परुली: हिम्मत ना हार ..

परुली मन में सोच चुकी थी कि अब उसे हिम्मत से काम लेना है.मन ही मन उसने कुछ सोचा और अपने अन्दर बैठे हुए डर से लड़ने की कोशिश करने लगी.आज पहली बार उसे गोल्ज्यू का ध्यान आया. उसने सुना था गोल्ज्यू से कुछ भी मांगो वह मिल जाता है. उसने सवा रुपये का उचैण (करार) अलग रखा और मन ही मन गोल्ज्यू से कहा कि गोल्ज्यू मुझे डॉक्टर बना देना.आपके थान आके एक घंटी जरूर चढ़ाउंगी. स्कूल जाते समय भी वह चुप ही थी. उसकी सहेलियां उसे छेड़ रहीं थी.

“क्यों परु भिंन्ज्यू के साथ दिल्ली कब जा रही है रे…” …परुली चुप

“अरे ये तो इंतजार ही कर रही है कब इसका ब्या हो और यह यहाँ से भागे.”

“परु तेरी किस्मत बहुत अच्छी है रे. बहुत पुन्न किये होंगे तूने.कौन कौन से बर्त (व्रत) रखे रे तू ने हमको भी बता ना”

“दिल्ली जा के हमें भूल मत जान रे…” उसकी सहेलिया उसे अंगाव लगाती और हँसती लेकिन परुली चुपचाप अपनी सोच में चली जा रही थी.

स्कूल में भी हाफ-टाइम (इंटरवल) में परुली सीधे अपनी मैम के पास पहुंची.उसने विस्तार से अपनी मैम से पूछा कि डॉक्टर बनने के लिये क्या क्या करना पड़ता है. यह पढ़ाई कहाँ कहाँ से होती है और इसमें लगभग कितना खर्चा आता है. मैम ने भी उसे पूरी बात बतायी.

शाम को बाबू घर आये तो उनको चाय बनाके देते हुए वह बोली.

“बाबू आज मैने अपनी एक मैडम से बात की थी.”

“क्या बात की थी परु…”..बड़े प्यार से जोस्ज्यू ने पूछा. जब से उसका ब्या ठीक हुआ है तब से वह उससे ऐसे ही प्यार से बात करने लगे थे.

“यही कि डॉक्टर बनने के लिये क्या क्या करना पड़ता है.”

“डॉक्टर….?? “. जोसज्यू भी मुस्कुराये बिना न रह सके. “कौन डॉक्टर बन रहा है …तू… तू डॉक्टर बनेगी ?” उपहासात्मक लहजे में जोस्ज्यू ने कहा….

“हाँ बाबू ” उसकी आवाज में दृढ़ता थी.

“तो बन जाना बेटा पहले तेरा ब्या हो जाये फिर जो चाहे बन जाना.” जोस्ज्यू ने बबाल टालने के लहजे में कहा.

“नहीं बाबू मैं यह ब्या नहीं करुंगी …” उसी दृढ़ता से परुली ने जबाब दिया.

अब जोस्ज्यू चौंके….”क्या कहा ब्या नहीं करेगी… क्यों नहीं करेगी…”. अपने हाथ की चाय को जमीन में रखते हुए वह बोले.

“मुझे डॉक्टर बनना है बाबू…”

“अरे डॉक़्टर बनना इतना आसान नहीं है बेटा…”

“मुझे मालूम है बाबू उसके लिये पी.एम.टी का इमत्यान देना पड़ता है. मैं वह इम्त्यान पास कर लुंगी बाबू…”

“लेकिन डॉक्टरी में तो ढेर सारे डबल भी लगेंगे ना.”

“मेरी मैम कह रही थी कि मेरे बोर्ड में अच्छे नम्बर आये तो मुझे वजीफ़ा (स्कॉलरशिप) मिल जायेगा. फिर किसी बैंक से बात करने से वहाँ से भी कुछ डबल मिल सकते है. जब मेरी नौकरी लग जायेगी तो बैक का पैसा तार (चुका) देंगे.”

जोस्ज्यू के पास उसकी बातों का कोई जबाब ना था उनको गुस्सा आ गया उनकी समझ में आ गया था कि यह सारा किया धराया उसकी किसी टीचर का ही है.

“तो तू स्कूल में जाके पढ़ने की बजाय यही सब करती है. यही सिखाते हैं तुझे स्कूल में.रुक मैं तेरी टीचर से बात करुंगा. कौन टीचर है उसका नाम बताना तो. ”     

परुली तो बाबू के गुस्से को देख के डर गयी.

नहीं बाबू…मैं तो….

” ज्यादा करेगी तो तेरा स्कूल जाना बंद करा दुंगा.वैसे भी अब तेरा ब्या ठीक हो गया है अब तुझे पढ़ने की क्या जरूरत है.  “

“नहीं बाबू ….लेकिन …”

“आने दे तेरी ईजा को आज…उसने ही तुझे कपाव (सर) पर चढ़ा रखा है ”

जोस्ज्यू गुस्से में उठकर चले गयी. परुली बाबू के गुस्से को देख के डर तो गयी लेकिन इस बात से उसकी हिम्मत और बढ़ गयी. उसने सोच लिया कि अब जो भी हो वह साफ साफ कह देगी उसे यह ब्या नहीं करना फिर बदनामी हो तो हो….

