परुली : यह कैसी बीमारी?

“परु तो जर से हणक रही है हो.” (परु को तेज बुखार है). परुली की ईजा ने जजमानी के लिये निकलते हुए जोस्ज्यू से कहा.

“ठीक है मैं गड़वा बॉज्यू के वहां से ब्याव को (शाम को) मिक्सचर लेते आउंगा.”

परुली स्कूल भी नहीं गयी. दिन भर बुखार से तपती रही. उसकी ईजा ने ही घर के अधिकतर काम किये. फिर उसे बुखार में तड़पता छोड़कर ही वण (जंगल) चले गयी. परुली सोचती रही अपने संभावित भविष्य के बारे में.ब्या होने पर उसे हमेशा धोती पहनकर ही रहना होगा. सास-ससुर के आगे बड़ा सा घूंघट निकाल कर रखना होगा.पांच पांच गोरुओं का सारा काम करना होगा.उनका दूध लगाना होगा.उन्हें वण हंकाने जाना होगा. लकड़ियाँ,पिरूल,घास,पानी सब ही कुछ तो लाना होंगा, गुपटाले बनाने होंगे. कई सारे काम. इन कामों के बीच वह पढ़ तो नहीं ही पायेगी. यानि यदि ब्या हुआ तो उसे डॉक्टर तो क्या पढ़ाई के बारे में भी भूलना ही पड़ेगा.सोचते सोचते उसकी तबियत और खराब हो गयी.  

शाम को बाबू आये तो मिक्सचर लेते आये. उससे परुली को कुछ आराम तो मिला लेकिन पूरी तरह बुखार नहीं उतरा.लेकिन फिर भी उसने ईजा के साथ घर का काम कराया. ईजा के मना करने के बाबजूद भी वह गोरु-बाछों को घास डाल आयी. आटा ओल दिया और फिर चूल्हे में रोटी सैंकती रही. खाना खा चुकने के बाद बुखार फिर बढ़ गया लेकिन वह ईजा को कुछ बताये बिना वह सो गयी.

आज परु की बीमारी का सातवां दिन था. इस दौरान वह स्कूल भी नहीं गयी थी. हाँ जब भी बीच बीच मे आराम मिलता वह अपनी किताबों से कुछ कुछ पढ़ती रहती.मिक्सचर से फायदा ना होते देख बाबू प्रकाश मेडिकल से दूसरी दवाई भी लाये. दवाई खाने से बुखार कम होता लेकिन फिर आ जाता.जोस्ज्यू भी उसे मोरपंख से एक दो बार झाड़ चुके थे. कुछ लोगों ने कहा परु को नजर लग गयी है,पूछ कराओ. ईजा घर से थोड़े चावल लेकर पंडित जी से पूछ भी करवा आयी. पंडित जी ने भोलनाथज्यू थान की धूणी से कुछ भभूत भी दी. लेकिन उससे भी कुछ फायदा नहीं हुआ.

परु की आंखें एक्दम गड्ढे में चलीं गयी थी. फूल सा सुन्दर चेहरा एक्दम मुरझा गया था. बालों में इतने दिन ना नहाने की वजह से गांठे पड़ गयी थी.वह कुछ भी खाती तो उलटी हो जाती. शरीर भी धीरे धीरे सूख जैसा रहा था. किसी ने कहा कि इससे छॉ (भूत) लग गया है.किसी ने कहा कि किसी ने जादू कर दिया है परु पर, किसी ने कहा कि जागर लगाओ. किसी ने कहा वो शिब्बन पानवाला है वह कुछ दवाई देता है. परु के बाबू वह दवाई भी लाये लेकिन नतीजा वही रहा. पूरे गांव में तरह तरह की बातें होने लगी. कोई कहता कि परु को टी.बी. हो गयी है.ज्यादा थोड़े बचेगी अब यह. इसे भवाली सैनिटोरियम में भरती करो. उन दिनों टीबी से कई मौतें होती भी थीं. कोई कहता कि परुली तो हमेशा से ही बीमार रहती थी. इसीलिये तो ये लोग इसकी शादी जल्दी जल्दी करना चाहते थे. सामने अच्छी अच्छी बातें करने वाले भी पीठ पीछे तरह तरह की बातें बनाते.

