मंथली रिव्यू प्रजेंटेशन

अभी प्रशांत ऑफिस पहुंचा था और मेल चैक कर रहा था.साथ साथ यह भी प्लानिंग कर रहा था कि आज किस किस से चैट करनी है और फिर अपनी ऑर्कुट की स्क्रैपबुक चैक कर सब को जबाबी स्क्रैप दागना है कि इंटरनल फोन पर घंटी बजी. उधर से कलीग प्रिया थी.

हाइ… प्रसान्त …(उफ यह लड़की कभी प्रशांत नहीं बोल सकती क्या) ..उसने अपनी मधुर आवाज में कहा.

हाई….प्रिया ..हाउ आर यू….?

आइ एम फाइन …तुम्हे बॉस ढूंढ रहा था ..तुम्हें पता है ??

बॉस !! ….बॉस आज इतना जल्दी ऑफिस कैसे ….??

अरे ऑफिस नहीं आया अभी तक.उसने फोन किया था ..और बोला है जैसे ही प्रसांत आये उसे बताऊँ.

लेकिन क्यों यार..

पता नहीं यार ..लेकिन कह रहा था कि अर्जेंट काम है.

अर्जेंट काम !!

हाँ ….तो मैं उसे बता रही हूँ कि तुम आ गये….हो सकता वो फिर तुम्हे फोन करे.

प्रशांत का दिमाग चकरा गया.वह पिछ्ले कई दिन की बातों को याद करने लगा कि बॉस ने क्या क्या करने को कहा था. कोई ऐसी चीज जो शायद छूट गयी हो उससे.पिछ्ले एक महीने से तो बॉस ने कुछ काम के लिये कहा ही नहीं था. इन-फैक्ट पिछ्ले करीब दो महीनों से अब तक उसके पास कोई काम ही नहीं था.यहाँ तक की बॉस भी अक्सर खाली ही बैठा रहता. उसकी सैकेट्री भी बताती है आजकल बॉस अपने बेटे की प्रोजेक्ट रिपोर्ट उससे टाइप करवा रहा है. कोई मीटिंग वगैरह भी आजकल नहीं हो रही फिर क्या हो सकता है. कहीं ऐसा तो नहीं कि उसको निकालने का कोई इरादा हो कंपनी का. या फिर…वह सोच ही रहा थी कि फोन की घंटी बजी.  

हैलो …

हैलो सर…

हाँ प्रशांत …मैं अभी ऑफिस पहुंच रहा हूँ . तुम ऑफिस में ही रहना ….अर्जेंट काम है.

यस सर…और फोन कट गया.

अरे इतनी सी बात के लिये फोन क्यों किया बॉस ने, फिर वो कौन सा ऑफिस से बाहर कहीं जाता है. वो तो ऑफिस में बैठ कर ही या तो चैट करता रहता है या मेल.क्या हो सकता है? वह सोच रहा था कि तभी चैट पर उसके दोस्त ने घंटी बजाई.

हाई…..आर यू देयर ?? उसने दोस्त को कहा कि अभी वह बिजी है थोड़े देर में बात करेगा और फिर सोचने लगा. तभी बॉस का बुलावा आया.वह डरते डरते बॉस के केबिन में घुसा.

देखो प्रशांत आज सुबह सुबह हैड ऑफिस से फोन आया है कि कल मंथली रिव्यू होगा. प्रेजेंटेशन भी करना है.

मंथली रिव्यू..इतने दिनों बाद…और वो भी कल ही.

हाँ …ये लोग भी ना ….लास्ट मूमेंट में फोन करते हैं. अब इतनी जल्दी प्रेजेटेशन कैसे बनेगा और फिर डाटा भी तो कलेक्ट करना होगा ना.प्रशांत तुम आई.टी डिपार्टमेंट में फोन करो और उनसे सारे डेटा मांगो.

लेकिन सर आई. टी. वाले इतनी जल्दी डेटा थोड़े दे देंगे. वो तो मिनिमम..

अरे वो तो मालूम है वो लोग मिनिमम 4-5 दिन तो लगायेंगे. पर वो आई.टी. वाला नितिन तुम्हारा फ्रैंड है उससे बात तो करो.

ठीक है सर.   

प्रशांत को मालूम था कि बात करके कुछ नहीं होना लेकिन फिर भी बॉस ने कहा है तो बात तो करनी ही थी. बात की. वही जबाब मिला. कि तीन चार दिन से पहले डेटा नहीं मिल सकता. और फिर अभी तो आई.टी के लोग खाली भी नहीं हैं सब किसी नये प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं.

प्रशांत ने यह बात बॉस को बतायी तो पहले से ही परेशान टकलू बॉस और ज्यादा परेशान हो गया.फिर बोला.