जारी……..

पिछले भाग : 1. परुली…. 2. परुली: चिन्ह साम्य होगा क्या ?? 3. परूली : शादी की तैयारी 4. परुली:आखिर क्या होगा ?

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पिछले भाग को पढ़कर मेरे को एक पाठक ने मेल किया कि मैं उन्हे परुली की पूरी कहानी मेल पर भेज दूँ क्योंकि उनको इतना इंतजार करना अच्छा नहीं लगता.मैं उनकी भावना की कद्र करता हूँ.उनको तो मैने उत्तर दे दिया लेकिन बाँकी पाठको की जानकारी के लिये बता दूँ मैने परुली की कहानी अभी लिखी नहीं है. मैं इसके प्रत्येक भाग को बुधवार की सुबह ही लिखता हूँ. उस समय जैसे भाव मन में आते हैं वैसा ही लिख देता हूँ. कभी कभी सोचता हूँ कि यदि पूरी तरह सोच समझ के इस कहानी को लिखता तो शायद और अच्छा लिख पाता लेकिन फिर यह भी लगता है कि ऐसे लिख भी पाता कि नहीं. तो परुली का क्या होगा यह मेरे को भी नहीं मालूम. कभी कभी लगता है उस परिस्थिति में वह डॉक्टर नहीं बन पायेगी तो शायद वह भी गाढ़ में कूद मार दे या फिर ब्या कर के गोपाल के साथ ही चले जाये…लेकिन फिर लगता है उसने गोल्ज्यू से मन्नत मांगी है तो वह डॉक्टर बन ही जायेगी. …लेकिन क्या होगा यह तो अभी मेरे को भी नहीं मालूम …मेरी तरह आप भी इंतजार कीजिये.

By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

27 comments

  1. Namaskar Kakesh jee,

    kakesh jee Intejaar badhta hee jaa raha hai, aakhir kee kya hoga paruli ka, kya golu devta uski ishha poori karenge, kya woh wakai main doctor ban payegi? bas Intejaar hee kar sakte hain, ab toh khuch guess bhee nahi kiya jaa raha hai.

  2. तो भाइ अब जरा आप मिलिये हमे ,हमे पूरी कहानी एक ही बार मे पढनी है चाहे आपके दिमाग का कैट स्कैन कराना पडे. अब इतनी तसल्ली नही है हममे..:)

  3. आप को अपनी कहानी का जो भी अन्त करना हो-पर मेरी तो यही इच्छा है कि पारूली डाक्टर बने ,बडीं सी कार हो सा मे पारूली ऐसी ही सहज रहें अपने जैसी दूसरी पारूली की मदद करे।

  4. वाकई, कहानी बहुत अच्छी बुनी जा रही है इसमे कोई शक़ नही!!
    और आभा जी की सहमति जताते हुए मैं भी यही कहना चाहूंगा कि परूली जरुर जरुर बनेगी डॉक्टर!!

  5. काकेश, आपकी परुली की कहानी आज पढ़ी। शुरू से लेकर अंत तक। बहुत अच्‍छा लिखा है। अंत सकारात्‍मक हो तो अच्‍छा लगेगा।

  6. अब परुली ने गोल्ज्यू का उचैण रख दिया है… अब तो उसे डॉक्टर बनना ही है… अगले भाग का इंतजार रहेगा…

  7. Shayad Paruli ke Babu maan jaye…
    ya phir shayad Gopal he Paruli ko support kare…Doctor banane me…
    Khair ye to Shadi ke baad Gopal or Paruli ke understanding per bhe depend karta, But this could be turning point of this story to meet it to a good end.

  8. kahani main ab kuch kahaniyon ka put aats dikhai de raha hai. Per phir bhi Kakesh Ji…. pahadi samaj or logo ko dhyam main rakh ker hi Paruli ko aage badhayiyega. Main Paruli ko ek pahadi ladki ki tarah pahadi samaj main struggle karte hue dekhna chahta hoon. Main yeh janana chahta hoon ki ek pahadi grameen ladki kaise humae gaon main humare samaj or rishtediri se struggle karti hai.

    This story shhould not be like the story another lady struggler in any part of India. It should be very specific to our pahadi society higlighting the specific instances of issues in our society. Thats my expectation and demand.

  9. Kakesh ji Kahani mai ab ab ab kya to laga hi hai magar intzar Agale wed 19 ka raehga jab Joshi ji parruli k madam se milengae……….
    …………………..

  10. काकेश जी,

    लेखक और लेखन, दोनों के महत्व का पता आज चला. कितने उत्सुक हैं लोग यह जानने के लिए कि परुली के साथ क्या होगा?

