल्हापुर के नवीन तिवारी का. [मैने रवि जी और श्रीश जी के अलावा बांकी महानुभावों का चिट्ठा नहीं देखा है.यदि आपको मालूम हो तो टिप्पणी द्वारा बतायें ताकि लिंक दिया जा सके..पल्लवी जी ने अपने ई-पत्र में बताया है कि बांकी के चिट्ठाकार हिन्दी के नहीं वरन अंग्रेजी के हैं]. लेख में छ्पी रवि जी की फोटो बहुत अच्छी थी वो क्या कहते ना झक्कास. वैसे रवि जी ने इसका श्रेय अपनी पत्नी रेखा जी को दिया है. अब उनकी अच्छी फोटो में रेखा जी का हाथ कैसे है ये तो नहीं मालूम पर हाँ यदि कभी हमारी कोई खराब फोटो (जाहिर है खराब ही होगी) छपे तो (वैसे संभावना कम ही है) हम भी कहेंगे कि इसमें हमारी पत्नी का ना सिर्फ हाथ है वरन और भी बहुत कुछ है..आखिर उन्होने ही तो खिला पिला के इतना मोटा किया है कि अब तो आइने में भी पूरा मुँह नहीं समाता 🙂 खैर ये तो विषयातंर हो रहा है. लेख पर आते हैं.

पूरे लेख का चित्र देवाशीष जी के सौजन्य से यहां मौजूद है.

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लेख पढ़ने के बाद मैने उसी समय लेख की लेखिका पल्लवी जी को ई-पत्र लिखा और धन्यवाद सहित उन्हे सुझाया कि कुछ और प्रमुख हिन्दी चिट्ठाकारों के नामों को लेख में शामिल किया जा सकता था.मैने प्रमुख चिट्ठों के पते जानने के लिये उन्हे चिट्ठा जगत डॉट कॉम की सकियता सूची को देखने की भी सलाह दी. ताकि वो अपने अगले लेख में अधिकाधिक हिन्दी चिट्ठाकारों को सम्मिलित कर सकें.

पल्लवी जी ,जो टाइम्स ऑफ इंडिया की विशेष संवाददाता है,से मुझे किसी उत्तर की अपेक्षा नहीं थी लेकिन कल  मेरे पास जब उनका जबाब आया तो सुखद आश्चर्य हुआ. उन्होने अपने ई-पत्र में जो कहा उससे में सहमत होता दिखा.इसलिये आपकी जानकारी के लिये उसका सार आप तक पहुंचा रहा हूँ.

उनका कहना था कि उनका ये लेख हिन्दी चिट्ठाकारी पर नहीं वरन छोटे शहरों में रहने वाले हिन्दी चिट्ठाकारों पर केन्द्रित था जो तकनीक की बहुत अच्छी सुविधाऎं ना होने के बाबजूद चिट्ठाकारी कर रहे हैं. इसीलिये रतलाम के चिट्ठाकार रवि जी और यमुनानगर के चिट्ठाकार श्रीश जी और अन्य को चुना गया. (गौरतलब है कि तकनीक की अच्छी सुविधाऎं ना होने के बाबजूद दोनों चिट्ठाकारों का चिट्ठा तकनीकी विषयों पर ही आधारित है)

पल्लवी जी ने वादा किया है कहा है कि शीघ्र यदि वो एक लेख हिन्दी चिट्ठाजगत पर भी लिखेंगी तो मुझसे भी संपर्क करेंगी..जिसमें अधिकाधिक चिट्ठाकारों को शामिल किया जा सकेगा. आप लोग अभी से मुझे अपने बधाई संदेश भेज सकते हैं..हो सकता है फोटो देखने के बाद ना भेजें… 🙂

तो प्रतीक्षा कीजिये पल्लवी जी के अगले लेख की और इस लेख के लिये उन्हे पुन: धन्यवाद.

By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

13 comments

  1. सुश्री पल्लवी जी सही हैं
    हम महानगर में बैठकर जो काम करने की सोच नही पाते वह रवि जी एवं श्रीश जी कैसे कर लेते हैं!

    मैं तो रवि जी के ऊपर मिठाईयां खिलाने की उधारी गिन गिन कर रख रहा हूं.

  2. पल्लवी जी धन्यवाद तो करना ही चाहिए।यमुनानगर के श्रीश जी का, रतलाम के रवि जी का,भी धन्यवाद, जिन के कारण चिट्ठाकारी को यश मिल रहा है

  3. बहुत अच्छा लगा। यह समाचार पढ़ा था। रवि रतलामी और श्रीश बधाई के हकदार हैं। रविरतलामी की फोटो उनके मुकाबले बहुत झकास आ गयी। बधाई। 🙂

  4. भई, हमें पूरी बात कहनी नहीं आती – या समझानी नहीं आती. रेखा ने कोई दस बीस एंगल से कोई बीस पच्चीस फोटो खींची थी और जब उन्हें जमा पूरी तरह तब उसे भेजा. इसीलिए कहा कि उनका हाथ है!

    और हम फुरसतिया जी की भी बात समझ रहे हैं, फोटो की तरह झकास बनने के लिए प्रयास जारी रखा जाएगा 🙂

  5. अरे, असली बात तो रह गई, आप सभी का फिर से एक बार धन्यवाद.