तुम नोट करो प्रशांत. अभी प्रजेंटेशन की प्लानिंग करते हैं. पहले इन्नोवेशन प्रोजेक्ट्स लिखो. यहाँ पर जो नये इन्नोवेटिव काम किये हैं उनकी डिटेल्स देंगे.

सर.

तुम बता रहे थे ना तुमने एक्सल में कुछ नया बनाया है जिसमें एक कॉलम में फीगर चेंज करने से दूसरे में ओटोमेटिक फिगर चेंज हो जाती है.

सर…. लेकिन एक्सल में यह कोई बड़ी बात है नहीं है सर. एक कॉलम में एक फॉर्मूला लगाया और हो गया.

अरे यह तुम्हे मालूम है ना. हैड ऑफिस वालों को थोड़े मालूम है.

जी… लेकिन सर यह काम तो तीन-चार महीने पहले किया था ना.

अरे अभी तक हैड ऑफिस वालों को नहीं दिखाया ना. इसलिये उन्हें क्या मालूम. इसी वाले रिव्यू में डाल दो.

यस सर..और…

और वो स्टेशनरी रिडक्सन वाला प्रोजेक्ट भी डाल दो.

कौन सा सर ??

अरे पहले हम अपनी मेल का प्रिंट आउट लेके. उसके बेसिस पर अपनी सैकेट्री को रिप्लाई डिक्टेट करवाते थे ना. लेकिन अब हम मेल को डायरैक्ट कंप्यूटर में पढ़कर ही डिक्टेट करवा देते हैं. तो हुई ना स्टेशनरी सेव.

यस सर.

तो ये तो हो गये इन्नोवेटिव प्रोजेक्ट्स ….लेकिन अब बांकी की फिगर कहाँ से लायें. ये आई.टी. वाले भी ना. इस बार में चेयरमैन से इनकी कम्प्लेन करने वाला हूँ.

यस सर.

बॉस सोचने लगा. प्रशांत भी सोचने की एक्टिंग करने लगा. हांलाकि उसके दिमाग में चैट की प्लानिंग चल रही थी. तभी बॉस को एक आइडिया आया.

अच्छा तुम्हारे पास लास्ट मंथली रिव्यू का प्रेजेंटेशन होगा ना.

सर है तो ….लेकिन वो तो छ्ह महीने पहले हुआ था सर.

अरे वो छोड़ो … प्रजेंटेशन है ना.

यस सर.

तो बस उसी की फीगर में कुछ ऊपर नीचे करके नया प्रजेंटेशन बना दो.

लेकिन सर.

अरे छ्ह महीने पहले की फीगर थोड़े हैड ऑफिस वालों को याद है.बस थोड़ी लुक चेंज कर देना. कलर कम्बीनेशन बदल देना ताकि प्रेजेंटेशन नया सा लगे.

यस सर.

मानते हो ना मेरा दिमाग.

यस सर.सचमुच सर. सही आइडिया दिया सर.

तो हो गया सारा काम. अब प्रजेंटेशन बनाओ फटाफट.शाम तक मेरे को दे देना.

राइट सर.

प्रशांत की भी जान छूटी. उसने पी.सी. पर नजर डाली. तो कई दोस्त चैट पर ‘आर यू देयर’ कहके या ‘हाई’…कहके उसका इंतजार कर रहे थे.वो फिर से चैट करने में बिजी हो गया.

By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

15 comments

  1. Good one!
    Lekinh kakesh bhai maine to apne din ki shuruwat aapka yeh lekh padh kar kari hai, kai dost hi..r u there kah kar wait karrahe hai. Isliye abhi itna hi,
    bye,
    kiran

  2. हमारे ऑफिस की बात आपको कैसे पता चली सर जी.

  3. bahut khoob bhai mai apne din ki shuruaat net par churakuto ko khojane mai karta hun . Takaloo boss hamare yahan bhi hai use dekhakar din kharab jata hai . chkani khopadi ko jis din dekh leta hun us din net par baithane nahi milata . dhanyawad

  4. गुड है।
    अच्छा फ़्लो है कहानी मे। उपन्यासकार बनने के पूरे गुण है….

    भाई इसको आगे भी बढाओ।

  5. क्या बात है जी..सत्य को कहानी बताने वाले लोग बताना नही चाहते कि आफ़िसियल फ़ैक्ट बाहर आये..:)

  6. लिजिए एक हम ही हैं जो ऑफ़िस से चैटिया नहीं सकते, क्लास लें या चैटियाएं और अफ़्साने भी सबसे ज्यादा हमारे ही आम हुए थे। अच्छा लगा जान कर कि हम अकेले नहीं,

  7. समीर जी से सहमत हूँ । हालांकि मैं एक हाउस वाइफ हूँ ।

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