    कहानी बहुत बढ़िया चल रही है. परुली की चिंता अब मुझे नहीं है. इतनी काबिल लड़की की चिंता करना भी व्यर्थ है. वह ख़ुद अपने लिए रास्ता निकालेगी. हाँ, ये जानने की उत्सुकता रहेगी कि परुली अपने लिए रास्ता कैसे निकालती है.

  11. काकेश, शब्द नहीं हैं कुछ कहने को । परुली तो अब अपनी ही ठहरी, उसका ध्यान रखना चेला ।
    घुघूती बासूती

  12. परुली की कहानी तो अच्छी चलती जा रही है, लेकिन जहा तक मेरा अनुमान है, काकेश दा इसको लम्बा खीच रहे है….
    देखो पहले भाग मै कहानी काफी लम्बी थी, फिर थोडा छोटी हुयी, और आज तो २ मिनट भी नही लगे पढ्ने मै…
    क़ाकेश दा,,,, एक दिन पुरा बुद्दवार बैठ के कहानी को अन्जाम दे दो…
    अब इन्तजार नही होता…

  13. Dear Shri Kakeshji,

    Thanking you writing good story and the its creat eagerness to know what happen in next episode.

    If you can write in actual “Kumaoni” language, which can help to learn Kumaoni language meanings. I can understnad our language and slightly can speak but, we are not able to correct pronounciation always.

    If possible please look into it.

    Thank you very much.

    With best wishing / regards.

    Ramesh Sharma (Bhatt)
    Jaipur

  14. Kakeshda,

    Good story. This still may be reality in many of our villages.

    Agar Paruli ka byah karaoge to humme jaroor bulana (joking).

    Harish Bourai

  15. Namaskar Kakesh Ji
    Kya Hall hai kakesh ji mujhe jara ye bata dijye please ki aap kahani Bhudwaar (Wednesday) ko hi kyo likhte ho jis din man kare likhne ka us din likh diya karo kyo ki aap jitni jaldi likhoge hum utni jaldi puri story pad sakte hai na, aur ye kahani Bhaut achee hai aap isko hardcopy main publish karvye, aap ek achee writer ho Kakesh ji, aur agar priya ki shaddi ho bhi jaati hai gopal se to shayad gopal priya ko delhi le ja ker docteri ki padaye karvaye vo uska pati hai to uski bhavnao ki kadar to karega hi………..Baaki Priya ki kismat vo us se kya kervati hai,

    Thanks & Regards
    Harish Sati
    Fortune Institute of International Business
    Plot No 5, Rao Tula Ram Marg
    Opp- R&R Army Hospital, Vasant Gaon
    New Delhi 110057
    Email- Harshsati@yahoo.co.in
    Mobile- 999*******edited
    Website- http://www.fiibindia.com

  16. Dear Kakesh Ji,
    Really Interesting story. Kahaani main jis shaili ka aap istemaal karte hain, lagta hai ki apne gaon (village) main hi baithe hain. Aapke dimaag main kahaani ka ant (end) sakaratmak (positive) hai ya Nakaratmak (negative) jo bhi ho lekin hum to yahi ummeed karenge ki Paruli ki ichchha poori ho taaki paathakon ko bhi kuchh prerna (inspiration) mile.

    Keep it up. All the best.
    Chanchal Singh Gariya

  17. दाज्यू, हम भी नवीन पाठकजी से सहमत हैं। परूली को अपने हिसाब से चलाना हम लोगों के हिसाब से नही थोड़ा हकीकत के करीब रहे तो शायद ज्यादा प्रभाव छोड़ेगी ऐसा हमें लगता है। जहाँ तक डाक्टर बनने का है वो शादी के बाद भी बन सकती है, इसके लिये ब्याह काहे को रोकने का।

  18. कहते हैं – सब्र का फल मीठा होता है , लेकिन अब सब्र होता नहीं … क्या करें? कहानी अच्छी चल रही है …..

  19. kakesh ji thanx for giving us such a good live story on todays life.
    it is very touchable & we realise it after we read it that also now in villages there is no importance of studies.
    i know that paruli have that guts to become a doctor. so plz. make her a doctor and give the society an example .

  20. paruli jesi kahani aor likne aor sabka dhyan apni or khichan main appka bahut bara fan hanu.
    appki kahani mujhe bahut pasand hain.
    mejhe jaroor ake kahani likh kar bhejhain.

    Ram prasad

  21. Dear Friend
    what happened to next part of story of Paruli. For the last one month or so I am not receiving parts of story. Please send it now.
    thanks, regards,

    PCT
    New Delhi

  22. Hello
    Namaskar Kafi dino ke bad main esmain likh raha hun
    samay kam hai isliy baki kal likhunga

  23. Dear Friends This holi is celebrate in my native place – Neolia sara earlier and we also celebrate holi in Delhi also. We request to all uttrakand celebrate our traditional event joyfully.

  24. Holi ka maza hi kuch aur hai holi gane wale or sunene wale ko koti parnam meri taraf se.

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