जुरासिक पार्क का सच

यह चिट्ठा 2 अप्रैल 2007 को यहाँ प्रकाशित किया गया था।

“जुरासिक पार्क”

कुछ दिनों पहले एक पोस्ट में पढ़ा था कि हिन्दी ब्लॉगिंग वाले जैसे जुरासिक पार्क में रहते हैं। उसी से मिलता जुलता एक कार्टून आज मिला। आप भी देखिये।

By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

3 comments

  1. भैय्ये कछ समझ मे नई आ रिया कि यह क्योकर है।
    हम तो बुरा मान गए ,हमे डायनासोर कह दिया।:) 🙂

  2. अच्छा, माडरेसन लगा लिए हो ।तूं भी सयाना हो गए भाई!:))

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