  6. इस बार चाहे और किसी ना आये ना आये तुम्हारा तो पक्का आयेगा, खैर मजाक एक तरफ लेकिन अच्छा किया मेल डाल कर वैसे हम उसे पढ़कर समझ गये थे कि ऐसा ही कुछ वजह है।

  7. वैसे श्रीश और रविजी (रविजी के लिये तो अब ये आम बात हो गयी है ;)) को बधाई

  8. लेख पढ़कर बहुत प्रसन्नता हु ई।किन्तु मेरे हिसाब से तो ये सब चिट्ठाकार महानुभाव महानगरों में रहते हैं। यदि ये छोटी जगह के हैं तो मैं, जो 500 या शायद 600 की जनसंख्या व एक दुकान वाली जगह में रहती हूँ, जिसे मैं गाँव का दर्जा देने से भी हिचकिचाती हूँ, कहाँ की हूँ ? शायद बहुत ही छोटी जगह की और भी बहुत ही छोटी चिट्ठाकार !कद भी छोटा, बुद्धि भी छोटी, जगह भी छोटी । लगता है इस छोटेपन को पेटेंट करा लूँ ।
    कल जब दिल्ली की सड़क पार करना असंभव लगा और फिर अपने घुटनों को कष्ट देकर सबवे (यह शब्द भी मुझ छोटी जगह की प्राणी को अपनी भतीजी से पूछना पड़ा ! हमारे जंगल में ऐसी वस्तुएँ नहीं पाई जाती।) का उपयोग करना पड़ा ।
    जब मैं बेटियों से मिलने शहर आती हूँ तो वे उँगली पकड़ कर मुझे साथ ले जाती हैं व सड़क भी पार करवाती हैं। जैसे छोटे बच्चों को सड़क पर अन्दर की तरफ़ रखा जाता है वैसे !
    सो मैं चिटटकाकारों की गिनती में आऊँ ना आऊँ छोटी जगह की तो हूँ
    ही । इस श्रेय को कोई मुझसे छीने मुझे कदापि सह्य नहीं है।
    घुघूती बासूती

  9. बढ़िया समाचार. रवि भाई का नाम हो बहुत रोशन, तस्वीर तो राकेश रोशन!! बहुत खूब. बधाई. पल्लवी जी को साधुवाद.

  10. मैंने अपना मत पत्र में सपष्ट कर ही दिया था, अन्य साथियों के लिए यहाँ फिर लिखता हूँ:

    पल्लवी जी को भेजी जानकारी में मैंने नारद तथा सर्वज्ञ का लिंक दिया था। हाँ मैं इनका अधिक जिक्र नहीं कर सका क्योंकि उन्होंने कुछ निर्धारित प्रश्न भेजे थे जिनके जवाब मुझे देने थे, उन्हीं में मैंने इन दोनों साइटों का नाम और लिंक शामिल किया। इनके बारे में अधिक विस्तार से लिख सकूँ ऐसा कोई प्रश्न नहीं था।

    फिर भी मुझे लगता था कि चूंकि रिपोर्टर ने मुझसे संपर्क किया तो वह अवश्य हिन्दी चिट्ठे पढ़ती रहती होंगी अतः उम्मीद थी कि नारद का उल्लेख/लिंक किया जाएगा।

    मैं इस बात से निराश था लेकिन फिर जीतू भैया ने समझाया कि उस लेख का विषय भिन्न था, वह हिन्दी चिट्ठाकारी पर न था कि नारद आदि का नाम आता ही आता अतः हिन्दी का जितना उल्लेख हुआ वह भी संतोषजनक है।

    मुझे उनकी बात उचित जान पड़ी, लेखिका ने मेरे और रवि जी समेत कुछ अन्य लोगों से बात कर स्टोरी तैयार की थी अतः मेरी दी सब जानकारी का शामिल संभव न था।

    वैसे पल्लवी जी ने हमसे भी कंप्यूटर के साथ फोटो मंगवाई थी पर हमारे पास थी नहीं। अगर होती तो शायद हमारा फोटो भी छप जाता। 🙁 🙂

    मैने प्रमुख चिट्ठों के पते जानने के लिये उन्हे चिट्ठा जगत डॉट कॉम की सकियता सूची को देखने की भी सलाह दी. ताकि वो अपने अगले लेख में अधिकाधिक हिन्दी चिट्ठाकारों को सम्मिलित कर सकें.

    मैं आपकी इस बात से सहमत नहीं कि प्रमुख चिट्ठों की पहचान के लिए सक्रियता ही एकमात्र पैमाना है।

    कुल मिलाकर अखबारों में लेख छपने से हमारा मुख्य मतलब यह है कि आम हिन्दुस्तानी को हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में पता चले ताकि अधिकतम लोग इससे जुड़ सकें, इसलिए आगे भी ऐसे लेख छपते रहें ऐसी हमारी इच्छा है।

  11. भाई साहब आप लोगों ने वाकई एक बड़ा काम कर दिया है जाने अनजाने. अब आप माने या न माने. दुनिया सब कुछ जान रही है और मन ही मन मान रही है.

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