परुली जब तेज बुखार में होती तो नीम-बेहोशी की जैसी हालत में कुछ बड़बड़ाती रहती.उसकी यह हालत देख उसकी ईजा भी बहुत दुखी थी.घर भी बिखरा ही रहता क्योंकि पहले घर की साफ सफाई का जिम्मा परू के ऊपर था.वह सुबह सुबह ही चीड़ की पत्तियों के बने झाडू से पूरे घर की सफाई करती. सारा सामान सही जगह पर रखती. अब वही बीमार थी तो घर को साफ करने की किसे सुध.ईजा परु के सिराने पर बैठी थी…और परु के सिर पर हाथ फेरे रही थी. परुली बेहोसी की जैसी हालत में पड़ी थी.वह कुछ बड़बड़ा रही थी. परु की ईजा ने ध्यान से सुनना चाहा. परु बड़बड़ा रही थी. मेरा ब्या मत करो ईजा….. बाबू मुझे डाक्टर बनने दो बाबू….. ईजा ..मैं ब्या नहीं करुंगी ईजा…मैं मर जाउंगी ईजा….ब्या नहीं करुंगी…..

ईजा ने सब कुछ साफ साफ सुना तो उसकी आंखों से आँसुओं की धारा बह निकली. वह फिर परु के सिर पर हाथ फेरने लगी. हाथ फेरते फेरते उसने मन ही मन कुछ निश्चय किया.   

जारी……..

पिछले भाग : 1. परुली…. 2. परुली: चिन्ह साम्य होगा क्या ?? 3. परूली : शादी की तैयारी 4. परुली:आखिर क्या होगा ? 5. परुली: हिम्मत ना हार ..6. परुली : ब्या कैसे टलेगा 7. परुली:ब्या टालने की उहापोह 8. परुली : अभी नानतिन ही हुई हो

By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

12 comments

  1. Dear Kakesh Da,
    Bahut Maja Aane laga hai kahani mai …….iska eshsas tab ho jata hai ki jese hi mai office mai pahunchta hoon wednessday ko sabse pahle kahni padta hoon Paruli………….. Phir dusra kam
    …………. Agar Aapne Reader’s ki choice se kahni ko katam kar diya hota to itna sundar laken kese padne ko milti……
    Likta raho kakesh Da……..

  2. Namaskar Kakesh jee,

    Ab mujhe ummed ho rahi hai kee jaldi hee sab theek ho jayega, apni Paruli ke saath jaroor acha hee hoga. Kahani ne achanak ek naya mod le liya hai, aap apne hisaab se likhte rahiye. Ab ekdum se sab badhiya jaa raha hai, Bas Paruli jaldi se achi ho jaye ab.

  3. kakesh bhai,
    aaj to bahut senti wala mahol ho gaya hai. paruli ko jaldi thik karo..Prakash medical, shibban se thik nahi huwa…kya pata punetha ya pandey doctor kuch kar de,..
    It’s getting very serious day by day, keep it up!

    namaskar,
    kiran

  4. “शिवानी” के “चौदह फेरे” सी कथा लगने लगी है अब—अगली कड़ी की प्रतीक्षा है……

  5. काकेश जी, बहुत बढ़िया कहानी जा रही है. परुली का हाल जानने के लिए आगे की कड़ी का इंतजार है…

  6. अब तो परूली को डाक्टर बनना ही चाहिये. परुली डाक्टर बन कर शायद इस इलाके के भी काम आ पाये, जहाँ लोग दवाओं के साथ छाड-फूंक को भी इलाज का एक तरीका मानते हैं.

    कहानी अच्छी जा रही है, लेकिन मैं कहानी में कुछ ठहराव सा महसूस कर रहा हूँ….

  7. सही है,
    सही जा रहे हो !!!
    इन्तजार रहेगा, बेशब्री से अगले अँक का ..

    नवीन पाठक,

  8. वाह, आपने तो बचपन की याद दिला दी….. घऱ में कोई बीमार होता ,तो ये मिक्सचर आता ,और इसका भोग हम भी छुप छुप कर लगाते थे , आजकल के डॉक्टर तो ये मिक्सचर देते ही नहीं…..

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