टिप्पणीयाँ और कॉपीराइट

हिन्दी चिट्ठाजगत चोरी की घटनाऎं बीच बीच में सामने आती रहती हैं. कॉपीराइट का प्रश्न भी यदा-कदा उठता ही रहता है. अभी कुछ दिनों पहले टिप्पणीकार की किसी पोस्ट पर भी टिप्पणीयों पर कॉपीराइट की चर्चा हुई थी. इसलिये हमने सोचा कि इस यक्ष प्रश्न को फिर से उठाया जाय.

मेरी एक पोस्ट पर किसी बहन जी ने एक लंबी टिप्पणी की थी.जिसे मैने एक पोस्ट के रूप में आपके सामने रखा. हाँलाकि मुझे शक था कि यह कहीं ना कहीं से कॉपी की गयी है और इसका जिक्र भी मैने अपनी पोस्ट में किया था. इसी पोस्ट के बारे में रचना जी ने बताया कि यह यहाँ से कॉपी की गयी है. अब मानिये कि उस समीक्षा की मूल लेखिका या लेखक कल को मेरे को कॉपीराइट के अंतर्गत चार्ज करे कि मैने उसके कंटेंट की चोरी की है तो मैं क्या जबाब दूँ??

इस तरह से तो कोई भी छ्द्म नाम से कुछ भी कॉपीराइट कंटेंट किसी टिप्पणी में डाल सकता है. इस प्रकार की घटना में कॉपीराइट की चोरी का इल्जाम किस पर लगना चाहिये..क्या चिट्ठाकार पर जिसके चिट्ठे पर वह टिप्पणी है या उस अनाम पर जिसका कोई पता ही नहीं है..सिवाय आई.पी. ऎड्रेस के.

क्या मेरे को वह पोस्ट और वह टिप्पणी हटा देनी चाहिये? कृपया सुझायें.

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By काकेश

मैं एक परिन्दा....उड़ना चाहता हूँ....नापना चाहता हूँ आकाश...

7 comments

  1. aap ko woh tippani nahin hatani chaheeyae , maene is vajeh turant khoja aur link dalaa , aap ko woh link tippani kae sath daal dena chaheyae
    vase mujeh to link dalne kae baad laga kahi esa naa ho log mujeh hee is kament kii behan je samjeh lae , kyoii mae behanjee shabd ko jayaada pasand nahin kartee hun !!!!!!!!!!

  2. अगर चोरी का माल किसी ने आप के यहाँ टिप्पणी में चस्पाँ कर दिया तो वहाँ तक तो ठीक है.. मगर आप चोरी के माल को अगर उठाकर अपने घर में सजा लेंगे तो शायद..
    मुश्किल बस इतनी है कि अगर आप को ये जानकारी होगी तो आप ऐसा क्यों करेंगे..

  3. यह कानून का विषय है और कोई कानूनी जानकार अच्छा बता सकता है पर मेरे विचार से, जिस तरह से किसी अखबार या पत्रिका में प्रकाशित लेख की जिम्मेवारी न ही उसके लेखक की होती है पर उसके प्रकाशक की, उसी तरह से चिट्ठा में प्रकाशित सामग्री की जिम्मेवारी न केवल उस टिप्पणीकार की होनी चाहिये पर चिट्ठामालिक की भी।

    किसी चिट्ठे पर तब तक कोई सामग्री प्रकाशित नहीं हो सकती जब तक की चिट्ठामालिक अनुमति न हो। यह बात अप्रसांगिक है कि चिट्ठामालिक ने टिप्पणी मॉडरेशन का विकल्प नहीं लिया है।

    यदि कोई टिप्पणीकार, टिप्पणी के रूप में किसी और की चिट्ठी पोस्ट कर दे और चिट्ठामालिक उसे प्रकाशित कर दे, तो क्या कहा जा सकता है कि यह ठीक है?

    यदि टिप्पणी बेनाम है तो कैसे मालुम होगा की वह बेनाम व्यक्ति ने पहले वाली टिप्पणी नहीं की थी। यह तभी हो सकता है जब वह जिसने पहले टिप्पणी की हो आकर कहे कि वह मेरी टिप्पणी है और दूसरी टिप्पणी उसने नहीं की।

    यदि कोई टिप्पणीकार किसी की निन्दा कर दे तो मेरे विचार से न केवल वह टिप्पणीकार ही दोषी है पर वह चिट्ठामालिक भी।

  4. आलोक पुराणिक जी ने बिलकुल सही कहा कि कॉपीराईट का एक अर्थ राईट टू कॉपी भी समझते हैँ कुछ लोग….

  5. दूसरे का माल छापना आता तो कापीटाइट उल्लंघन में है लेकिन इन मामलों में बहुत सारे Ifs औरButs हैं,

    आपके विस्टा का जुगाड़ भी बता दिया है ट्राई करके बताईयेगा काम किया की नही।

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